
पलामू (झारखंड): विदेशी अंशदान विनियमन विधेयक (FCRA) 2026 को लेकर गठित 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय दल (Joint Parliamentary Committee) में पलामू के सांसद विष्णु दयाल राम को महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
संसद द्वारा गठित इस विशेष संयुक्त संसदीय दल में दोनों सदनों के प्रमुख सांसदों को स्थान दिया गया है, जो इस विधेयक के विभिन्न तकनीकी, विधिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की व्यापक समीक्षा करेगा। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी पलामू सांसद को ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक राष्ट्र, एक चुनाव) को लेकर गठित संयुक्त संसदीय दल में अहम जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है।
🙏 प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष का जताया आभार: निष्ठापूर्वक दायित्व निर्वहन का संकल्प
सांसद विष्णु दयाल राम का आधिकारिक बयान:
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शीर्ष नेतृत्व के प्रति कृतज्ञता: समिति में नामित होने के पश्चात सांसद विष्णु दयाल राम ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रति औपचारिक आभार व्यक्त किया।
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सार्थक योगदान का भरोसा: उन्होंने कहा कि संसद द्वारा उन्हें जो गरिमामय दायित्व सौंपा गया है, उसका वे पूरी निष्ठा, समर्पण और उच्च स्तर की जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करेंगे।
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विधेयक का गहन अध्ययन: सांसद ने स्पष्ट किया कि विधेयक के प्रत्येक बिंदु पर गहन विचार-विमर्श, विधिक विश्लेषण और सूक्ष्म अध्ययन के माध्यम से देशहित व आंतरिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से वे अपना सकारात्मक योगदान देंगे।
👮 पूर्व डीजीपी से लगातार तीन बार सांसद तक का सफर: प्रशासनिक व विधायी अनुभव का लाभ
सांसद का राजनीतिक और प्रशासनिक जीवन:
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डीजीपी के रूप में सेवा: राजनीति में आने से पूर्व विष्णु दयाल राम भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं और वे झारखंड राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) के सर्वोच्च पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
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संसदीय सफर: पुलिस सेवा से सेवानिवृत्ति के उपरांत उन्होंने वर्ष 2014 में पहली बार पलामू लोकसभा क्षेत्र से विजय हासिल की। इसके बाद जनता ने उन पर पुनः विश्वास जताते हुए वर्ष 2019 में दूसरी बार और वर्ष 2024 के आम चुनाव में लगातार तीसरी बार सांसद चुनकर संसद भेजा।
🗣️ लोकसभा में सक्रिय भागीदारी: जनहित और पलामू के विकास के लिए निरंतर मुखर
संसद में प्रदर्शन और पलामू के मुद्दे:
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बहस में अग्रणी भूमिका: सांसद विष्णु दयाल राम लोकसभा में झारखंड राज्य की ओर से सबसे अधिक विधायी बहसों में भाग लेने, नीतिगत चर्चा करने और तारांकित-अतारांकित प्रश्न उठाने वाले अग्रणी सांसदों में गिने जाते हैं।
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क्षेत्रीय विकास पर जोर: वे संसद के पटल पर पलामू संसदीय क्षेत्र में औद्योगिक विस्तार, रोजगार सृजन, रेल संपर्क और सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े बुनियादी मुद्दों को प्राथमिकता के साथ उठाते रहे हैं।

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