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Digital Arrest Cyber Fraud: सीबीआई का देशभर में ‘ऑपरेशन चक्र-VI’, 20 राज्यों में 89 ठिकानों पर छापेमारी कर 3 गिरफ्तार

नई दिल्ली: डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) के नाम पर आम जनता को कानून व गिरफ्तारी का खौफ दिखाकर करोड़ों रुपये ऐंठने वाले शातिर साइबर अपराधियों के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने देशव्यापी स्तर पर कड़ा प्रहार किया है।

सीबीआई ने ‘ऑपरेशन चक्र-VI’ (Operation Chakra-VI) के अंतर्गत तीन बड़े संगठित साइबर मामलों में एक साथ 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित कुल 89 ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की। इस दौरान जांच एजेंसी ने गिरोह के 3 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। छापे वाली जगहों से बैंक खातों से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज, संदिग्ध इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल उपकरण और वित्तीय लेन-देन के कई महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए गए हैं।

🎭 पुलिस व सरकारी अधिकारी बनकर देते थे झांसा: महीनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर ऐंठे पैसे

अपराधियों का कार्यप्रणाली (Modus Operandi) और दबाव बनाने का तरीका:

  • फर्जी पहचान का जाल: सीबीआई के अनुसार, आरोपी खुद को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, सीबीआई अफसर, ईडी या अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों का प्रतिनिधि बताकर लोगों को फोन करते थे।

  • झूठे मुकदमों का डर: पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि उनके नाम से कोई अवैध पार्सल पकड़ा गया है अथवा वे किसी संगीन आपराधिक मामले में लिप्त हैं।

  • कैमरे के सामने बंदी: गिरफ्तारी से बचने के नाम पर पीड़ितों को वीडियो कॉल पर लगातार उपस्थित रहने को बाध्य किया जाता था, जिसे वे ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहते थे।

  • मानसिक प्रताड़ना: कई हफ्तों या महीनों तक गंभीर मानसिक तनाव में रखकर पीड़ितों के बैंक खातों में जमा जीवनभर की गाढ़ी कमाई को विभिन्न खातों में जबरन ट्रांसफर करवा लिया गया।

💸 तीन मामलों में 42 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी: बिट्स पिलानी से लेकर गुजरात व कर्नाटक तक शिकार

प्रमुख मामलों का विवरण और हड़पी गई राशि:

  • बिट्स पिलानी (BITS Pilani) मामला: इस मामले में पीड़ित को लगभग 3 महीने तक लगातार डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले ठगों ने पीड़ित से ₹7.67 करोड़ की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर करा ली।

  • गुजरात मामला: गुजरात के एक अन्य पीड़ित को भी करीब 3 महीने तक वीडियो कॉल के जरिए मानसिक रूप से बंधक बनाए रखा गया और उससे ₹19.24 करोड़ की राशि ठग ली गई।

  • कर्नाटक मामला: कर्नाटक के एक नागरिक को लगभग 1 महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर उससे ₹15.45 करोड़ ऐंठे गए। इन तीनों मामलों को मिलाकर कुल धोखाधड़ी ₹42 करोड़ से अधिक बैठती है।

🏦 ‘म्यूल अकाउंट्स’ के जरिए रकम की हेराफेरी: हरियाणा, कोलकाता के खाताधारकों की भूमिका उजागर

ठगी की रकम को खपाने वाले गिरोह का नेटवर्क:

  • हरियाणा का आकाश: जांच में पता चला कि हरियाणा निवासी आकाश के बैंक खाते में ठगी के करीब ₹1.95 करोड़ ट्रांसफर हुए थे। उसने यह खाता विशेष रूप से खुलवाया था और पैसा आते ही उसी दिन उसे दूसरे खातों में लेयरिंग (Layering) कर ट्रांसफर कर दिया।

  • कोलकाता का राजा करमाकर: कोलकाता के राजा करमाकर की व्यावसायिक फर्म के बैंक खाते में लगभग ₹1.50 करोड़ की ठगी की रकम भेजी गई थी।

  • ज्योति रानी का खाता: ज्योति रानी के बैंक खाते में भी ठगी की राशि का एक बड़ा हिस्सा आया, जिसमें से कुछ नकदी निकाली गई और बाकी रकम अलग-अलग अज्ञात खातों में स्थानांतरित कर दी गई।

  • नेटवर्क का विस्तार: सीबीआई पकड़े गए तीनों आरोपियों और खाताधारकों से पूछताछ कर गिरोह के अंतरराष्ट्रीय तार और मास्टरमाइंड तक पहुंचने में जुटी है।

🔬 डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच तेज: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत सख्त कार्रवाई

जांच एजेंसी की रणनीति और विधिक कदम:

  • डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण: छापेमारी में जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और बैंक रिकॉर्ड्स की राज्य फोरेंसिक प्रयोगशालाओं में गहन तकनीकी जांच कराई जा रही है।

  • लेन-देन की ट्रेल: वित्तीय जांच एजेंसियां इस बात की कड़ियां जोड़ रही हैं कि ठगी की रकम किन-किन शेल कंपनियों या विदेशी खातों में भेजी गई।

  • सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court) ने भी डिजिटल अरेस्ट और साइबर अपराधों के बढ़ते खतरों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच एजेंसियों को प्रभावी और बहु-राज्यीय समन्वय बनाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मामले में आगे की कानूनी व दंडात्मक प्रक्रिया तेजी से जारी है।

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