
मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कचरे के कुप्रबंधन और सर्वत्र फैली गंदगी की समस्या को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) को बेहद कड़ी फटकार लगाई है।
अदालत ने महानगर की चरमराई सफाई व्यवस्था पर तीव्र असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा शहर कचरे के ढेरों और गंदगी से अटा पड़ा है, जबकि नगर पालिका का प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय प्रतीत हो रहा है। पीठ ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि संबंधित वार्ड अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं, तो न्यायालय के पास उनके विरुद्ध अदालत की अवमानना (Contempt of Court) की सीधी कार्रवाई शुरू करने के अतिरिक्त कोई अन्य विकल्प शेष नहीं रहेगा। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान बीएमसी के शीर्ष अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए। पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा कि बुनियादी नागरिक स्वच्छता और कचरा प्रबंधन की उपेक्षा करके मुंबई को ‘अंतरराष्ट्रीय शहर’ कैसे कहा जा सकता है? न्यायालय ने नगर निकाय को अपनी संपूर्ण व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अंतिम अवसर प्रदान किया है।
📋 सभी 26 वार्डों के प्रभारी अधिकारियों की मांगी सूची: लापरवाही मिलने पर सीधे हटाने के निर्देश
न्यायालय के कड़े निर्देश और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP):
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वार्ड प्रभारियों की सूची तलब: हाईकोर्ट ने बीएमसी प्रशासन को स्पष्ट आदेश दिया है कि मुंबई के सभी 26 प्रशासनिक वार्डों में सार्वजनिक सड़कों की स्वच्छता और जनस्वास्थ्य की निगरानी करने वाले नोडल अधिकारियों की पूरी सूची अदालत में प्रस्तुत की जाए।
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सफाई अभियान की SOP पेश करने का आदेश: नगर निकाय को निर्देश दिया गया है कि वह शहर भर में प्रभावी कचरा संग्रहण और सफाई अभियान से संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure) तैयार कर कोर्ट के समक्ष रखे।
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दोषी अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई: पीठ ने सख्त हिदायत दी कि यदि निरीक्षण के दौरान किसी भी प्रमुख सड़क या सार्वजनिक स्थल पर कचरा डंप पाया जाता है, तो इसके लिए जिम्मेदार चिन्हित अधिकारियों को पद से तत्काल हटाया जाना चाहिए। अदालत ने खोखले व झूठे आश्वासनों और जमीनी स्तर पर कार्य न दिखने पर भारी नाराजगी जताई।
🏭 कांजूर डंपिंग ग्राउंड मामले पर हुई सुनवाई: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से जागरूकता का सुझाव
पर्यावरण और वायु प्रदूषण के मुद्दे:
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कांजूर मार्ग याचिकाएं: यह संपूर्ण सुनवाई कांजूर डंपिंग ग्राउंड से उत्पन्न होने वाले घातक वायु प्रदूषण, दुर्गंध और स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को लेकर दायर विभिन्न जनहित याचिकाओं पर हुई।
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जन-जागरूकता पर जोर: अदालत ने कचरा प्रबंधन के प्रति जनचेतना विकसित करने के लिए नगर निगम को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल अभियानों की सक्रिय सहायता लेने का व्यावहारिक सुझाव दिया।
🇸🇬 सिंगापुर के सख्त स्वच्छता मॉडल का दिया उदाहरण: 7 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
वैश्विक नियम और सुधारात्मक दंड प्रणाली:
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भारी जुर्माने का प्रावधान: सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी और कचरा फेंकने वालों पर लगाम लगाने के लिए उच्च न्यायालय ने सिंगापुर के कड़े कानूनी प्रावधानों का उल्लेख किया।
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आर्थिक दंड और सामुदायिक सेवा: सिंगापुर में सार्वजनिक स्वच्छता नियमों का उल्लंघन करने पर 2,000 सिंगापुर डॉलर या उससे अधिक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाता है; साथ ही दोषी व्यक्ति को दंड स्वरूप सार्वजनिक स्थानों की सफाई करने का अनिवार्य सुधारात्मक आदेश (Corrective Work Order) भी दिया जाता है।
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अगली तारीख मुकर्रर: बॉम्बे हाईकोर्ट ने नगर निगम को सुधार की ठोस रूपरेखा प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 7 अक्टूबर को निर्धारित की है।

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