
चंद्रपुर (महाराष्ट्र): चंद्रपुर स्थित ऐतिहासिक एवं संरक्षित लालपेठ विशाल शिवलिंग के जीर्णोद्धार समारोह से ठीक पहले एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
इस प्रस्तावित कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने वाली हैं। समारोह से ऐन पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने संरक्षित स्मारक के आसपास कथित अनधिकृत निर्माण को लेकर मंदिर सेवा समिति को वैधानिक नोटिस जारी कर दिया है।
लालपेठ स्थित यह एकाश्म विशाल शिवलिंग भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक घोषित है। पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के नियमों के तहत किसी भी संरक्षित स्मारक की सीमा से 100 मीटर तक का दायरा पूर्णतः ‘प्रतिबंधित क्षेत्र’ (Prohibited Area) माना जाता है, जहां किसी भी प्रकार के नए निर्माण पर रोक होती है। वहीं, 100 से 300 मीटर तक का दायरा ‘नियंत्रित क्षेत्र’ (Regulated Area) होता है, जहां निर्माण के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति अनिवार्य होती है।
🧱 100 मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में पक्का निर्माण: ग्रेनाइट, दीवार और शेड पर आपत्ति
पुरातत्व विभाग के निरीक्षण में सामने आई खामियां:
-
निरीक्षण में खुलासा: ASI के नियमित निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि शिवलिंग परिसर के अत्यंत निकट ग्रेनाइट पत्थर बिछाने के साथ-साथ सीमेंट की ईंटों से पक्की दीवार और शेड का निर्माण कराया गया है।
-
अवैध करार दिया निर्माण: पुरातत्व विभाग ने इन सभी गतिविधियों को अधिनियम के तहत प्रतिबंधित क्षेत्र में किया गया अनधिकृत निर्माण माना है।
-
यथास्थिति बहाल करने का आदेश: नोटिस में लालपेठ विशाल शिवलिंग मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष को निर्माण कार्य तत्काल रोकने और पहले से किए गए निर्माण को हटाकर परिसर को पूर्व स्थिति में लाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने इस संदर्भ में धारा 20(ए) का हवाला दिया है।
⚖️ 2 वर्ष की सजा और ₹1 लाख का जुर्माना: विधायक निधि से निर्माण पर उठे सवाल
दंडात्मक प्रावधान और वित्तीय स्रोत:
-
सख्त कानूनी प्रावधान: एएसआई के नोटिस के अनुसार, संरक्षित स्मारकों के नियमों का उल्लंघन करने पर 2 वर्ष तक के कारावास, 1 लाख रुपये तक के जुर्माने अथवा दोनों का विधिक प्रावधान है।
-
विधायक निधि से निर्माण: जानकारी के अनुसार, परिसर में चल रहे इस निर्माण कार्य के लिए स्थानीय भाजपा विधायक किशोर जोरगेवार ने अपनी विधायक स्वनिधि से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई है।
-
अनुमति पर संशय: सवाल यह उठ रहा है कि क्या विधायक निधि से निर्माण शुरू कराने से पहले ASI या केंद्रीय प्राधिकरण से अपेक्षित एनओसी (NOC) ली गई थी या नहीं।
👮 पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी: लोक आंदोलन न्यास ने भी की शिकायत
कानूनी शिकंजा कसने की प्रक्रिया:
-
पुलिस शिकायत की तैयारी: पुरातत्व विभाग के सूत्रों के अनुसार, विभाग मंदिर समिति के पदाधिकारियों के विरुद्ध स्थानीय थाने में औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है, जिससे मामला आपराधिक जांच के दायरे में आ सकता है।
-
स्थानीय स्तर पर विरोध: इस बीच लोक आंदोलन न्यास के जिलाध्यक्ष नितिन बन्सोड ने भी इस अनधिकृत निर्माण को लेकर पुरातत्व विभाग में शिकायत दर्ज कराकर मामले को और गंभीर बना दिया है।
❓ जीर्णोद्धार समारोह से पहले खड़े हुए कई सवाल: क्या था विधिक आधार?
आयोजन और प्रशासनिक जवाबदेही:
-
तैयारियों के बीच नोटिस का झटका: एक ओर शहरभर में अमृता फडणवीस के स्वागत और जीर्णोद्धार समारोह को लेकर व्यापक बैनर-पोस्टर लगाए गए हैं, वहीं दूसरी तरफ ASI की नोटिस ने पूरे आयोजन की वैधता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
-
सूचना बोर्ड की अनदेखी: परिसर में पहले से ही ASI का चेतावनी और सूचना बोर्ड मौजूद था। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या धार्मिक भावनाओं और जीर्णोद्धार की आड़ में राष्ट्रीय विरासत के संरक्षण नियमों की खुली अनदेखी की गई?

Comments are closed.