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अहमदाबाद में युगल गर्ग ने लहराया परचम: वर्ल्ड पैरा आर्चरी सीरीज 2026 में जीता कांस्य पदक

गुहला/चीका (हरियाणा): गुजरात के अहमदाबाद में संपन्न हुई ‘वर्ल्ड पैरा आर्चरी सीरीज-2026’ में तीसरा स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक (Bronze Medal) जीतने वाले चीका के होनहार पैरा तीरंदाज युगल गर्ग का आज गृहक्षेत्र आगमन पर नागरिकों द्वारा ऐतिहासिक और भव्य स्वागत किया गया।

उनकी इस गौरवमयी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि से संपूर्ण क्षेत्र में हर्षोल्लास की लहर दौड़ गई है। परिवार में उत्सव जैसा वातावरण है और युगल के निवास पर बधाई देने वाले शुभचिंतकों, सामाजिक संगठनों और खेल प्रेमियों का तांता लगा हुआ है।

🎯 दृष्टिबाधित होने के बावजूद नहीं टूटने दिया हौसला: 5 से 9 सितंबर तक चला मुकाबला

दृढ़ संकल्प और प्रतियोगिता का विवरण:

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन: चीका निवासी सुभाष गर्ग के सुपुत्र युगल गर्ग ने 5 से 9 सितंबर तक अहमदाबाद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पैरा आर्चरी प्रतियोगिता में सटीक निशानेबाजी का प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान सुरक्षित किया।

  • कमजोरी को बनाया ताकत: पिता सुभाष गर्ग ने बताया कि युगल दृष्टिबाधित (आंखों से देखने में अक्षम) हैं, परंतु उन्होंने इस शारीरिक अक्षमता को कभी अपनी प्रगति में बाधा नहीं बनने दिया।

  • सफलता का आधार: युगल की यही चुनौती उनकी सबसे बड़ी शक्ति सिद्ध हुई, जिसके बूते उन्होंने पैरा आर्चरी स्पर्धाओं में कड़ा अभ्यास शुरू किया और वैश्विक स्तर पर पोडियम फिनिश हासिल की।

🏆 कोच सचिन के मार्गदर्शन में साधा अचूक निशाना: युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत

प्रशिक्षण और सफलता की यात्रा:

  • कठिन परिश्रम: पिता के अनुसार, युगल ने अपने व्यक्तिगत कोच सचिन के सानिध्य में लंबे समय तक सुबह-शाम कड़ा अभ्यास और कठिन पसीना बहाया।

  • अटूट आत्मविश्वास: मजबूत इच्छाशक्ति, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर युगल ने देश-विदेश के दिग्गज तीरंदाजों को पछाड़ते हुए कांस्य पदक पर कब्जा जमाया।

  • क्षेत्र का नाम रोशन: परिजनों ने कहा कि युगल की इस स्वर्णिम सफलता ने न केवल परिवार का मान बढ़ाया है, बल्कि चीका क्षेत्र सहित संपूर्ण भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर चमका दिया है।

  • भव्य अभिनंदन: आज चीका पहुंचने पर स्थानीय नागरिकों, परिजनों एवं रिश्तेदारों ने फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ युगल का नागरिक अभिनंदन किया।

🥇 हरविन्द्र सिंह धंजू की विरासत को बढ़ाया आगे: पैरा खेलों में चीका का गौरवशाली इतिहास

चीका की पैरा तीरंदाजी परंपरा:

  • पैरालिंपिक की प्रेरणा: उल्लेखनीय है कि चीका क्षेत्र का पैरा खेलों, विशेष रूप से तीरंदाजी में पूर्व से ही अत्यंत गौरवशाली इतिहास रहा है।

  • धंजू से मिली प्रेरणा: पैरालिंपिक खेलों में चीका के हरविन्द्र सिंह धंजू ने तीरंदाजी में ऐतिहासिक पदक जीतकर वैश्विक स्तर पर भारत का डंका बजाया था।

  • परंपरा का विस्तार: अब युवा तीरंदाज युगल गर्ग ने विश्व पैरा तीरंदाजी सीरीज में पदक हासिल कर इसी स्वर्णिम परंपरा को नई ऊंचाई दी है।

  • उज्ज्वल भविष्य की कामना: क्षेत्रवासियों और खेल विशेषज्ञों ने युगल को आशीर्वाद देते हुए आशा व्यक्त की कि वह आगामी पैरालंपिक एवं अन्य एशियाई चैंपियनशिप्स में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर लाएंगे।

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