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बाघों के बीच पहाड़ पर लगता है अनोखा मेला, BTR प्रबंधन ने जारी की गाइडलाइन

उमरिया (मध्य प्रदेश): विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (BTR) में कृष्ण जन्माष्टमी मनाने की परंपरा बेहद अनूठी और ऐतिहासिक है।

रिजर्व के भीतर पहाड़ की चोटी पर स्थित सैकड़ों वर्ष पुराने प्राचीन श्रीराम-जानकी मंदिर (बंधवाधीश मंदिर) में भगवान श्रीराम को श्रीकृष्ण (कान्हा) और माता सीता को राधा रानी के स्वरूप में पूजने की अनूठी परंपरा सदियों से चली आ रही है। ताला गांव से लगभग 15 किलोमीटर दूर घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों पर स्थित इस ऐतिहासिक किले के पट आम दिनों में आमजन और पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद रहते हैं। वर्ष में केवल एक दिन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर ही मंदिर के पट विधिवत खोले जाते हैं और यहां विशाल पारंपरिक मेले का आयोजन होता है।

👑 महाराजा मार्तंड सिंह की ऐतिहासिक शर्त: जिसके कारण आज भी कायम है परंपरा

बांधवगढ़ रियासत और मेले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

  • बघेल राजवंश का इतिहास: बांधवगढ़ पूर्व में बघेल राजाओं की राजधानी व शासन का केंद्र रहा है। बाद में रीवा के तत्कालीन महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव ने मध्य प्रदेश शासन को टाइगर रिजर्व निर्माण हेतु बांधवगढ़ का विशाल भूभाग सौंपा था।

  • दान के समय रखी गई शर्त: स्थानीय इतिहासकार बहादुर सिंह बघेल के अनुसार, महाराजा मार्तंड सिंह ने सरकार के समक्ष यह विशेष शर्त रखी थी कि बांधवगढ़ किले में जन्माष्टमी पर लगने वाले पारंपरिक मेले और धार्मिक अनुष्ठानों को कभी बंद नहीं किया जाएगा।

  • नियमों में विशेष छूट: वन्यजीव संरक्षण के कड़े कानूनों और कोर जोन में सामान्य आवागमन प्रतिबंधित होने के बावजूद, इसी ऐतिहासिक समझौते के तहत श्रद्धालुओं को वर्ष में केवल एक दिन किले तक जाने की औपचारिक अनुमति दी जाती है।

🏹 श्रीराम ने अनुज लक्ष्मण को भेंट किया था किला: ‘बांधवगढ़’ नाम की पौराणिक कथा

किले का पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व:

  • भाई का किला: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लंका विजय और 14 वर्ष के वनवास से लौटने के उपरांत भगवान श्रीराम ने अपने छोटे भाई लक्ष्मण को यह सामरिक दुर्ग उपहार स्वरूप सौंपा था।

  • नामकरण: ‘बांधव’ अर्थात भाई और ‘गढ़’ अर्थात किला—इसी कारण इस ऐतिहासिक स्थल का नाम ‘बांधवगढ़’ पड़ा।

  • जीवंत होता है जंगल: सामान्य दिनों में शांत और बाघों की दहाड़ से गूंजने वाला यह इलाका जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरी तरह भक्तिमय हो उठता है।

📋 BTR प्रबंधन ने जारी की सुरक्षा गाइडलाइन: हाथी और जिप्सियों से होगी गश्त

मेले के दौरान सुरक्षा और निगरानी की रूपरेखा:

  • 135 कर्मियों का पहरा: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्रीय संचालक अनुपम सहाय के अनुसार, मेले के सुचारू संचालन और सुरक्षा हेतु BTR के लगभग 135 अधिकारी, वनकर्मी और श्रमिक मुस्तैद रहेंगे।

  • 29 ड्यूटी पॉइंट्स: पूरे वन मार्ग पर 29 संवेदनशील ड्यूटी पॉइंट्स चिन्हित किए गए हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 6 क्विक रिस्पॉन्स जिप्सियां और प्रशिक्षित हाथियों के दल लगातार गश्त करेंगे।

  • प्रवेश व्यवस्था: श्रद्धालुओं को केवल ‘ताला मुख्य गेट’ से ही निर्धारित जांच और प्रवेश पत्र सत्यापन के उपरांत आगे जाने दिया जाएगा। गेट पर मेडिकल टीम, दवाइयां, स्ट्रेचर और प्राथमिक उपचार की पूरी व्यवस्था रहेगी।

  • आयु सीमा का नियम: पहाड़ी की खड़ी चढ़ाई और सुरक्षा जोखिमों के मद्देनजर 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों और 65 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को पहाड़ी मंदिर क्षेत्र में जाने की अनुमति नहीं दी गई है।

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