
बैतूल पटाखा बाजार से अवैध कार्बाइड गन बेचने वाला गिरफ्तार देशभर में 1200 लोग झुलसे, बैतूल में भी चार घायल
बैतूल पटाखा बाजार से अवैध कार्बाइड गन बेचने वाला गिरफ्तार
बैतूल। दीपावली से पहले पुलिस ने अवैध रूप से बिक रही खतरनाक कार्बाइड गनों पर बड़ी कार्रवाई की है। कोतवाली पुलिस ने न्यू बैतूल ग्राउंड स्थित पटाखा बाजार में छापामार कार्रवाई कर एक युवक को गिरफ्तार किया है, जो कार्बाइड रसायन से चलने वाली गन बेच रहा था।
थाना कोतवाली को मुखबिर से सूचना मिली कि इफ्तेखार नामक व्यक्ति समीर पटाखा दुकान के पास कार्बाइड गन बेच रहा है। सूचना के आधार पर उप निरीक्षक छत्रपाल सिंह धुर्वे ने टीम के साथ मौके पर दबिश दी। वहां संदिग्ध अवस्था में मिले युवक ने अपना नाम इफ्तेखार पिता इसामुद्दीन खान (35), निवासी आजाद वार्ड टिकारी, बैतूल बताया। तलाशी के दौरान उसके पास से ग्रे रंग की प्लास्टिक पाइप से बनी तीन कार्बाइड गन जब्त की गईं।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम की धारा 4, 5, 9(ख) और बीएनएस की धारा 288 के तहत अपराध क्रमांक 1020/2025 दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा खतरनाक असर
कार्बाइड गन का चलन इस साल दीपावली से पहले तेजी से बढ़ा है। यह गन कैल्शियम कार्बाइड और पानी के रासायनिक मिश्रण से गैस बनाकर ध्वनि उत्पन्न करती है, जिससे धमाके जैसी आवाज आती है। इससे आंखों, कानों और फेफड़ों पर गंभीर असर पड़ता है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. विनोद बर्डे के अनुसार, बैतूल जिला अस्पताल में अब तक कार्बाइड गन से घायल चार लोग पहुंच चुके हैं। इनमें दो की आंखों में गंभीर चोट आई है। उन्होंने बताया कि जिले में और भी प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन कई लोग सीधे नागपुर जैसे बड़े अस्पतालों में इलाज कराने जा रहे हैं।
वहीं, देशभर में अब तक लगभग 1200 लोग इस गन के कारण घायल हुए हैं, जिनमें कई बच्चों की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई है। मध्यप्रदेश में ही 300 से अधिक मामलों की पुष्टि हुई है।
पुलिस की अपील
पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने नागरिकों से अपील की है कि कार्बाइड गन या किसी भी प्रकार के असुरक्षित विस्फोटक उपकरणों का उपयोग, भंडारण या बिक्री न करें। ऐसी गतिविधि पाए जाने पर तत्काल नजदीकी थाने या डायल-112 पर सूचना दें।
कार्बाइड गन के नुकसान
• यह गन कैल्शियम कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से गैस बनाकर तेज धमाका करती है।
• विस्फोट के समय निकलने वाली गैस और ध्वनि तरंगें आंखों, कानों और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती हैं।
• तेज दबाव से कॉर्निया फटने, सुनने की क्षमता घटने और चेहरे पर जलन या जलने की आशंका रहती है।
• बच्चों और किशोरों में आंखों की रोशनी स्थायी रूप से कम होने के कई मामले सामने आए हैं।
• दुर्घटना की स्थिति में रासायनिक जलन और सांस लेने में दिक्कत जैसी स्थितियाँ भी बनती हैं।
• विशेषज्ञों के अनुसार, यह खिलौना नहीं बल्कि खतरनाक विस्फोटक उपकरण की तरह काम करता है।
–
