
बैतूल। भीमपुर क्षेत्र में एक खतरनाक रसेल वाइपर करीब 15 दिनों तक एक कुएं में फंसा रहा। कुआं घर के बिल्कुल बाजू में होने और उसी के पानी का घरेलू उपयोग होने से परिवार लगातार दहशत में था। उन्हें डर था कि कहीं सांप बाहर निकलकर घर में न घुस जाए। सूचना मिलने पर सर्प मित्र विशाल विश्वकर्मा मौके पर पहुंचे और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद अनोखे तरीके से रसेल वाइपर का सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे जंगल में छोड़ दिया।
भीमपुर निवासी दीपक चौहान ने बताया कि उनके घर के पास स्थित कुएं में लगभग 15 दिन पहले एक बड़ा रसेल वाइपर गिर गया था। कुएं से रोजाना पानी निकाला जाता है, इसलिए परिवार हर समय भय के साए में रह रहा था। कई बार सांप कुएं की दीवार पर चढ़ने की कोशिश करता दिखाई दिया, जिससे खतरा और बढ़ गया।
### कैरेट और रस्सी से बनाई अनोखी तरकीब
सर्प मित्र विशाल विश्वकर्मा ने पहले कुएं का निरीक्षण किया। सांप तक सीधे पहुंचना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने एक फलों की प्लास्टिक कैरेट को मजबूत रस्सी से बांधकर पानी में उतारा। शुरुआत में रसेल वाइपर दो-तीन बार कैरेट में बैठा, लेकिन फिर पानी में कूद गया। इसके बाद रस्सी का फंदा बनाकर भी उसे पकड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन वह सफल नहीं हुआ।
लगातार प्रयास के बाद आखिरकार सांप कैरेट में बैठ गया। इसके बाद बेहद सावधानी के साथ कैरेट को ऊपर खींचा गया और रसेल वाइपर का सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया।
रेस्क्यू के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे। सर्प मित्र ने सभी को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।
रेस्क्यू के बाद रसेल वाइपर को वन क्षेत्र में सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया। ग्रामीणों ने राहत की सांस लेते हुए सफल रेस्क्यू के लिए सर्प मित्र विशाल विश्वकर्मा का आभार व्यक्त किया।
विशाल विश्वकर्मा ने लोगों से अपील की कि यदि घर, खेत या आसपास कहीं भी सांप दिखाई दे तो उसे मारने का प्रयास न करें। तुरंत प्रशिक्षित सर्प मित्र या वन विभाग को सूचना दें, ताकि इंसानों और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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## जानकारी का कॉलम
### रसेल वाइपर: भारत के सबसे खतरनाक विषैले सांपों में से एक
* रसेल वाइपर (Russell’s Viper) भारत के चार सबसे विषैले सांपों (Big Four) में शामिल है।
* इसका वैज्ञानिक नाम *Daboia russelii* है।
* यह खेतों, झाड़ियों, घास वाले इलाकों और गांवों के आसपास अक्सर पाया जाता है।
* इसकी पहचान शरीर पर बनी बड़ी-बड़ी गोल या अंडाकार भूरे रंग की तीन कतारों वाली आकृतियों से होती है।
* खतरा महसूस होने पर यह तेज फुफकार भरता है और बहुत तेजी से हमला कर सकता है।
* इसके जहर से शरीर में अत्यधिक रक्तस्राव, किडनी फेल होना और रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
* काटने की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू इलाज की बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना और एंटी स्नेक वेनम (ASV) उपचार लेना जीवनरक्षक साबित होता है।
* विशेषज्ञों के अनुसार रसेल वाइपर सामान्यतः बिना कारण हमला नहीं करता, लेकिन छेड़ने या खतरा महसूस होने पर बेहद आक्रामक हो सकता है।
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