Logo
ब्रेकिंग
शनिवार बैतूल आयेंगे सीएम मोहन यादव,सुरभि खण्डेलवाल को अर्पित करेंगे श्रद्धा सुमन India Heatwave Alert: कई राज्यों में 40°C पार, IMD की बड़ी चेतावनी चार साल की जैनब ने रखा रोजा। आत्मसंयम,सब्र,अनुशासन का दिया संदेश धुरंधर का दूसरा वर्जन इसी महीने होगा रिलीज, रणवीर नजर आएंगे अंडर कव्हर एजेंट सांझवीर टाईम्स के प्रतिष्ठा अलंकरण समारोह में जिले की 22 विभूतियां सम्मानित आर डी कोचिंग के विद्यार्थियों ने जे ई ई मैंस में हासिल की उत्कृष्ट सफलता, 99.68 परसेंटाइल हासिल कर स... Live: एमपी विधानसभा में बजट पेश कर रहे वित्त मंत्री देवड़ा, जानिए किसको क्या मिला नई दिल्ली से ताम्रम जा रही GT एक्सप्रेस के पार्सल वैन में लगी आग, बड़ा हादसा टला 13 फरवरी को सारणी में लगेगा रोजगार मेला, 9 कंपनियां करेंगी भर्ती, 775 से अधिक पदों पर मौका नागपुर एम्स में चार साल के हर्ष की मौत, कोल्ड्रिफ कफ सिरप कांड का था पीड़ित, चार माह से ICU में चल र...
Header Ad

‘भारत कोई धर्मशाला नहीं है, जहां दुनिया भर से…’, शरण याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक शरण याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया भारत कोई धर्मशाला नहीं है. दरअसल, एक श्रीलंकाई नागरिक ने भारत में शरण के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था. उसके वकील का कहना है कि श्रीलंकाई में उसकी जान को खतरा है. श्रीलंकाई नागरिक वीजा पर भारत आया था. वह गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत तीन साल से जेल में है.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जज के विनोद चंद्रन की पीठ ने श्रीलंकाई नागरिक की याचिका पर सुनवाई की है. पीठ ने इस दौरान कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है, जहां दुनिया भर से शरणार्थियों को रखा जा सके. श्रीलंकाई नागरिक को 2015 में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) से जुड़े होने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था. एलटीटीई एक समय श्रीलंका में सक्रिय एक आतंकवादी संगठन था.

हम पहले से ही 140 करोड़ लोगों के साथ…

जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि क्या भारत को दुनिया भर से शरणार्थियों की मेजबानी करनी है? हम 140 करोड़ लोगों के साथ संघर्ष कर रहे हैं. यह कोई धर्मशाला नहीं है कि हम हर जगह से विदेशी नागरिकों का स्वागत कर सकें. कोर्ट ने पूछा कि आखिर उसे भारत में रहने का क्या अधिकार है? इसपर याचिकाकर्ता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह शरणार्थी है और अपने देश में उसकी जान को खतरा है.

वकील ने अदालत को बताया कि श्रीलंकाई तमिल वीजा लेकर भारत आया था. उसकी पत्नी और बच्चे भारत में बस गए हैं. वह लगभग तीन साल से हिरासत में है और निर्वासन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है. याचिकाकर्ता के वकील ने संविधान के अनुच्छेद 21 और 19 का हवाला दिया. इसपर कोर्ट ने साफ किया कि अनुच्छेद 19 केवल भारतीय नागरिकों के लिए है, विदेशी नागरिक इसके दायरे में नहीं आते हैं.

यूएपीए के तहत ठहराया गया था दोषी

सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि श्रीलंकाई नागरिक किसी और देश में पनाह लेने को कोशिश करें. गौरतलब है कि 2018 में एक ट्रायल कोर्ट ने उसे यूएपीए के तहत दोषी ठहराया और उसे 10 साल जेल की सजा सुनाई. 2022 में मद्रास हाईकोर्ट ने उसकी सजा को घटाकर सात साल कर दिया. साथ ही सजा पूरी होते ही देश छोड़ने और निर्वासन से पहले शरणार्थी शिविर में रहने के आदेश दिए थे.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.