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बिल्डर की दरियादिली: शहीद की पत्नी को 21 लाख कैश और बच्चों की जिम्मेदारी, आंसू देख पसीज गया दिल

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गुजरात में अमरेली जिले के लाठी इलाके धमेल गांव के वीर सपूत भारतीय सेना के जवान मेहुल मापाभाई भुवा (भरवाड़) 18 सितंबर, 2025 को कश्मीर में ऑपरेशन महादेव के दौरान शहीद हो गए थे. राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले इस वीर जवान का अंतिम संस्कार 20 सितंबर को उनके गृहनगर में किया गया. इस शहीद जवान के बेटे और पत्नी को रोता देख सूरत के बिल्डर विजयभाई भरवाड़ का हृदय द्रवित हो गया. जिसके बाद वे कारों के काफिले के साथ शहीद के घर पहुंचे. जहां उन्होंने थाली में भरकर 21 लाख रुपये की मदद की.

शहीद परिवार की मदद के बारे में विजयभाई भरवाड़ ने कहा कि मुझे सोशल मीडिया के माध्यम से पता चला कि भाई वीर मेहुलभाई कश्मीर में ऑपरेशन महादेव के दौरान शहीद हो गए. अब जब वो शहीद हुए, तो मैंने सोशल मीडिया पर देखा कि बहुत ही भावुक दृश्य थे. जिसमें उनके बच्चे रो रहे थे और उनकी पत्नी बिलख रही थीं. ये दृश्य देखकर मैंने सोचा कि जो भी देश के लिए शहीद हुआ है, चाहे वो हमारे समाज से हो या किसी और समाज से. अगर हमें उनके बच्चों के बारे में सोचना है, तो हम जैसे नेताओं को भी ऐसा ही सोचना होगा. इस दौरान मेरे मन में तुरंत विचार आया कि भाई, हमें उनके बच्चों की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए, क्योंकि जो व्यक्ति देश के लिए शहीद हुआ है, उसकी ज़िम्मेदारी समाज के नेताओं को लेनी चाहिए.

21 लाख रुपए की मदद की

यह जानकर हमने अपनी टीम को बताया कि भाई, हम उन्हें क्या दें. सबने कहा कि अलग-अलग राशि बनाकर हमने तुरंत 21 लाख रुपए की राशि तैयार की और उनकी शिक्षा, उनकी आर्थिक सहायता और लड़कों की 18 साल की उम्र तक की शिक्षा के लिए, हम उन्हें विश्वास दिवाया. हमारी टीम किसी भी ज़िम्मेदारी के लिए तैयार है.

उन्होंने कहा कि जब वो मदद करने पहुंचे, उस समय के माहौल के बारे में विजयभाई कहते हैं कि, उस समय आसपास के गांव के लोग, विधायक और सांसद मौजूद थे. मैंने गांव की पंचायत के सदस्यों को भी कहा कि उन्हें जो भी सरकारी मदद मिल रही है, उसे तुरंत पूरा करें और अगर उन्हें किसी और चीज़ की ज़रूरत है, तो हमारे सभी ट्रस्ट उचित कार्रवाई करके आपकी मदद करेंगे.

शहीद परिवार की मदद करने पर क्या बोले?

उस समय बच्चों और परिवार की हालत के बारे में उन्होंने कहा कि उनकी खुशी ने हमें भी रुला दिया. क्योंकि वे रो रहे थे और जिंदगी में पहली बार, हम उन्हें वो खुशी देने आए थे जो हमें उनके निधन के बाद देनी थी. पूरा घर भावुक हो गया था. गांव के सभी लोग भावुक हो गए और रो पड़े, उन्हें लगा कि यह एक उचित अवसर था. हालांकि हम उनके परिवार को मेहुलभाई के होने का सुख नहीं दे सकते, लेकिन उन्हें इतना दिलासा दिया कि उनका बेटा देश के लिए शहीद हो गया है. इसलिए आज समाज के नेताओं ने जिम्मेदारी ली, उनके घर में ऐसा माहौल बना कि हमने एक बेटे के रूप में वो ज़िम्मेदारी ले ली जो हमें लेनी थी.

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