Logo
ब्रेकिंग
फोन नहीं उठाते सीईओ,मीडियाकर्मियों में नाराजगी,ज्ञापन सौंपा Ola Uber Ban Chandigarh: ओला-उबर के लाइसेंस रद्द होने के बाद शुरू हुई 'भारत टैक्सी', जानिए यात्रियों... Haryana News: लगातार चौथी बार देश में अव्वल रही करनाल शुगर मिल, केंद्रीय मंत्रियों ने दी प्रतिष्ठित ... NCC DG Team Selection: हरियाणा के होनहार शूटर विजयन्त ढाण्डा ने बढ़ाया राज्य का मान, देश के टॉप-12 शू... Haryana Road Mishap: नूंह सड़क हादसे में चार लोगों की मौत, पत्नी गंभीर रूप से घायल; पुलिस जांच में ज... Haryana Crime News: पानीपत में اغवा हुआ बच्चा बरामद, एक लाख में बेचने की थी डील; पुलिस ने दो को दबोच... Gurnam Singh Chaduni Mahapanchayat: धान खरीद की मांग पर अड़े किसान, हाईवे पर बीती रात; आज होगी बड़ी ... Patna Mithila Colony Incident: दानापुर में खूनी संघर्ष, शादी से पहले सिपाही भाई ने की आत्महत्या, पुल... Delhi Demolition News: शालीमार बाग मैक्स अस्पताल रोड पर देर रात चला पीला पंजा; भारी पुलिस बल तैनात, ... Monsoon Update 2026: मॉनसून की विदाई के बीच बिगड़ेगा मौसम; मध्य प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर में भारी...
Header Ad

पंजाब कांग्रेस में गहराया अंदरूनी संकट, पूर्व सीएम चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग के बीच शुरू हुई वर्चस्व की जंग

चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस इस समय अपने दो शीर्ष एवं प्रभावशाली नेताओं—पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच जारी गंभीर आंतरिक कलह से जूझ रही है।

कभी एक-दूसरे के निकट सहयोगी रहे ये दोनों कद्दावर नेता अब पार्टी में वर्चस्व और ‘कुर्सी की लड़ाई’ में आमने-सामने खड़े हैं। भारत जोड़ो यात्रा और हालिया लोकसभा चुनावों से प्रारंभ हुआ यह मतभेद अब खुलकर सतह पर आ गया है, जो पार्टी की सांगठनिक एकजुटता और आगामी 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों में उसकी वापसी की संभावनाओं पर गंभीर खतरा उत्पन्न कर रहा है।

📉 दोस्ती से दुश्मनी तक का सफर: कभी चन्नी कैबिनेट में मंत्री थे राजा वड़िंग, अब बना ’36 का आंकड़ा’

एक समय ऐसा भी था जब तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने राजा वड़िंग को अपनी कैबिनेट में शामिल कर उन्हें परिवहन (ट्रांसपोर्ट) जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपा था और सर्वाधिक बजटीय आवंटन सुनिश्चित कराया था।

इतना ही नहीं, चन्नी के पुत्र के विवाह समारोह में भी राजा वड़िंग सपरिवार सम्मिलित हुए थे। परंतु वर्तमान समय में स्थितियां पूरी तरह विपरीत हो चुकी हैं और दोनों नेता एक-दूसरे के विरुद्ध मुखर हैं। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि यह टकराव केवल व्यक्तिगत रंजिश नहीं, अपितु आगामी मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर जारी ‘राजनीतिक महत्वाकांक्षा’ का प्रत्यक्ष परिणाम है।

⚡ चन्नी-वड़िंग टकराव के 5 मुख्य कारण: पोस्टर विवाद से लेकर लोकसभा सीट और सीएम पद की होड़ तक

वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार दोनों नेताओं के मध्य उपजे इस गहरे विवाद की मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:

  • भारत जोड़ो यात्रा और पोस्टर विवाद: राहुल गांधी की पंजाब यात्रा के दौरान चन्नी के पोस्टरों का गायब होना और कथित तौर पर वड़िंग गुट द्वारा चन्नी को केंद्रीय नेतृत्व से दूर रखने के आरोपों से विवाद की शुरुआत हुई।

  • लोकसभा चुनाव में टिकट का गणित: राजा वड़िंग चाहते थे कि चन्नी फरीदकोट सीट से चुनाव लड़ें, जबकि चन्नी ने अपनी पसंद की जालंधर (आरक्षित) सीट से चुनाव लड़कर भारी मतों से विजय प्राप्त की, जिससे उनका कद और मजबूत हो गया।

  • संसद में तकरार: संसद सत्र के दौरान एक बहस के बीच राजा वड़िंग द्वारा चन्नी को उकसाने के आरोपों के पश्चात दोनों के मध्य औपचारिक बातचीत बंद हो गई।

  • नेतृत्व शैली पर सवाल: पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि राजा वड़िंग का प्रादेशिक नेतृत्व ढुलमुल रहा है और वे सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने में विफल रहे हैं।

  • 2027 मुख्यमंत्री पद की महत्वाकांक्षा: चरणजीत सिंह चन्नी 2027 के चुनावों में पुनः मुख्यमंत्री पद के स्वाभाविक चेहरे के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते हैं, जबकि राजा वड़िंग सुदीर्घ राजनीतिक रणनीति पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

⚠️ आंतरिक कलह से कांग्रेस को भारी नुकसान, आम आदमी पार्टी उठा रही राजनीतिक विभाजन का फायदा

पंजाब कांग्रेस के भीतर मचे इस घमासान से जमीनी कार्यकर्ताओं और आम समर्थकों में भारी निराशा व्याप्त है।

पार्टी के इस विभाजन का सीधा राजनीतिक लाभ राज्य की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) को मिल रहा है। प्रादेशिक स्तर पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने राजा वड़िंग की कार्यशैली पर सार्वजनिक प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं, जिससे सांगठनिक अनुशासन और एकजुटता का सर्वथा अभाव नजर आ रहा है। यदि कांग्रेस आलाकमान (हाईकमान) ने अविलंब हस्तक्षेप कर इस विवाद का सर्वमान्य समाधान नहीं निकाला, तो 2027 के चुनावों में पार्टी को इसके दुष्परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

🤝 पंजाब में कांग्रेस की वापसी के लिए एकजुटता अनिवार्य, तटस्थ चेहरे की उठ रही मांग

राजनीतिक समीक्षकों का मत है कि यदि चन्नी और राजा वड़िंग को अतिशीघ्र एक मंच पर नहीं लाया गया, तो कांग्रेस कार्यकर्ता दो धड़ों में बंट जाएंगे, जिससे चुनावों में एकजुट होकर लड़ना असंभव हो जाएगा।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि पार्टी आलाकमान को किसी ऐसे तटस्थ एवं सर्वस्वीकार्य चेहरे को मध्यस्थ बनाकर जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए, जो दोनों गुटों को साध सके। पंजाब में कांग्रेस के अस्तित्व और राजनीतिक पुनरुत्थान के लिए इस आंतरिक संकट को तत्काल समाप्त करना ही एकमात्र विकल्प है।

Comments are closed.