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बांदा की ‘गुड़िया’ को 58 दिन में मिला इंसाफ, दरिंदे को मिली फांसी की सजा, 3 साल के मासूम को बनाया था शिकार

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उत्तर प्रदेश के बांदा में 3 साल की मासूम के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है. मामले में तीन महीने पहले पड़ोस के रहने वाले सुनील निषाद ने तीन साल की मासूम के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम देकर उसे जंगल में फेंक दिया था.

शिकायत के बाद पुलिस ने बच्ची को खून से लथपथ बेहोशी के हालत में जंगल से बरामद किया था. फिर बच्ची को बांदा के ट्रामा सेंटर ले जाया गया, जहां उसकी हालत को गंभीर देखते हुए उसे कानपुर रेफर कर दिया गया था. यहां 15 दिन तक इलाज होने के बाद मासूम की दर्दनाक मौत हो गई थी.

मामले में पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने मुठभेड़ के दौरान आरोपी सुनील निषाद को गिरफ्तार किया था. इसके बाद पुलिस अधीक्षक बांदा व जिला कलेक्टर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर मुल्जिम के घर पर बुलडोजर चलावाकर उसके घर को धराशाई कर दिया था.

58 दिनों में 11 गवाह पेश

इसके बाद घटना को लेकर पुलिस और प्रशासन ने सख्ती दिखाई और मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में तेजी से आगे बढ़ाया गया. पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की और कोर्ट ने 58 दिन की सुनवाई के भीतर आरोपी को फांसी की सजा सुनाई गई.

शासकीय अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने बताया कि मामले में 58 दिनों में 11 गवाह पेश हुए. फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चला विवेचक में सारे साक्ष्य प्रस्तुत किए गए. इसके बाद माननीय जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई.

पुलिस अधीक्षक ने न्यायालय को दिया धन्यवाद

पुलिस अधीक्षक बांदा ने बांदा न्यायालय को धन्यवाद देते हुए कहां की आज उस पीड़ित परिवार को न्याय मिल गया, जिसके साथ इस तरह का अत्याचार हुआ. आने वाले समय में भी लोग इससे सीख लेंगे कि इस तरह के दूषित मानसिकता वालों का यही अंजाम होगा जो आज सुनील निषाद का हुआ. उन्होंने कहा- ऐसे लोगों को जीने का अधिकार नहीं है.

यह फैसला न्याय व्यवस्था की दृढ़ता तथा पुलिस की तत्परता का प्रत्यक्ष प्रमाण है. इस निर्णय से पूरे समाज को यह स्पष्ट संदेश गया है कि महिलाओं और मासूम बच्चियों के साथ होने वाले ऐसे जघन्य अपराधों को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. कानून व्यवस्था ऐसी घटनाओं पर त्वरित और कठोर कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

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