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पंचक आज से शुरू, भूल से भी न करें ये काम… वरना होगा पछतावा!

 हिन्दू धर्म में ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचक काल को बहुत ही अशुभ समय माना जाता है, जो चंद्रमा के धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में गोचर करने से बनता है. यह अवधि लगभग पांच दिनों की होती है. इस दौरान लोगों को कुछ विशेष कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इन कार्यों का अशुभ प्रभाव पांच गुना बढ़ जाता है, जिससे बाद में पछतावा हो सकता है. वैसे तो राज पंचक को शुभ माना जाता है और इस दौरान कुछ विशेष मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं, लेकिन कुछ ऐसे कार्य हैं जो किसी भी प्रकार के पंचक में वर्जित माने गए हैं.

पंचांग के अनुसार, आज से ही पंचक शुरू हो रहे हैं. जून 2025 में ये राज पंचक हैं, जो 16 जून सोमवार को सुबह 11 बजकर 32 मिनट से शुरू चुके हैं. 20 जून दिन शुक्रवार को शाम 6 बजकर 49 मिनट पर समाप्त होंगे.

भूल से भी न करें ये काम

  1. लकड़ी या ईंधन का संग्रह: धनिष्ठा नक्षत्र के दौरान लकड़ी या ईंधन इकट्ठा करना या खरीदना अशुभ माना जाता है. इससे अग्नि का भय रहता है. आग लगने या अग्नि संबंधी दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है.
  2. दक्षिण दिशा की यात्रा: दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है. पंचक के दौरान इस दिशा में यात्रा करना हानिकारक माना गया है. यात्रा में बाधाएं आ सकती हैं, दुर्घटना या अप्रिय घटना होने का डर रहता है. यदि बहुत आवश्यक हो, तो हनुमान जी को 5 फल चढ़ाकर यात्रा शुरू कर सकते हैं.
    1. घर की छत डालना/निर्माण कार्य: खासतौर पर रेवती नक्षत्र के दौरान घर की छत डालना अशुभ माना गया है. इससे धन हानि और घर में क्लेश होने की स्थिति बन सकती है.
    2. पलंग या चारपाई का निर्माण: पंचक के दौरान पलंग, चारपाई या किसी भी प्रकार की शय्या का निर्माण करना अशुभ माना जाता है. इससे परिवार के सदस्यों पर कोई बड़ा संकट आने की आशंका होती है.
    3. शव का अंतिम संस्कार: अंतिम संस्कार पंचक का सबसे महत्वपूर्ण और वर्जित कार्य माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि यदि पंचक में किसी की मृत्यु होती है और उसका अंतिम संस्कार पंचक काल में किया जाता है, तो उस कुटुंब या निकटजनों में अगले पांच दिनों के भीतर पांच और मृत्यु हो सकती हैं. यदि ऐसी स्थिति आ जाए कि पंचक में शव का अंतिम संस्कार करना ही पड़े, तो किसी योग्य पंडित से पंचक शांति कराकर ही शव का दाह संस्कार करें. इसके साथ ही, शव के साथ कुश के पांच पुतले बनाकर उनका भी दाह संस्कार करना चाहिए. यह पंचक दोष को शांत करता है.

    राज पंचक में क्या कर सकते हैं?

    वैसे तो पंचक में कुछ कार्य वर्जित होते हैं, जून में पड़ने वाला यह राज पंचक शुभ माना जाता है. इस दौरान कुछ विशेष मांगलिक और शुभ कार्य किए जा सकते हैं, राज पंचक के दौरान, सरकारी कामकाज या राजनीति से जुड़े कार्यों की शुरुआत करना शुभ रहेगा. संपत्ति की खरीद-बिक्री या अन्य संपत्ति संबंधी कार्यों को करना फायदेमंद हो सकता है. शुभ और मांगलिक कार्य जैसे गृह प्रवेश (कुछ विशेष स्थितियों में), विवाह, मुंडन आदि किए जा सकते हैं, बशर्ते कि उन पर पंचक के अन्य विशिष्ट नियम (जैसे छत ढालना) लागू न हों.

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