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दवा बनी ज़हर: छिंदवाड़ा के बाद अब बैतूल में कफ सिरप लेने से दो बच्चों की मौत

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मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कफ सिरप से 11 बच्चों की मौत के बाद अब बैतूल जिले में भी ऐसा ही मामला सामने आया है. बैतूल के आमला ब्लॉक के दो गांवों में कफ सिरप पीने से दो मासूमों की जान चली गई. इन नई मौतों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता और बढ़ा दी है. आमला ब्लॉक के मेडिकल ऑफिसर डॉ. अशोक नरवरे ने बताया कि ढाई साल के गर्मित और चार साल के कबीर यादव की मौत इलाज के दौरान हुई. फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है.

जामुन बिछुआ गांव निवासी गर्मित और कलमेश्वरा गांव निवासी कबीर यादव की तबीयत अचानक बिगड़ने पर परिजन उन्हें परासिया क्षेत्र के एक डॉक्टर को दिखाया था. बताया जा रहा है कि वहीं से बच्चों को एक कफ सिरप दिया गया था, जिसे पीने के बाद दोनों की हालत गंभीर होती चली गई. इसके बाद परिजनों ने उन्हें पहले आमला और फिर बैतूल जिला अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने दोनों को भोपाल के हमीदिया अस्पताल रेफर किया.

दो बच्चों की कफ सिरप पीने से मौत

चार साल के कबीर यादव की मौत 8 सितंबर को हमीदिया अस्पताल में हुई थी, जबकि ढाई साल के गर्मित की हालत बिगड़ने पर 1 अक्टूबर को इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई. रिपोर्ट्स के अनुसार, गर्मित की किडनी फेल होने की पुष्टि डॉक्टरों ने की है. बीएमओ डॉ. अशोक नरवरे ने बताया कि दोनों मामलों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर बैतूल जिला प्रशासन को भेज दी गई है. अब जिला प्रशासन इस पूरे मामले की जांच में जुट गया है और परासिया के जिस डॉक्टर से बच्चों का इलाज करवाया गया था, उसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है.

क्या बोले डॉक्टर?

बीएमओ आमला बैतूल डॉ. अशोक नरवरे का कहना है कि हमारे क्षेत्र के दो बच्चों की मौत इलाज के दौरान हुई है. परिजनों ने बताया कि बच्चों को परासिया के एक डॉक्टर को दिखाया गया था, जिसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई. रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी गई है आगे की जांच की जा रही है. छिंदवाड़ा में कफ सिरप से बच्चों की मौत के बाद प्रदेश भर में औषधि विभाग और स्वास्थ्य अमले को अलर्ट किया गया है. बैतूल में दो नई मौतों के सामने आने से यह मामला और गंभीर हो गया है. प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या बैतूल में भी वही दवा उपयोग में लाई गई थी जिसने छिंदवाड़ा में मासूमों की जान ली थी.

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