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जुलाई में क्यों बढ़ता है शेयर बाजार, बीते 10 साल के आकड़ों से समझिए हकीकत

एक बात किसी ने सच ही कही है कि नंबर्स कभी झूट नहीं बोलते हैं. इस बात को शेयर बाजार के प्रदर्शन को लेकर कहें तो गलत नहीं होगा. बात ये है कि बीते 10 बरस में 9 में निफ्टी ने पॉजिटिव रिटर्न दिया है. इन 9 सालों के औसत रिटर्न की बात करें तो 3.6 फीसदी देखने को मिला है. जानकारों की मानें तो इसव बार भी जुलाई के महीने शेयर बाजार में तेजी की उम्मीद लगा रहे हैं. उसका कारण भी है. जानकारों का मानना है कि कम होती महंगाई, ग्रोथ अनुमान, जीएसटी कलेक्शन का डाटा और रुपए में तेजी जैसे मैक्रो डाटा और विदेशी निवेशकों का निवेश जुलाई के महीना निवेशकों के लिए ब्लॉकबस्टर साबित हो सकता है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर बीते 10 साल में निफ्टी ने निवेशकों को किस तरह का रिटर्न दिया है.

कमाल का रहा है जुलाई का महीना

बीते 10 साल के जुलाई महीने के ट्रैक रिकॉर्ड को देखें तो समझ में आता है कि ​निफ्टी ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है. आंकड़ों के अनुसार केवल 2019 में जुलाई का महीना ऐसा रहा है जब निफ्टी में गिरावट देखने को मिली है. 2019 के जुलाई के महीने में निफ्टी में 5.69 फीसदी की गिरावट इेखने को मिली थी. वहीं साल 2022 में निफ्टी में 8.73 फीसदी का उछाल देखने को मिला था.

साल 2020 यानी कोविड के दौर में जुलाई के महीने ने निफ्टी ने निवेशकों को 7.49 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली थी. वहीं साल 2021 में निफ्टी ने 0.26 फीसदी का मामूली रिटर्न दिया है. चुनौतीपूर्ण वर्षों में भी, इस महीने ने काफी हद तक अपनी पकड़ बनाए रखी है. 2024 का 3.92 फीसदी और 2023 में जुलाई के महीने में 2.94 फीसदी का रिटर्न दिया है.

जून की गिरावट का रिकवरी महीना

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य बाजार रणनीतिकार आनंद जेम्स ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि ऐतिहासिक रूप से, जुलाई निफ्टी 50 और बैंक निफ्टी दोनों इंडेक्स के लिए एक तेजी वाला महीना रहा है. इस ट्रेंड को अक्सर जून के बाद की रिकवरी के रूप में देखा जाता है. साथ ही पहली तिमाही के अच्चे नतीजों उम्मीद भी निवेशकों के सेंटीमेंट को पॉजिटिव करने का काम भी करता है.

एसबीआई सिक्योरिटीज में तकनीकी और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि एफआईआई लगातार चौथे महीने शुद्ध खरीदार बन गए हैं, जो भारतीय इक्विटी में विश्वास की स्थिर वापसी का संकेत है. नंबर्स भी इस आशावाद का सपोर्ट कर रहे हैं. एफआईआई ने गुरुवार को शुद्ध खरीदारों के रूप में शानदार वापसी की, इक्विटी प्रवाह 12,500 करोड़ रुपए से ज्यादा देखने को मिला, जोकि जो आठ महीनों में सबसे सबसे ज्यादा है. यह उछाल तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिका-भारत ट्रेड टॉल्क में महत्वपूर्ण प्रगति का संकेत दिया.

इन कारणों से आ सकती है तेजी

सीजनल से अलग, कई फंडामेंटल फैक्टर्स हैं जिनकी वजह से जुलाई के महीने में शेयर बाजार में तेजी देखने को मिल सकती हैं. इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में 11 फीसदी से अधिक की गिरावट आई, जिससे महंगाई की चिंता कम हुई, जबकि रुपए में 1.3 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है, जो जनवरी 2023 के बाद सबसे बेहतर सप्ताह है. पीएल कैपिटल में सलाहकार प्रमुख विक्रम कासट ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि कच्चे तेल में गिरावट, मजबूत रुपया और स्थिर वैश्विक भावना के कारण बाजार उत्साहित दिखाई दे रहे हैं. अगले कदम का मार्गदर्शन करने के लिए निवेशक घरेलू महंगाई का आंकड़ा, एफआईआई का रुझान और मानसून पैटर्न के प्रभाव जैसे व्यापक आर्थिक संकेतों पर नजर रखे हुए हैं.

वहीं दूसरी ओर ग्लोबल फैक्टर्स भी काफी सपोर्ट करते हुए दिखाई दे रहे हैं. जिसमें मिडिल ईस्ट की टेंशन कम होना और जुलाई की शुरुआत में संभावित अमेरिकी फेडरल रिजर्व दरों में कटौती की अटकलों के कारण तेजी को बल मिला है. वॉल स्ट्रीट पर, एसएंडपी 500 और नैस्डैक अपने पीक पर पहुंच गए हैं. जिसका कारण ट्रेड डील्स हैं. आगामी पहली तिमाही के नतीजे भी शेयर बाजार को सपोर्ट करने के लिए एक्स्ट्रा एफर्ट लगाएंगे. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि जैसे-जैसे पहली तिमाही आय सीजन नजदीक आ रहा है, निवेशक डेवलपमेंट के ट्रेंड के शुरुआती संकेतों के लिए कॉर्पोरेट परिणामों पर अपना ध्यान फोकस कर रहे हैं.

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