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जब भारत तोड़ रहा था पाकिस्तान का घमंड, तब देश के खजाने में आए 14 हजार करोड़

मौजूदा महीने में सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहा तनाव चर्चा का विषय बना हुआ है. दुनियाभर के निवेशक खासकर भारत को लेकर घबराए हुए थे. उस वक्त भी भारत ने अपना संयम नहीं खोया और विदेशी निवेशकों में अपना भरोसा कायम रखा. ऐसे समय में जब भारत पाकिस्तान के घमंड को तोड़ रहा था और ऑपरेशन सिंदूर की तैयारियों से लेकर उसके एग्जीक्यूशन को अंजाम देने में लगा था. तब भी दुनियाभर के विदेशी निवेशकों ने भारत के शेयर बाजार पर दाव खेला और अरबों डॉलर भारत की तिजोरी में डाले. मौजूदा महीने में विदेशी निवेशकों ने भारत के शेयर बाजार में 14 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर शेयर बाजार बाजार से विदेशी निवेशकों के निवेश को लेकर किस तरह के आंकड़े सामने आए हैं.

विदेशी निवेशकों ने भरा खजाना

स्थानीय शेयर बाजार के प्रति विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का भरोसा कायम है और इस महीने अबतक उन्होंने 14,167 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे हैं. अनुकूल वैश्विक रुख तथा मजबूत घरेलू बुनियाद के बीच एफपीआई स्थानीय शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं. खास बात यह है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव के बावजूद एफपीआई भारतीय बाजार में निवेश कर रहे हैं. डिपॉजिटरी के आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में 4,223 करोड़ रुपए डाले थे.

यह तीन माह बाद उनका पहला निवेश था. इससे पहले, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मार्च में शेयरों से 3,973 करोड़ रुपए, फरवरी में 34,574 करोड़ रुपए और जनवरी में 78,027 करोड़ रुपए निकाले थे. इस तरह चालू साल में अब एफपीआई की निकासी घटकर 98,184 करोड़ रुपए रह गई है. भारतीय शेयर बाजार में एफपीआई की गतिविधियों में अप्रैल में सुधार हुआ है. माना जा रहा है कि मई में भी यह रुख जारी रहेगा. आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने समीक्षाधीन अवधि सामान्य सीमा के तहत बॉन्ड से 3,725 करोड़ रुपए निकाले हैं, जबकि स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग से 1,160 करोड़ रुपए का निवेश किया है.

क्या कह रहे हैं जानकार

जियोजीत इन्वेस्टमेंट के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि आगे बढ़ते हुए वृहद वैश्विक कारकों (डॉलर में गिरावट, अमेरिका और चीनी अर्थव्यवस्था में सुस्ती) और घरेलू मोर्चे पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की ऊंची वृद्धि दर, घटती मुद्रास्फीति और ब्याज दरों में कमी की वजह से एफपीआई का भारतीय बााजर के प्रति आकर्षण बना रहेगा. मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट के एसोसिएट निदेशक-प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि अनुकूल वैश्विक रुख और मजबूत घरेलू बुनियाद से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है.

उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच संभावित व्यापार करार, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी, भारतीय रुपए में मजबूती से वैश्विक निवेशकों के समक्ष भारतीय परिसंपत्तियों का आकर्षण बढ़ा है. इसके अलावा भारत की कुछ बड़ी कंपनियों के अच्छे तिमाही नतीजों से भी एफपीआई की धारणा में सुधार हुआ है. जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार ने कहा कि हाल के दिनों में एफपीआई निवेश की खासियत यह रही है कि उन्होंने लगातार खरीदारी की है. उन्होंने आठ मई को समाप्त 16 कारोबारी सत्रों में 48,533 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे हैं. हालांकि, 9 मई को भारत-पाकिस्तान विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने 3,798 करोड़ रुपए के शेयर बेचे थे.

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