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शांति, नशे पर पहरा और एक्शन… मणिपुर को लेकर दिल्ली में शाह की हाईलेवल मीटिंग में क्या-क्या हुआ?

मणिपुर में शांति बहाली और सुरक्षा स्थिति को लेकर दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आज हाई लेवल मीटिंग की. इस बैठक में मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, सीआरपीएफ के डीजी जीपी सिंह समेत एसएसबी और एनएसजी के डीजी भी शामिल रहे. इस बैठक में गृहमंत्री शाह ने राज्य में जबरन उगाही के सभी मामलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखने का निर्देश दिया है. इसके अलावा मणिपुर से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आवाजाही के लिए चिन्हित किए गए प्रवेश स्थानों के दोनों तरफ बाड़ लगाने और नशा मुक्त बनाने के लिए नशे के व्यापार में शामिल पूरे नेटवर्क को भी ध्वस्त करने का निर्देश दिया है.

इस हाई लेवल मीटिंग में शाह ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 8 मार्च, 2025 से मणिपुर के सभी रास्तों पर जनता की मुक्त आवाजाही सुनिश्चित की जाए. साथ ही साथ रास्ते में अवरोध पैदा करने वालों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाए. सूत्रों के मुताबिक, बैठक में शाह ने अशांत राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने तथा विभिन्न समूहों के पास मौजूद अवैध एवं लूटे गए हथियारों को पुलिस को सौंपे जाने की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया.

सीएम के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी को लगा राष्ट्रपति शासन

मणिपुर के मुख्यमंत्री रहे एन बीरेन सिंह ने हाल ही में इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद राज्य में कोई भी पार्टी सरकार बनाने के लिए आगे नहीं आई जिसके बाद केंद्र सरकार ने 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लगा दिया. राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद इस प्रकार की यह पहली बैठक थी. पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में मई 2023 से इंफाल घाटी में मेइती और आसपास की पहाड़ियों पर बसे कुकी समूहों के बीच हुई हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए और हजारों लोगों को राज्य से पलायन करना पड़ा.

राज्यपाल की अपील के बाद 300 से अधिक हथियार लौटाए

राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के बाद राज्यपाल भल्ला ने पुलिस और सुरक्षाबलों के लूटे गए और अवैध रूप से रखे गए हथियारों को सात दिन के भीतर स्वेच्छा से पुलिस को लौटाने की अपील की थी. उन्होंने आश्वासन दिया था कि इस दौरान हथियारलौटाने वालों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. राज्यपाल की अपील के बाद मणिपुर में मुख्य रूप से घाटी के जिलों में लोगों ने 300 से अधिक हथियार पुलिस को वापस भी किए. राज्यपाल में हथियारों को लौटाने की समयसीमा को शुक्रवार को बढ़ाकर 6 मार्च शाम 4 बजे तक कर दी है.

अलग-अलग ग्रुपों के साथ राज्यपाल की बैठक

करीब 22 महीने पहले शुरू हुई जातीय हिंसा के शुरुआती दौर में मणिपुर में अलग-अलग जगहों पर पुलिस से कई हजार हथियार लूटे गए थे. 3 जनवरी को राज्यपाल का कार्यभार संभालने के बाद से, भल्ला विभिन्न वर्गों के लोगों से मिल रहे हैं और उनसे पूर्वोत्तर राज्य में सामान्य स्थिति वापस लाने के बारे में फीडबैक ले रहे हैं. अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने मणिपुर में कई बैठकों की अध्यक्षता भी की है, जहां राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा की गई और सुरक्षाबलों को आवश्यक निर्देश दिए गए.

हिंसा को लेकर विपक्ष ने सरकार पर बोला था हमला

विपक्षी पार्टियां मणिपुर में हिंसा को लेकर लगातार केंद्र पर हमलावर रही है. जब मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया था, तब विपक्ष ने कहा था कि सरकार ने बहुत देर कर दी. मुख्यमंत्री को घटना के बाद ही इस्तीफा दे देना चाहिए था. कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियां पिछले कुछ दिनों से संसद में भी इस मुद्दे को उठाती रही हैं. यहां तक कि विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल हिंसा प्रभावित राज्य के हालात का जायजा लेने के लिए मणिपुर भी गया था. कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी हिंसा प्रभावित इलाके का दौरा किया था.

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