Logo
ब्रेकिंग
फोन नहीं उठाते सीईओ,मीडियाकर्मियों में नाराजगी,ज्ञापन सौंपा Ola Uber Ban Chandigarh: ओला-उबर के लाइसेंस रद्द होने के बाद शुरू हुई 'भारत टैक्सी', जानिए यात्रियों... Haryana News: लगातार चौथी बार देश में अव्वल रही करनाल शुगर मिल, केंद्रीय मंत्रियों ने दी प्रतिष्ठित ... NCC DG Team Selection: हरियाणा के होनहार शूटर विजयन्त ढाण्डा ने बढ़ाया राज्य का मान, देश के टॉप-12 शू... Haryana Road Mishap: नूंह सड़क हादसे में चार लोगों की मौत, पत्नी गंभीर रूप से घायल; पुलिस जांच में ज... Haryana Crime News: पानीपत में اغवा हुआ बच्चा बरामद, एक लाख में बेचने की थी डील; पुलिस ने दो को दबोच... Gurnam Singh Chaduni Mahapanchayat: धान खरीद की मांग पर अड़े किसान, हाईवे पर बीती रात; आज होगी बड़ी ... Patna Mithila Colony Incident: दानापुर में खूनी संघर्ष, शादी से पहले सिपाही भाई ने की आत्महत्या, पुल... Delhi Demolition News: शालीमार बाग मैक्स अस्पताल रोड पर देर रात चला पीला पंजा; भारी पुलिस बल तैनात, ... Monsoon Update 2026: मॉनसून की विदाई के बीच बिगड़ेगा मौसम; मध्य प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर में भारी...
Header Ad

UP का सैनिकों वाला गांव, सरहद पर डंटे हैं 12000 फौजी… प्रथम विश्व युद्ध में भी निभाई थी भूमिका

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर को ऐसे ही वीर सपूतों का जिला नहीं कहा जाता है. इसे जिले ने प्रथम विश्व युद्ध से लेकर 1965, 1971 और कारगिल युद्ध में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है. इसी जिले का एक गांव गहमर को युद्ध कौशलता के लिए सैनिकों का गांव भी कहा जाता है. यहां के वीर सपूतों ने 1914 से 1919 के बीच प्रथम विश्व युद्ध में भाग लिया था. गांव के 21 जवानों ने अपने प्राण न्योक्षवार कर वीरता का इतिहास रचा था. इसके बाद तो यहां की युवाओं में सेना में जाने का शौक बन गया और आज इस गांव का प्रत्येक घर भारतीय सेना का गवाह है.

गाजीपुर जिसके नाम का अर्थ वीरों की धरती है और इस बात की पुष्टि चीनी यात्री ह्वेन सांग ने भी किया था. ऐसे में गाजीपुर के एक गांव जो एशिया के सबसे बड़े गांव में शुमार होता है, गहमर की बात करें तो यह गांव अपने आप में काफी अनूठा है. इस गांव में सुबह शाम हर वक्त यहां के युवा भारतीय सेना के लिए तैयारी करते हुए कहीं भी देखे जा सकते हैं. खास कर गंगा किनारे बने मठिया के ग्राउंड पर, जहां पर गहमर के युवा भारतीय सेना का वर्दी अपने सीने पर लगाने के लिए दिन-रात मेहनत करते नजर आते हैं.

पीढ़ी दर पीढ़ी कर रही सरहद की रखवाली

गांव में कम से कम एक जवान या तो सेना में है या रिटायर होकर गांव में है. आंकड़ों की बात करें तो इस गांव से अकेले 12000 से अधिक फौजी सीमाओं की निगहबानी में लगे हुए हैं. गहमर की पहचान वीर सैनिकों के गांव के रूप में भी है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसी भी परिवार में जाएं तो दादा रिटायर होकर घर पर खेती बाड़ी कर रहे हैं, वहीं उनका बेटा देश की सीमाओं की रक्षा करने में लगा हुआ है. वहीं, उनका पोता भारतीय सेना में जाने के लिए दिन-रात पसीना बहा कर तैयारी करने में लगा हुआ है. इन तीन पीढ़ियों की कहानी से इस गांव की वीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है.

प्रथम विश्व युद्ध में भी निभाई थी सहभागिता

इस गांव के लोगों ने प्रथम विश्व युद्ध में भी अपनी सहभागिता निभाई थी. उस वक्त अंग्रेजी शासन काल में 1914 से 1919 के बीच चलने वाले विश्व युद्ध में गहमर गांव के 228 योद्धाओं ने अपनी वीरता दिखलाया था, जिसमें से 21 वीर सपूतों ने बलिदान दिया था. उसके बाद से ही इस गांव के वीरता की कहानी समय के साथ बढ़ता चला गया. बात करें 1965 भारत पाकिस्तान जंग या फिर 1971 भारत-पाकिस्तान जंग की या कारगिल युद्ध इन सभी युद्धों में यहां के सपूतों ने अपने वीरता का लोहा मनवाया है.

गांव में लगा था भर्ती मेला

इन्हीं वीरता को देखते हुए 1966 में गहमर गांव में भर्ती मेला भी लगाया गया, जिसमें बंगाल इंजीनियर में भर्ती के लिए रुड़की से सेना के अधिकारी भी आए. तब पहली बार में ही इस गांव के 22 युवकों का सेना में भर्ती किया गया था. इसके बाद से ही लगातार कई सालों तक गांव में ही भर्ती कैंप चलाया गया. यह भर्ती कैंप लगाए जाने का क्रम 1984 तक चला, जिसमें 37 युवा भर्ती हुए थे. वहीं, दूसरे गांव के 11 युवा भी भर्ती हुए थे. लेकिन, 1985 के बाद से इस गांव की भर्ती प्रक्रिया बंद कर दी गई.

गांव के ही अखंड गहमरी ने बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध में 21 जवान गहमर के शहीद हुए. उसके बाद गांव के कुलदेवी मां कामाख्या का अपने बेटे पर इस कदर आशीर्वाद हुआ की 1965, 1971 और फिर कारगिल युद्ध में गहमर के युवा लड़ाई में शामिल हुए. लेकिन मां की कृपा से यहां का कोई भी जवान जंग के मैदान में शहीद नहीं हुआ.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.