Logo
ब्रेकिंग
फोन नहीं उठाते सीईओ,मीडियाकर्मियों में नाराजगी,ज्ञापन सौंपा Ola Uber Ban Chandigarh: ओला-उबर के लाइसेंस रद्द होने के बाद शुरू हुई 'भारत टैक्सी', जानिए यात्रियों... Haryana News: लगातार चौथी बार देश में अव्वल रही करनाल शुगर मिल, केंद्रीय मंत्रियों ने दी प्रतिष्ठित ... NCC DG Team Selection: हरियाणा के होनहार शूटर विजयन्त ढाण्डा ने बढ़ाया राज्य का मान, देश के टॉप-12 शू... Haryana Road Mishap: नूंह सड़क हादसे में चार लोगों की मौत, पत्नी गंभीर रूप से घायल; पुलिस जांच में ज... Haryana Crime News: पानीपत में اغवा हुआ बच्चा बरामद, एक लाख में बेचने की थी डील; पुलिस ने दो को दबोच... Gurnam Singh Chaduni Mahapanchayat: धान खरीद की मांग पर अड़े किसान, हाईवे पर बीती रात; आज होगी बड़ी ... Patna Mithila Colony Incident: दानापुर में खूनी संघर्ष, शादी से पहले सिपाही भाई ने की आत्महत्या, पुल... Delhi Demolition News: शालीमार बाग मैक्स अस्पताल रोड पर देर रात चला पीला पंजा; भारी पुलिस बल तैनात, ... Monsoon Update 2026: मॉनसून की विदाई के बीच बिगड़ेगा मौसम; मध्य प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर में भारी...
Header Ad

PM मोदी ने की MP के गांव की तारीफ तो गदगद हुए CM मोहन, जताया आभार

भोपाल : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने आज कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पॉडकास्ट के दौरान शहडोल के छोटे से गांव के खिलाड़ियों का जिक्र कर उनका मनोबल बढ़ाया है। डॉ यादव ने अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का मध्यप्रदेश से अत्यंत प्रेम है, इसीलिए हम कहते हैं कि ‘एमपी के मन में मोदी‘।

शहडोल के छोटे से गांव के उभरते फुटबॉल खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए उनकी तुलना ब्राजील से करते हुए उन्होंने खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इसके पहले अपने शहड़ोल प्रवास के दौरान विचारपुर गांव के फुटबॉल खिलाड़ियों से भेंट कर उनका मनोबल बढ़ाया था। अब उन्होंने अपने पॉडकास्ट के दौरान इन खिलाड़ियों का जिक्र किया, जिसकी राज्य भर में चर्चा हो रही है।

बता दें कि 30 जुलाई 2023 को प्रसारित हुए मन की बात के 103वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहडोल जिले के बैगा आदिवासी बहुल गांव विचारपुर को लेकर कहा था- यह फुटबॉल के लिए अपनी एक अलग पहचान रखता है। इसे मिनी ब्राजील के नाम से भी जाना जाता है। पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी और कोच रईस अहमद ने इन्हें फुटबॉल की तरफ मोड़ा। संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने पूरी लगन से खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया। रईस अहमद की मेहनत रंग लाई और कुछ ही सालों में गांव में फुटबॉल क्रांति शुरू हो गई। अब यहां फुटबॉल क्रांति नामक कार्यक्रम भी चल रहा है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.