Logo
ब्रेकिंग
कवर्धा में फर्जी डिजिटल पेमेंट का भंडाफोड़: फर्जी रिसीविंग दिखाकर नकद राशि ऐंठने वाले गिरोह पर एक्शन Bhilai News: भिलाई सेक्टर-2 में गटर की सफाई के दौरान मिला नवजात का शव, इलाके में सनसनी; जांच में जुट... Barwani News: बिजासन घाट में शिमला मिर्च से भरे मिनी ट्रक में लगी भीषण आग, कूदकर बची ड्राइवर की जान;... लाठीचार्ज के बाद भड़के डॉक्टर्स, सीनियर रेजिडेंट्स ने किया OPD का बहिष्कार; JDA का समर्थन MP High Court on Dacoity Act: जब प्रदेश में डकैत ही नहीं तो 45 साल पुराना एक्ट क्यों? हाईकोर्ट ने DG... भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े इंटर्न डॉक्टर: कमला पार्क में धरना जारी, मिला कांग्रेस का... रतलाम में मॉडिफाइड साइलेंसरों पर गरजा पुलिस का बुलडोजर: 108 साइलेंसर कुचले, ₹1 लाख का जुर्माना वसूला Gwalior Achaleshwar Mandir: अचलेश्वर महादेव मंदिर की दानपेटी से निकली अनोखी चिट्ठियां, भक्त बोला- 'क... Chhindwara Patalkot School: पातालकोट में दावों की खुली पोल, 5 साल से छप्पर वाले कच्चे मकान में पढ़ने... सागर कांड के बाद छतरपुर प्रशासन का बड़ा एक्शन: अवैध शराब कारोबारियों पर संयुक्त प्रहार
Header Ad

HC की लाइव स्ट्रीमिंग पर अंतरिम रोक, यूट्यूब-मेटा को नोटिस… जानें इसके पीछे की बड़ी वजह

0

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने क्रिमिनल मामलों की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग पर अंतरिम रोक लगा दी है. हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय शराफ की खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए यह फैसला उस समय सुनाया है जब सोशल मीडिया पर हाईकोर्ट की सुनवाई से संबंधित वीडियो एडिट कर लगातार कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल किए जा रहे थे. जिससे अदालती कार्यवाही की गरिमा और गोपनीयता पर सवाल खड़े होने लगे. सोशल मीडिया पर रील्स ओर मीम्स बनने लगे थे.

अधिवक्ता अरिहंत तिवारी द्वारा दायर याचिका में यह मुद्दा उठाया गया था कि अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो क्लिप्स को कई यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड कर गलत तरीके से उपयोग में लाया जा रहा है. इन वीडियो को एडिट कर पेश किया जा रहा था. जिससे न केवल भ्रामक सूचनाएं फैल रही थीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की गंभीरता भी प्रभावित हो रही थी. जिस पर मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि फिलहाल क्रिमिनल मामलों में हो रही सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग बंद रखी जाएगी. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आगे की सुनवाई तक इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए. इसके लिए हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.

इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि अदालती कार्यवाही से जुड़े वीडियो क्लिप्स का गलत इस्तेमाल न्याय प्रणाली के लिए हानिकारक है. न्यायालय का उद्देश्य पारदर्शिता बनाए रखना है, लेकिन यदि इस पारदर्शिता का दुरुपयोग किया जाने लगे, तो उसकी अनुमति नहीं दी जा सकती. इसीलिए अब केवल webex लिंक के माध्यम से अधिकृत और संबंधित व्यक्ति ही लाइव स्ट्रीमिंग का उपयोग कर सकेंगे. इस मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार, हाईकोर्ट रजिस्ट्रार, यूट्यूब और मेटा प्लेटफॉर्म के अधिकारियों को नोटिस जारी किया है. अदालत ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है कि आखिर इस प्रकार की वीडियो सामग्री को क्यों न हटाया जाए और आगे इसके दुरुपयोग पर रोक कैसे लगाई जा सकती है.

सुरक्षा और निजता पर भी गंभीर असर

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने और न्याय प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाने के लिहाज से बेहद अहम है. सोशल मीडिया के दौर में अदालतों की पारदर्शिता और जनता तक पहुंच तो जरूरी है लेकिन उसके साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही आवश्यक है. यदि सुनवाई की सामग्री को गलत संदर्भों में पेश किया जाता है तो यह न केवल मामले की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है बल्कि संबंधित पक्षों की सुरक्षा और निजता पर भी असर डाल सकता है.

25 सितंबर को होगी सुनवाई

वहीं इस पूरे मामले में अदालत ने अगली सुनवाई 25 सितंबर को तय की है. तब तक यह अंतरिम रोक लागू रहेगी. माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में यह भी तय होगा कि भविष्य में क्रिमिनल मामलों की लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर स्थायी व्यवस्था क्या होनी चाहिए. फिलहाल एमपी हाईकोर्ट का यह कदम न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता को सुरक्षित करने और डिजिटल युग में न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है.

Leave A Reply

Your email address will not be published.