Logo
ब्रेकिंग
कवर्धा में फर्जी डिजिटल पेमेंट का भंडाफोड़: फर्जी रिसीविंग दिखाकर नकद राशि ऐंठने वाले गिरोह पर एक्शन Bhilai News: भिलाई सेक्टर-2 में गटर की सफाई के दौरान मिला नवजात का शव, इलाके में सनसनी; जांच में जुट... Barwani News: बिजासन घाट में शिमला मिर्च से भरे मिनी ट्रक में लगी भीषण आग, कूदकर बची ड्राइवर की जान;... लाठीचार्ज के बाद भड़के डॉक्टर्स, सीनियर रेजिडेंट्स ने किया OPD का बहिष्कार; JDA का समर्थन MP High Court on Dacoity Act: जब प्रदेश में डकैत ही नहीं तो 45 साल पुराना एक्ट क्यों? हाईकोर्ट ने DG... भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े इंटर्न डॉक्टर: कमला पार्क में धरना जारी, मिला कांग्रेस का... रतलाम में मॉडिफाइड साइलेंसरों पर गरजा पुलिस का बुलडोजर: 108 साइलेंसर कुचले, ₹1 लाख का जुर्माना वसूला Gwalior Achaleshwar Mandir: अचलेश्वर महादेव मंदिर की दानपेटी से निकली अनोखी चिट्ठियां, भक्त बोला- 'क... Chhindwara Patalkot School: पातालकोट में दावों की खुली पोल, 5 साल से छप्पर वाले कच्चे मकान में पढ़ने... सागर कांड के बाद छतरपुर प्रशासन का बड़ा एक्शन: अवैध शराब कारोबारियों पर संयुक्त प्रहार
Header Ad

Fake Bail Bonds को लेकर हाईकोर्ट सख्त, पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ को जारी किए नए आदेश

0

चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की जिला अदालतों में फर्जी पहचान और फर्जी जमानत बांड की बढ़ती समस्या पर हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ से जवाब मांगा है। इस गंभीर मुद्दे को उजागर करते हुए, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें इस व्यापक भ्रष्टाचार को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है। यह याचिका मोहाली निवासी कंवर पहल सिंह ने दायर की है। याचिकाकर्ता के अनुसार, फर्जी जमानत बांड की समस्या नई नहीं है, बल्कि हाल के वर्षों में इसने एक संगठित अपराध का रूप ले लिया है।

इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए, हाईकोर्ट ने स्वयं 10 मई, 2024 को एक ऐतिहासिक निर्देश जारी किया था। कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए जिला अदालतों में आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन सेवाओं को लागू करने का निर्देश दिया था। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि आवश्यक सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर सहित पूरी प्रणाली 4 महीने के भीतर चालू हो जानी चाहिए। यह कदम न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने में एक मील का पत्थर साबित हो सकता था। हालांकि, याचिकाकर्ता का आरोप है कि संबंधित पक्षों ने उच्च न्यायालय के स्पष्ट और समयबद्ध निर्देशों का पूरी तरह से उल्लंघन किया है। आदेश जारी हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन जिला कोर्ट में इस महत्वपूर्ण प्रणाली को स्थापित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

इस मामले की पुष्टि के लिए याचिकाकर्ता ने सूचना के अधिकार अधिनियम का सहारा लिया। उन्होंने विभिन्न जिला कोर्ट में आरटीआई आवेदन दायर किए, जिससे एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। प्राप्त जानकारी से पता चला कि आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन सेवाएँ अभी तक कहीं भी स्थापित नहीं की गई हैं। यह लापरवाही न केवल एक प्रशासनिक विफलता है, बल्कि यह उच्च न्यायालय के आदेशों का सीधा उल्लंघन है। इसी आधार पर, याचिका में संबंधित पक्षों के खिलाफ अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करने के लिए अदालत से निर्देश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों को उनके लापरवाह व्यवहार के लिए दंडित नहीं किया जाता, तब तक भविष्य में भी ऐसे महत्वपूर्ण आदेशों का पालन नहीं किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली पीठ ने हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ को इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.