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रीवा के संजय गांधी अस्पताल की बड़ी लापरवाही: जिंदा मरीज को घोषित किया मृत, शव सुपुर्द करते ही चलने लगीं सांसें

रीवा (मध्य प्रदेश): विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े 1200 बिस्तरों वाले संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था और संवेदनशीलता को शर्मसार करने वाला एक नया मामला सामने आया है।

गर्भवती महिला कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि शनिवार को अस्पताल से एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई। 4 सितंबर को सीधी जिले के निवासी 66 वर्षीय गिरिजा प्रसाद गुप्ता को उपचार के लिए यहां भर्ती कराया गया था। शनिवार दोपहर अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों ने मरीज को मृत घोषित कर दिया और डेथ मेमो बनाकर शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। हालांकि, जब परिजन शव को ले जाने लगे, तब अचानक मरीज की सांसें और नब्ज चलती महसूस हुईं, जिसके बाद पूरे अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। डॉक्टरों ने आनन-फानन में मरीज को वापस आईसीयू (ICU) वार्ड में भर्ती किया।

📋 डायरिया की शिकायत पर कराया था भर्ती: परिजनों से कागजों पर कराए दस्तखत

भर्ती प्रक्रिया और लापरवाही का घटनाक्रम:

  • सीधी से लाए गए थे मरीज: सीधी निवासी 66 वर्षीय गिरिजा प्रसाद गुप्ता को लगातार गंभीर डायरिया (दस्त) की शिकायत के बाद 4 सितंबर को रीवा के संजय गांधी अस्पताल लाया गया था।

  • जूनियर डॉक्टर की चूक: मेडिसिन वार्ड में ड्यूटी पर तैनात प्रथम वर्ष के एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ने मरीज की प्राथमिक जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

  • शव सुपुर्दगी की औपचारिकताएं: इतना ही नहीं, अस्पताल प्रबंधन ने बाकायदा कागजी औपचारिकताएं पूरी करते हुए शव प्राप्ति के दस्तावेजों पर परिजनों के हस्ताक्षर तक करवा लिए और शव अंतिम संस्कार के लिए ले जाने को कह दिया।

🫀 एंबुलेंस में ले जाते समय छूकर देखा शरीर: धड़कती सांसें देख उड़े परिजनों के होश

सांसें लौटने का नाटकीय क्षण:

  • एंबुलेंस में ले जाने की तैयारी: परिजनों ने अंतिम संस्कार के लिए सीधी ले जाने के वास्ते अस्पताल परिसर से एंबुलेंस बुक कर ली थी।

  • अचानक महसूस हुई सांस: जब परिजन शव को स्ट्रेचर से एंबुलेंस में शिफ्ट कर रहे थे, तभी कुछ रिश्तेदारों ने मरीज के सीने और नब्ज को छुआ। परिजनों को स्पष्ट महसूस हुआ कि मरीज की धड़कनें चल रही हैं और वह सांस ले रहा है।

  • आईसीयू में दोबारा भर्ती: परिजन तुरंत दौड़कर वार्ड में पहुंचे और डॉक्टरों को स्थिति से अवगत कराया। जीवित व्यक्ति को मृत घोषित करने की भनक लगते ही अस्पताल प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए और मरीज को तुरंत दोबारा क्रिटिकल केयर यूनिट में शिफ्ट किया गया।

🩺 डॉक्टर ने बताया ‘लाजरस सिंड्रोम’: गंभीर बीमारियों और सांस की रुकावट का दिया हवाला

मेडिसिन विभाग के एचओडी का आधिकारिक पक्ष:

  • लाजरस सिंड्रोम का तर्क: मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ. पीके बघेल ने स्थिति पर सफाई देते हुए कहा कि मेडिकल साइंस में इसे ‘लाजरस सिंड्रोम’ (Lazarus Syndrome) कहा जाता है। इसमें मरीज की सांसें और धड़कन कुछ समय के लिए पूरी तरह रुक जाती हैं और फिर अचानक अपने आप लौट आती हैं।

  • बेहद दुर्लभ मामला: उन्होंने कहा कि मेडिकल लिटरेचर में ऐसे मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं।

  • जटिल शारीरिक स्थिति: डॉ. बघेल के अनुसार, मरीज को सांस लेने में भारी तकलीफ के अलावा दिमाग की नसों में सूजन भी थी। एक प्रथम वर्ष के छात्र ने मरीज को मृत घोषित किया था। मरीज की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी है।

🛑 NSUI ने खोला मोर्चा: अस्पताल परिसर में धरना देकर मांगा डीन का इस्तीफा

लापरवाही के खिलाफ आक्रोश और राजनीतिक प्रदर्शन:

  • परिसर में प्रदर्शन: घटना की जानकारी मिलते ही एनएसयूआई (NSUI) के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में संजय गांधी अस्पताल पहुंच गए और प्रबंधन की घोर लापरवाही के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

  • डीन को हटाने की मांग: छात्र संगठन ने अस्पताल परिसर में धरना शुरू कर दिया।

  • अध्यक्ष का बयान: NSUI जिला अध्यक्ष पंकज मिश्रा ने कहा कि अस्पताल में आए दिन मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है और लगातार लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेज के डीन को तत्काल पद से हटाने और जिम्मेदार डॉक्टरों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की।

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