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धमतरी में चंगाई सभा को लेकर भारी बवाल, ASP डीसी पटेल ने संभाला मोर्चा; दोनों पक्षों से पूछताछ जारी

धमतरी (छत्तीसगढ़): शहर के टिकरापारा इलाके में एक बार फिर विशेष समुदाय द्वारा आयोजित प्रार्थना सभा को लेकर तीखा विवाद खड़ा हो गया।

स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि कानून-व्यवस्था संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) को भारी पुलिस बल के साथ खुद मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभालना पड़ा। मौके पर प्रदर्शन कर रहे हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं का आरोप था कि एक रिहायशी मकान में प्रार्थना सभा की आड़ में बड़ी संख्या में लोगों को एकत्र किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रार्थना और चंगाई के नाम पर लोगों को हिंदू धर्म से विमुख कर उनका अवैध धर्मांतरण कराने का षड्यंत्र रचा जा रहा था, जिसका वे विरोध कर रहे हैं।

⚖️ ‘स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन अलग, बरगलाकर कराना अपराध’: मौके पर पहुंचे ASP डीसी पटेल

पुलिस का हस्तक्षेप और शांति बहाली की अपील:

  • कानून के दायरे में बात: प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो उसके लिए कानूनी प्रक्रिया मौजूद है, लेकिन प्रलोभन, दबाव या छल-कपट से धर्मांतरण कराना गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है।

  • अधिकारियों का हस्तक्षेप: विवाद की जानकारी मिलते ही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डीसी पटेल दलबल के साथ टिकरापारा पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने तुरंत दोनों पक्षों को शांत कराकर स्थिति को नियंत्रण में लिया।

  • एएसपी डीसी पटेल का बयान: “दोनों पक्षों की ओर से शिकायतें प्राप्त हुई हैं। हमने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी हैं और विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। प्रार्थना सभा करने का अधिकार सभी को है, लेकिन हिंदू जागरण मंच द्वारा उठाए गए बिंदुओं की निष्पक्ष जांच होगी। यदि कोई अनियमितता या अवैध गतिविधि पाई जाती है तो सख्त कदम उठाए जाएंगे।”

👥 ‘चंगाई सभा के नाम पर जुटाए गए 35 से 40 लोग’: हिंदू जागरण मंच ने की कार्रवाई की मांग

मकान में आयोजित सभा और कार्यकर्ताओं का पक्ष:

  • मकान में गुप्त सभा की सूचना: हिंदू जागरण मंच को सूचना मिली थी कि टिकरापारा के एक मकान में भोले-भाले ग्रामीणों और स्थानीय लोगों को एकत्र कर विशेष सभा की जा रही है।

  • पुरुषोत्तम निषाद का बयान: हिंदू जागरण मंच के प्रतिनिधि पुरुषोत्तम निषाद ने बताया, “एक मकान में प्रार्थना सभा के नाम पर 35 से 40 लोगों को जमा किया गया था। दावा किया जा रहा था कि यह चंगाई सभा है, लेकिन हमें आशंका है कि इसके पीछे धर्म परिवर्तन का सुनियोजित एजेंडा था। हम जिला प्रशासन से ऐसी अवैध गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने की मांग करते हैं।”

  • तथ्यों की पड़ताल: पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सभा में उपस्थित सभी लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और बिना तथ्यात्मक जांच के किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा।

📅 छत्तीसगढ़ में प्रार्थना सभा और धर्मांतरण से जुड़े हालिया विवाद: कब क्या हुआ?

राज्य में पिछले महीनों के दौरान दर्ज प्रमुख घटनाएं:

  • 19 अगस्त 2026: धमतरी के रिसाईपारा में एक मकान में आयोजित प्रार्थना सभा के विरोध में हिंदू जागरण मंच ने प्रदर्शन किया।

  • 9 अगस्त 2026: धमतरी की वंदना विहार कॉलोनी में प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण कराने का आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने विरोध जताया।

  • 30 जून 2025: धमतरी के टिकरापारा इलाके में विशेष समुदाय द्वारा संचालित गतिविधियों को लेकर हंगामा हुआ था।

  • 30 जून 2026: नारायणपुर जिले के भरंडा गांव में धर्मांतरण विवाद के बाद सामाजिक तनाव की स्थिति बनी और एक पक्ष ने दूसरे पक्ष को गांव से बाहर जाने को कहा।

  • 9 जून 2026: कवर्धा के तरेगांव थाना क्षेत्र में चंगाई सभा की आड़ में धर्मांतरण का आरोप लगा; बैगा परिवारों ने बहला-फुसलाकर बुलाए जाने की बात कही।

  • 5 फरवरी 2026: बालोद के गुरूर थाना क्षेत्र में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को प्रलोभन देकर धर्म बदलवाने की शिकायत पर ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराया।

📜 क्या कहता है धर्मांतरण विधेयक: जानिए प्रलोभन और अपराध के कड़े नियम

सदन में प्रस्तुत विधेयक में स्पष्ट किए गए कानूनी प्रावधान:

  • मनोवैज्ञानिक दबाव व बल प्रयोग पर रोक: 19 मार्च 2026 को विधानसभा में प्रस्तुत नए धर्मांतरण विधेयक के अनुसार, किसी व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध मनोवैज्ञानिक दबाव, भय या शारीरिक बल (प्रपीड़न) का प्रयोग कर कराया गया धर्म परिवर्तन पूर्णतः अवैध है।

  • प्रलोभन का विस्तृत दायरा: नए कानून में ‘प्रलोभन’ की परिभाषा को अत्यधिक कड़ा किया गया है। अब नकद राशि, उपहार, नौकरी का लालच, मुफ्त शिक्षा, बेहतर जीवनशैली का वादा या किसी अन्य धर्म के रीति-रिवाजों को विकृत कर प्रस्तुत करना संज्ञेय अपराध माना गया है।

  • घर वापसी पर छूट: विधेयक में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी मूल आस्था या पैतृक धर्म में पुनः लौटता है, तो उसे इस अधिनियम के अंतर्गत धर्मांतरण की श्रेणी में नहीं गिना जाएगा।

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