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कम बारिश से बैतूल डिवीजन के बांध खाली, सांपना भी सिर्फ 40% भरा; 18 में 11 बांध 30% से नीचे

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बैतूल। जिले में इस बार बारिश कमजोर रहने का असर अब बांधों के जलभराव पर साफ दिखाई दे रहा है। 17 अगस्त की जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट में बैतूल डिवीजन के 19 बांधों में से एक भी 50% तक नहीं भरा है। सबसे ज्यादा पानी सांपना मध्यम परियोजना में है, लेकिन वह भी सिर्फ 40.08% भरी है। बाकी 18 लघु बांधों में अधिकांश में जलभराव 30% से भी कम है।

बैतूल जिले में आज सुबह तक कुल औसत बारिश 598.2 मिमी ही हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 749.8 मिमी बारिश हो चुकी थी। यानी इस साल अब तक 151.6 मिमी कम बारिश हुई है। बारिश की कमी का असर बांधों में पानी भरने पर भी नजर आ रहा है।

सांपना में सबसे ज्यादा, फिर भी आधा नहीं भरा

बैतूल डिवीजन की रिपोर्ट के मुताबिक सांपना बांध में 5.74 एमसीएम लाइव पानी है और यह अपनी लाइव स्टोरेज क्षमता का 40.08% भरा है। इसके बाद कोलगांव 37.27%, झाड़ेगांव 32.70% और कोसमी 29.93% भरे हैं। नागझिरी में 27.16% और चोरनी-मोरनी में 25.24% पानी है।

इसके बाद जलभराव तेजी से कम हो जाता है। बोरगांव 23.72%, झगड़िया 22.94%, गौलिबर्गी 20.70% भरे हैं। सरनदाई गोराखार में 17.30%, अपर जौरा में 17.03%, रावनवाड़ी में 16.69%, गोंडीगौला में 15.12% और उरदन में 14.96% पानी है।

सबसे खराब स्थिति चौकी कोलगांव में है, जहां सिर्फ 6.61% पानी है। इसके अलावा जगधर में 8.40%, खंडारा में 10.60%, लाखापुर में 10.13% और सेहरा में 13.74% जलभराव दर्ज किया गया है।

दूसरे डिवीजन में कुछ बांध फुल, लेकिन बैतूल में तस्वीर अलग

भैंसदेही और शाहपुर क्षेत्र की रिपोर्ट में कुछ बांध 100% भरकर FTL तक पहुंच चुके हैं। शाहपुर क्षेत्र में देऊपुर और पाताखेड़ा तथा भैंसदेही रिपोर्ट में कोलगांव और पाताखेड़ा 100% दर्ज हैं। लेकिन बैतूल डिवीजन के बांधों में ऐसी स्थिति नहीं है—यहां सबसे ज्यादा भरा सांपना भी 40.08% पर है।

जिले में बारिश की स्थिति भी क्षेत्रवार अलग है। चिचोली में 807 मिमी और घोड़ाडोंगरी में 780.7 मिमी बारिश हुई है, लेकिन जिले का औसत केवल 598.2 मिमी है। इससे साफ है कि ज्यादा बारिश वाले क्षेत्रों के बावजूद पूरे जिले में बांधों की स्थिति एक जैसी नहीं बनी है।

यानी इस बार बारिश की कमी का सबसे बड़ा असर बैतूल डिवीजन के बांधों में दिख रहा है—एक भी बांध आधे से ज्यादा नहीं भरा और कई बांधों में 10% से भी कम पानी है।

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