
धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। शहर के विवेकानंद वार्ड स्थित अटल आवास के एक मकान की छत का सीलिंग अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। हादसे के समय कमरे में मौजूद एक युवक मलबे की सीधी चपेट में आ गया, जिससे उसके सिर, हाथ और पैर में गंभीर चोटें आई हैं। गनीमत यह रही कि घटना के वक्त घर के मासूम बच्चे बाहर खेल रहे थे, अन्यथा कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती थी।
🏚️ बिस्तर और फर्श पर फैला मलबा: पंखा चालू करते समय हुआ हादसा
हादसे के तुरंत बाद कमरे का नज़ारा भयावह हो गया; पूरी छत का प्लास्टर और मलबा कमरे के फर्श तथा बिस्तर पर बिखर गया।
घटना के बाद लहूलुहान युवक को आनन-फानन में उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा गया। पीड़ित रोशन कुमार टंडन ने आपबीती बताते हुए कहा कि वह घर पर अकेला था। जैसे ही वह कमरे का पंखा चालू करने के लिए बिजली के बोर्ड के पास पहुंचा, अचानक छत का सीलिंग भरभराकर उसके ऊपर आ गिरा। घटना की सूचना तुरंत स्थानीय वार्ड पार्षद को दी गई, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
⚠️ अटल आवास के 100 परिवारों पर मंडरा रहा मौत का साया: 30 सालों से जर्जर हैं मकान
अटल आवास परिसर में निवासरत अन्य निवासियों ने बताया कि लगभग 30 वर्षों से करीब 100 परिवार यहां झोपड़पट्टी/अटल आवास व्यवस्था के तहत जीवन यापन कर रहे हैं।
देखरेख के अभाव में अधिकांश मकान अब पूरी तरह जर्जर और खोखले हो चुके हैं, जिससे आए दिन सीलिंग और प्लास्टर गिरने की घटनाएं हो रही हैं। वर्तमान में यहां रह रहे 100 से अधिक परिवारों की जान लगातार खतरे में बनी हुई है और प्रशासनिक अनदेखी के कारण कभी भी कोई बड़ी जनहानि हो सकती है।
🛠️ चरणबद्ध तरीके से पुनर्निर्माण की मांग: अध्यक्ष राजेश चतुर्वेदी ने दिया सुझाव
अटल आवास (विवेकानंद वार्ड) के अध्यक्ष राजेश कुमार चतुर्वेदी ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि रोशन टंडन के घर की सीलिंग ढहने से यह दुर्घटना हुई, जिसमें वह बाल-बाल बचा है।
उन्होंने कहा कि लगभग 100 परिवारों के सामने आवास का गंभीर संकट खड़ा है। यदि प्रशासन इन जर्जर मकानों का पुनर्विकास करना चाहता है, तो पूरे परिसर को एक साथ खाली कराने के बजाय चरणबद्ध (Phase-wise) तरीके से काम किया जाना चाहिए—पहले एक हिस्से का निर्माण कर परिवारों को शिफ्ट किया जाए और फिर दूसरे हिस्से का जीर्णोद्धार हो, ताकि समस्या का स्थायी समाधान निकल सके।

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