
चंडीगढ़: पंजाब के संगरूर में दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले 50 वर्षीय गुलजार सिंह की आत्महत्या के मामले ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है।
इस संवेदनशील मुद्दे पर विपक्षी दल आम आदमी पार्टी (AAP) की भगवंत मान सरकार को चौतरफा घेर रहे हैं। विपक्ष का स्पष्ट आरोप है कि पंजाब में अब जनसमस्याओं पर सवाल उठाने की कीमत मौत के रूप में चुकानी पड़ रही है। इस बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया के जरिए पंजाब सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने कहा कि पंजाब में एक बेहद खतरनाक पैटर्न उभरकर सामने आ रहा है, जहां सरकारी विफलता पर सवाल पूछने पर जनता को जवाब के बदले धमकियां और मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि लोकतांत्रिक सरकार का दायित्व जनता के सवालों का समाधान करना है, सवाल पूछने वालों को प्रताड़ित कर कुचलना नहीं।
💊 ‘ड्रग्स का कारोबार रोकने में सरकार विफल क्यों?’: बेटे को नशे में खोते देख पूछा था सवाल
घटना की पृष्ठभूमि और राहुल गांधी के आरोप:
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बेटे को नशा करते देख उठा दर्द: राहुल गांधी ने कहा कि अपने बेटे को नशे का शिकार बनते देखने वाले एक असहाय दलित पिता गुलजार सिंह ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की जनसभा में खुलेआम बिक रहे नशे पर आवाज उठाई थी।
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केवल एक वाजिब सवाल: गुलजार सिंह ने जनसभा के दौरान मंत्री से केवल इतना सीधा सवाल किया था कि पंजाब सरकार सूबे में ड्रग्स के अवैध कारोबार को रोकने में इतनी बुरी तरह नाकाम क्यों साबित हो रही है।
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माफी के लिए बनाया गया अनुचित दबाव: सांसद ने आरोप लगाया कि सिर्फ एक सवाल पूछने के कारण गुलजार सिंह को पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा सार्वजनिक रूप से प्रताड़ित और अपमानित किया गया। उन पर माफी मांगने का इतना भारी दबाव बनाया गया कि आहत होकर उन्होंने सल्फास की गोलियां खा लीं।
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अस्पताल दर अस्पताल भटके: राहुल गांधी ने पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भटकने और उचित इलाज के अभाव में आखिरकार गुलजार सिंह ने दम तोड़ दिया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले सप्ताह उन्होंने मोहनजीत सिंह नामक युवक से भी बातचीत की थी, जिसे मुख्यमंत्री के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन करने पर प्रताड़ित किया गया था।
⚖️ वित्त मंत्री हरपाल चीमा के इस्तीफे की मांग: राहुल बोले- स्वतंत्र जांच हो और FIR में नाम आए
कांग्रेस की मांग और प्रशासनिक जवाबदेही:
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मंत्री के इस्तीफे की पुरजोर मांग: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मांग की है कि वह बिना किसी देरी के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का तत्काल इस्तीफा लें।
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निष्पक्ष जांच का दायरा: उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को समयबद्ध न्याय दिलाने के लिए पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए और कानूनी साक्ष्यों के आधार पर दर्ज एफआईआर में वित्त मंत्री का नाम भी शामिल किया जाए।
👮 पुलिस का एक्शन: सरपंच सहित 5 आरोपियों पर BNS और SC/ST एक्ट में केस दर्ज, सभी गिरफ्तार
दर्ज एफआईआर और कानूनी धाराओं का विवरण:
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पुत्र के बयान पर कार्रवाई: मृतक के पुत्र लखविंदर सिंह उर्फ लखा के औपचारिक बयानों के आधार पर संगरूर जिले के दिड़बा थाने में त्वरित कार्रवाई की गई है।
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पाँचों आरोपी गिरफ्तार: पुलिस ने मामले में नामजद पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों में बलजीत सिंह उर्फ राज (सरपंच), सुखदेव सिंह उर्फ सुखा (कंडक्टर), विक्की सिंह (पंचायती सदस्य), गोना सिंह पुत्र बाबू सिंह और बलजिंदर कौर (सरपंच) शामिल हैं।
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गंभीर धाराओं में केस: पुलिस ने एफआईआर नंबर 24, दिनांक 08.09.2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 3(1)(R)(S) के अंतर्गत मामला दर्ज किया है।
📌 तूरबंजारा गांव का पूरा घटनाक्रम: वीडियो में बयां किया था प्रताड़ना का दर्द
मामले की जमीनी हकीकत:
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जनसभा में नोकझोंक: संगरूर जिले के तूरबंजारा गांव में आयोजित जनसभा के दौरान गुलजार सिंह ने खुले मंच से वित्त मंत्री के सामने नशे की रोकथाम को लेकर सीधा सवाल किया था।
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घर पर आकर धमकाने का आरोप: सल्फास खाने के उपरांत जारी अपने अंतिम वीडियो बयान में गुलजार सिंह ने रोते हुए आरोप लगाया था कि मंत्री के जाने के बाद गांव के कुछ असरदार पंच और सरपंच उनके घर पहुंचे तथा मंत्री से सवाल पूछने पर माफी मांगने का अनुचित दबाव बनाने लगे।
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इलाज के दौरान तोड़ा दम: इस गंभीर सामाजिक अपमान और मानसिक दबाव से व्यथित होकर उन्होंने जहर खा लिया, जिसके बाद अत्यंत नाजुक स्थिति में लुधियाना के डीएमसी (DMC) अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी दुखद मृत्यु हो गई।

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