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Bareilly Residency Garden Flood: मूसलाधार बारिश के 72 घंटे बाद भी सीवर में डूबी पॉश कॉलोनी, 145 परिवार घर छोड़ने को मजबूर

बरेली (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के बरेली शहर की सबसे पॉश और वीआईपी कॉलोनियों में शुमार ‘रेजीडेंसी गार्डन’ में सोमवार को हुई मूसलाधार बारिश ने ऐसी तबाही मचाई है, जिसका असर तीन दिन बीतने के बाद भी जस का तस बना हुआ है।

बारिश थमे 72 घंटे से अधिक का समय गुजर चुका है, लेकिन कॉलोनी की मुख्य सड़कें, गलियां, बेडरूम और किचन अभी भी सीवर के गंदे, बदबूदार पानी और कीचड़ से पटे पड़े हैं। करीब 160 परिवारों वाली इस प्रतिष्ठित कॉलोनी में चारों तरफ बर्बादी, बेबसी और प्रशासनिक विफलता की तस्वीर नजर आ रही है। घरों में 3 से 4 फीट तक दूषित पानी घुस जाने के चलते करीब 145 परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पलायन करना पड़ा है। अधिकांश लोगों ने रिश्तेदारों, परिचितों और होटलों में शरण ले रखी है। तीसरे दिन भी जब लोग अपने आशियाने की हालत देखने पहुंचे, तो सीवर की बदबू और बर्बादी देखकर दंग रह गए।

🚗 क्रेन मंगवाकर निकाली जा रहीं मर्सिडीज-BMW: महंगी लग्जरी कारें डूबीं, करोड़ों का नुकसान

गाड़ियों और घरेलू सामान की भारी तबाही:

  • लग्जरी गाड़ियों में पानी घुसा: भारी जलभराव के चलते मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी जैसी कई लग्जरी गाड़ियां घंटों तक सीवर के पानी में डूबी रहीं।

  • निजी खर्च पर क्रेन: तीसरे दिन भी कॉलोनीवासी अपने निजी खर्चे पर भारी क्रेन मंगवाकर डूबी हुई कारों को बाहर खिंचवाते दिखे। पानी इंजन और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में घुसने से प्रत्येक गाड़ी में लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

  • गृहस्थी का सामान कबाड़: घरों के अंदर रखे महंगे सोफे, फर्नीचर, रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन, टीवी और राशन का पूरा सामान पानी में तैरने के बाद पूरी तरह कबाड़ बन चुका है।

😡 ‘नेता आए, तमाशा देखा और चले गए’: प्रशासनिक अनदेखी पर फूटा स्थानीय निवासियों का गुस्सा

स्थानीय नागरिकों की आपबीती और निराशा:

  • घर बेचने का बना रहे मन: नगर निगम और स्थानीय प्रशासन के दावों पर आक्रोश जताते हुए निवासी शोभित ने कहा कि जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी केवल तमाशा देखने आए थे, इसके बाद किसी ने मुड़कर सुध नहीं ली। हालात से तंग आकर अब वे अपना घर बेचकर किसी अन्य जगह जाने का मन बना रहे हैं।

  • निजी पंपों के भरोसे जिंदगी: बीते 20 वर्षों से कॉलोनी में रह रहे अमन ने बताया कि लोग अपने स्तर पर पंप और बाल्टियां लगाकर पानी निकालने की मशक्कत कर रहे हैं, जबकि नगर निगम सिर्फ कागजी आश्वासन दे रहा है।

  • 8 साल में पहली बार ऐसे हालात: पिछले 8 सालों से दूध सप्लाई करने आने वाले अभिषेक का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में इस कॉलोनी में जलभराव की ऐसी भयावह और डरावनी स्थिति पहले कभी नहीं देखी।

☣️ सीवर के ठहराव से संक्रामक बीमारियों का खौफ: स्थायी ड्रेनेज न बनने पर पलायन की चेतावनी

स्वास्थ्य संकट और ड्रेनेज सिस्टम पर सवाल:

  • महामारी फैलने की आशंका: पानी का स्तर हल्का कम होने के बाद अब सड़कों और घरों में जमा सीवर की गंदगी से भीषण संक्रामक बीमारियों (डेंगू, मलेरिया, हैजा) के फैलने का खतरा गहरा गया है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों का स्वास्थ्य दांव पर है।

  • ढलान के कारण दूसरी कॉलोनियों का पानी: स्थानीय निवासी जसतीन सिंह और गोविंद प्रकाश ने बताया कि क्षेत्र की भौगोलिक ढलान के कारण आसपास की अन्य कॉलोनियों का बारिश और सीवर का पानी भी यहीं आकर भर जाता है।

  • स्थायी नाले के निर्माण की मांग: निवासियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम ने जलनिकासी के लिए तुरंत पक्के और गहरे नाले का निर्माण नहीं कराया, तो वे अपनी गाढ़ी कमाई से बनाए गए मकानों को औने-पौने दामों में बेचकर सामूहिक पलायन करने के लिए बाध्य होंगे।

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