Logo
ब्रेकिंग
🚨 लातूर के औसा में स्कूल में वीडियो बनाने पर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके पर FIR दर्ज लखनऊ KGMU में MBBS इंटर्न्स की भूख हड़ताल: ₹12,000 से बढ़ाकर ₹30,000 स्टाइपेंड करने की मांग, गेट पर ... बेंगलुरु के डोड्डाबल्लापुर में बड़ी कार्रवाई: पाकिस्तान स्थित गैंग से जुड़े 28 वर्षीय AC टेक्नीशियन ... बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक: वंदे मातरम् पर देशव्यापी अभियान का ऐलान, Gen Z से जुड़ेंगे ... जयपुर में जर्जर स्कूल पर एक्शन: पुराने भवन से 50 मीटर दूर ग्रामीण के मकान में शिफ्ट हुई कक्षाएं, 16 ... संभाजीनगर ट्रिपल डेथ केस: आईफोन की जिद या कोई और वजह? DCP रत्नाकर नवले बोले- जांच पूरी होने तक अफवाह... बिहार के DMCH में अमानवीयता की हद: गार्ड ने टूटे पैर वाले लावारिस मरीज को जमीन पर घसीटा, अधीक्षक ने ... 71 की उम्र में मेगास्टार चिरंजीवी का बॉक्स ऑफिस पर दबदबा, संक्रांति 2027 पर रिलीज होगी 'काका' पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद पर NIA का शिकंजा: लाहौर भेजा जाएगा समन, गैर-मौजूदगी में चलेगा ट... 'मर्द औरतों को कंट्रोल क्यों करना चाहते हैं?': राहुल गांधी ने पुणे में छात्राओं से किया सीधा संवाद, ...
Header Ad

अल-अक्सा के नीचे क्या खेल हो रहा है? इस एक सुरंग पर क्यों गहराया अंतरराष्ट्रीय विवाद

0

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही यरुशलम में एक नई अंडरग्राउंड सुरंग का उद्घाटन किया. जैसे ही ये खबर सामने आई, पूरे फिलिस्तीन और दुनियाभर में हंगामा मच गया.

लोगों का कहना है कि ये सुरंग कोई साधारण पुरातत्व परियोजना नहीं है बल्कि यरुशलम की पहचान बदलने और फिलिस्तीनियों को वहां से हटाने की कोशिश है. आइए जानते हैं इस टनल के बारे में विस्तार से, आखिर क्यों इसके उद्घाटन से बवाल मचा हुआ है.

सुरंग कहां से कहां तक?

ये सुरंग लगभग 600 मीटर लंबी है. इसकी शुरुआत यरुशलम के सिलवान मोहल्ले से होती है और ये पक्षिमी दीवार, जिसे बुराक की दीवार भी कहते हैं, के पास खत्म होती है. इजराइली सरकार और सिटी ऑफ डेविड नाम की एक संस्था इसे एक पुरानी धार्मिक और ऐतिहासिक जगह बताती है.

मगर फिलिस्तीनी और मानवाधिकार समूहों का कहना है कि ये खुदाई सीधे उनके घरों और मोहल्लों के नीचे हो रही है. इससे न सिर्फ उनके मकान कमजोर हो रहे हैं बल्कि अल-अक्सा मस्जिद को भी खतरा है, जो मुसलमानों की सबसे पवित्र जगहों में से एक है.

अल-अक्सा मस्जिद को क्यों खतरा?

अल-अक्सा मस्जिद को खतरा इसलिए है क्योंकि इजराइल जिस सुरंग (टनल) की खुदाई कर रहा है, वह मस्जिद के बहुत नजदीक और उसके नीचे के इलाके से होकर गुजरती है. ये खुदाई पुराने घरों और जमीन की नींव को कमजोर कर रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार खुदाई से जमीन धंस सकती है और मस्जिद की बुनियाद हिल सकती है. इससे उसकी दीवारों और ढांचे पर असर पड़ सकता है. फिलिस्तीनी लोगों को डर है कि धीरे-धीरे इस बहाने इजराइल वहां का नक्शा बदल देगा और मस्जिद के आसपास की पहचान मिटा देगा.

रुबियो के आने पर क्यों मचा बवाल?

असल सवाल ये है कि अमेरिका के विदेश मंत्री रुबियो इस उद्घाटन में क्यों शामिल हुए. बहुत से जानकारों का मानना है कि उनकी मौजूदगी का मतलब है कि अमेरिका खुलकर इजराइल का साथ दे रहा है. जानकार इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बता रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र ने साफ कहा है कि पूर्वी यरुशलम कब्जा किया हुआ इलाका है, लेकिन रुबियो की मौजूदगी से लगता है कि अमेरिका इजराइल को हरी झंडी दे रहा है.

सिटी ऑफ डेविड और बसावट की राजनीति

इस सुरंग को सिटी ऑफ डेविड नामक जगह से जोड़ा गया है. यहां का संचालन एलाद नामक यहूदी सेटलर संगठन करता है. इस संगठन पर आरोप है कि यह फिलिस्तीनियों के घर खरीदकर या कब्जा करके उन्हें बाहर कर रहा है और धीरे-धीरे इलाके को यहूदी बस्ती में बदल रहा है.

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट ने भी कहा है कि एलाद की गतिविधियां कानून के खिलाफ हैं. इजराइल समर्थक लोग इसे पुरानी धार्मिक जगह बताते हैं, लेकिन कई मानवाधिकार संगठन इसे राजनीति से जोड़े हुए देखते हैं. पीस नाउ नामक इज़राइली संगठन ने कहा कि रुबियो का वहां जाना मतलब है कि अमेरिका यरुशलम पर इज़राइल का पूरा दावा मान रहा है.

Leave A Reply

Your email address will not be published.