Logo
ब्रेकिंग
फोन नहीं उठाते सीईओ,मीडियाकर्मियों में नाराजगी,ज्ञापन सौंपा Ola Uber Ban Chandigarh: ओला-उबर के लाइसेंस रद्द होने के बाद शुरू हुई 'भारत टैक्सी', जानिए यात्रियों... Haryana News: लगातार चौथी बार देश में अव्वल रही करनाल शुगर मिल, केंद्रीय मंत्रियों ने दी प्रतिष्ठित ... NCC DG Team Selection: हरियाणा के होनहार शूटर विजयन्त ढाण्डा ने बढ़ाया राज्य का मान, देश के टॉप-12 शू... Haryana Road Mishap: नूंह सड़क हादसे में चार लोगों की मौत, पत्नी गंभीर रूप से घायल; पुलिस जांच में ज... Haryana Crime News: पानीपत में اغवा हुआ बच्चा बरामद, एक लाख में बेचने की थी डील; पुलिस ने दो को दबोच... Gurnam Singh Chaduni Mahapanchayat: धान खरीद की मांग पर अड़े किसान, हाईवे पर बीती रात; आज होगी बड़ी ... Patna Mithila Colony Incident: दानापुर में खूनी संघर्ष, शादी से पहले सिपाही भाई ने की आत्महत्या, पुल... Delhi Demolition News: शालीमार बाग मैक्स अस्पताल रोड पर देर रात चला पीला पंजा; भारी पुलिस बल तैनात, ... Monsoon Update 2026: मॉनसून की विदाई के बीच बिगड़ेगा मौसम; मध्य प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर में भारी...
Header Ad

HC की लाइव स्ट्रीमिंग पर अंतरिम रोक, यूट्यूब-मेटा को नोटिस… जानें इसके पीछे की बड़ी वजह

0

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने क्रिमिनल मामलों की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग पर अंतरिम रोक लगा दी है. हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय शराफ की खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए यह फैसला उस समय सुनाया है जब सोशल मीडिया पर हाईकोर्ट की सुनवाई से संबंधित वीडियो एडिट कर लगातार कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल किए जा रहे थे. जिससे अदालती कार्यवाही की गरिमा और गोपनीयता पर सवाल खड़े होने लगे. सोशल मीडिया पर रील्स ओर मीम्स बनने लगे थे.

अधिवक्ता अरिहंत तिवारी द्वारा दायर याचिका में यह मुद्दा उठाया गया था कि अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो क्लिप्स को कई यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड कर गलत तरीके से उपयोग में लाया जा रहा है. इन वीडियो को एडिट कर पेश किया जा रहा था. जिससे न केवल भ्रामक सूचनाएं फैल रही थीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की गंभीरता भी प्रभावित हो रही थी. जिस पर मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि फिलहाल क्रिमिनल मामलों में हो रही सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग बंद रखी जाएगी. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आगे की सुनवाई तक इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए. इसके लिए हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.

इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि अदालती कार्यवाही से जुड़े वीडियो क्लिप्स का गलत इस्तेमाल न्याय प्रणाली के लिए हानिकारक है. न्यायालय का उद्देश्य पारदर्शिता बनाए रखना है, लेकिन यदि इस पारदर्शिता का दुरुपयोग किया जाने लगे, तो उसकी अनुमति नहीं दी जा सकती. इसीलिए अब केवल webex लिंक के माध्यम से अधिकृत और संबंधित व्यक्ति ही लाइव स्ट्रीमिंग का उपयोग कर सकेंगे. इस मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार, हाईकोर्ट रजिस्ट्रार, यूट्यूब और मेटा प्लेटफॉर्म के अधिकारियों को नोटिस जारी किया है. अदालत ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है कि आखिर इस प्रकार की वीडियो सामग्री को क्यों न हटाया जाए और आगे इसके दुरुपयोग पर रोक कैसे लगाई जा सकती है.

सुरक्षा और निजता पर भी गंभीर असर

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने और न्याय प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाने के लिहाज से बेहद अहम है. सोशल मीडिया के दौर में अदालतों की पारदर्शिता और जनता तक पहुंच तो जरूरी है लेकिन उसके साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही आवश्यक है. यदि सुनवाई की सामग्री को गलत संदर्भों में पेश किया जाता है तो यह न केवल मामले की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है बल्कि संबंधित पक्षों की सुरक्षा और निजता पर भी असर डाल सकता है.

25 सितंबर को होगी सुनवाई

वहीं इस पूरे मामले में अदालत ने अगली सुनवाई 25 सितंबर को तय की है. तब तक यह अंतरिम रोक लागू रहेगी. माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में यह भी तय होगा कि भविष्य में क्रिमिनल मामलों की लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर स्थायी व्यवस्था क्या होनी चाहिए. फिलहाल एमपी हाईकोर्ट का यह कदम न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता को सुरक्षित करने और डिजिटल युग में न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है.

Leave A Reply

Your email address will not be published.