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कटी उंगली, आंख के नीचे निशान…देखते ही बेटे को मां-बाप ने पहचाना, UP से किडनैप बच्चा 10 साल बाद हरियाणा में मिला

नोएडा पुलिस एक परिवार के लिए फरिश्ता बन गई है. परिवार को पुलिस ने खुशियां दी हैं. नोएडा पुलिस ने एक बेटे को उसके मां-बाप और परिवार से 10 साल बाद मिला दिया है. 10 साल बाद मिले बेटे को मां ने गले से लगा दिया. ये कहानी भले ही फिल्म की कहानी जैसी लग रही हो, लेकन है पूरी हकीकत. आइए जानते हैं इस पूरी कहानी के बारे में.

दसअसल, 10 साल पहले छह नवंबर साल 2015 को एक सात साल का मासूम सेंट्रल नोएडा के फेस-2 के गांव गेझा में अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था, लेकिन अचानक वो लापता हो गया. परिवार ने दो दिनों तक उसको बहुत तलाशा. जब वो नहीं मिला तो आठ नंवबर को थाना फेस-2 में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद पुलिस लापता बच्चे को तलाशने में जुट गई. सालों बीत गए, लेकिन पुलिस को मासूम नहीं मिला.

पुलिस ने साल 2020 में पेश कर दी अंतिम रिपोर्ट

मासूम के मां-बांप ने पहले दो-तीन साल थाने का चक्कर काटा, लेकिन फिर-फिर धीरे-धीरे उनकी भी उमीद टूटती गई. उधर पुलिस भी जब तमाम कोशिशों के बाद मासूम को नहीं तलाश पाई तो साल 2020 में इस मामले में अंतिम रिपोर्ट पेश कर दी. मासूम के माता-पिता घटना के बाद गांव लगे गए थे, लेकिन नियती को कुछ और ही मंजूर था. 10 साल बाद मां-बाप को उनका बेटा वापस मिल गया.

नियती को कुछ और ही मंजूर था

दरअसल, बीती 28 मई को सुरजकुंड फरीदाबाद (हरियाणा) में किडनैपिंग की एक शिकायत दर्ज कराई गई. फिर दो जून को सुरजकुंड पुलिस ने मामले में आरोपी मंगल कुमार को पकड़ा और उसके पास पुलिस को एक बच्चा मिला. इसके बाद पुलिस पूछताछ में मंगल ने चौंकाने वाली बात बताई. उसने बताया कि उसके पास एक बच्चा और है. वो उस बच्चे को नोएडा से लाया था.

बच्चे का नाम बदला था

आरोपी ने बताया कि वो जिस बच्चे को नोएडा से लाया उसका नाम बदल दिया, ताकि उसकी पहचान न हो. अब ये जानकारी फरीदाबाद से थाना फेस-2 पुलिस तक पहुंची, लेकिन बच्चे का नाम बदला था तो उसकी पहचान करना मुश्किल था. तब भी नोएडा पुलिस ने कागज में जानकारी तलाशनी शुरू की. जानकारी नहीं मिली तो बच्चे को थाने बुलाया गया.

पुलिस ने की 6 घंटे मेहनत

पुलिस ने बच्चे को बहलाया-फुसलाया तब उसने अपने नाम बदलने की बात बताई. इसके बाद पुलिस ने 10 साल के क्राइम, याददाश्त और गुमशुदा रजिस्टर के पन्ने पलटने शुरू किए. पुलिस ने छह घंटे मेहनत की. इसके बाद ये पता चला कि कि ये वही बच्चा है, जिसकी गुमशुदगी की शिकायत साल 2015 में दर्ज कराई गई थी. बच्चे को माता-पिता का नाम याद था.

पुलिस ने मां-बाप को बच्चे के मिलने की बात बताई

पुलिस ने एफआईआर खोली तो उसमें जो फोन नंबर था वो बच्चे के पिता के दोस्त का था. पुलिस ने नंबर पर संपर्क किया तो पता चला कि बच्चे के मां-बाप मैनपुरी में रहते हैं. फिर पुलिस ने उनसे नंबर लेकर मां-बाप को उनके बेटे की मिलने की बात बताई. पुलिस के शारीरिक पहचान पूछने पर मां ने बेटे के दाएं हाथ की कटी उंगली बांयी आंख के नीचे निशान होने की बात बताई. निशानों की पुष्टि हो गई.

इसके बाद मां-बाप ने सबसे पहले अपने बड़े बेटे, चाची और जीजा को नोएडा भेजा. उन्होंने थाने में बच्चे को देखते ही पहचान लिया. जल्द ही मैनपुरी में रह रहे माता-पिता भी नोएडा पहुंचे. फिर आया 10 साल की जुदाई के बाद मिलन का पल, जिसने सभी को भावुक कर दिया.

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