Logo
ब्रेकिंग
फोन नहीं उठाते सीईओ,मीडियाकर्मियों में नाराजगी,ज्ञापन सौंपा Ola Uber Ban Chandigarh: ओला-उबर के लाइसेंस रद्द होने के बाद शुरू हुई 'भारत टैक्सी', जानिए यात्रियों... Haryana News: लगातार चौथी बार देश में अव्वल रही करनाल शुगर मिल, केंद्रीय मंत्रियों ने दी प्रतिष्ठित ... NCC DG Team Selection: हरियाणा के होनहार शूटर विजयन्त ढाण्डा ने बढ़ाया राज्य का मान, देश के टॉप-12 शू... Haryana Road Mishap: नूंह सड़क हादसे में चार लोगों की मौत, पत्नी गंभीर रूप से घायल; पुलिस जांच में ज... Haryana Crime News: पानीपत में اغवा हुआ बच्चा बरामद, एक लाख में बेचने की थी डील; पुलिस ने दो को दबोच... Gurnam Singh Chaduni Mahapanchayat: धान खरीद की मांग पर अड़े किसान, हाईवे पर बीती रात; आज होगी बड़ी ... Patna Mithila Colony Incident: दानापुर में खूनी संघर्ष, शादी से पहले सिपाही भाई ने की आत्महत्या, पुल... Delhi Demolition News: शालीमार बाग मैक्स अस्पताल रोड पर देर रात चला पीला पंजा; भारी पुलिस बल तैनात, ... Monsoon Update 2026: मॉनसून की विदाई के बीच बिगड़ेगा मौसम; मध्य प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर में भारी...
Header Ad

3 चाबियों से खुले बदरीनाथ धाम के कपाट, सबसे पहले रावल ने किया मंदिर प्रवेश; VIDEO

उत्तराखंड चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है. पहले गंगोत्री- यमुनोत्री के कपाट खुले, फिर केदारनाथ धाम और अब रविवार को बदरीनाथ धाम के भी कपाट खुल गए हैं. बदरीनाथ मंदिर के कपाट में लगे ताले को तीन चाबियों से खोला गया. इसमें से एक चाबी टिहरी राजपरिवार के प्रतिनिधि ने लगाई. वहीं दूसरी और तीसरी चाबी हक हकूकधारी बामणी गांव के भंडारी थोक और मेहता थोक ने लगाई.

इसके बाद रावल ने सबसे पहले मंदिर में प्रवेश किया और भगवान बदरी विशाल से अनुमति लेकर उनका श्रृंगार किया गया. इस दौरान देश भर से हजारों की संख्या में पहुंचे भक्तों ने भगवान के जयकारे लगाए और दर्शन पूजन किया. जानकारी के मुताबिक टिहरी राज परिवार ने मंदिर के कपाट खोलने के लिए जिस चाबी का इस्तेमाल किया, वह चाबी बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के पास रहती है.

वहीं दूसरी चाबी बदरीनाथ मंदिर के हक हकूकधारी बामणी गांव के भंडारी थोक के पास और तीसरी चाबी हक हकूक धारी बामणी गांव के मेहता थोक के पास रहती है.बता दें कि 28 अप्रैल को ही गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुल गए थे. इसी प्रकार केदारनाथ धाम के कपाट भी पूरे विधि विधान के साथ 2 मई को खोले गए.

हजारों साल पुरानी परंपरा

परंपरा के मुताबिक बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने पर मंदिर के गर्भगृह में सबसे पहले बदरीनाथ के रावल ने प्रवेश किया. उन्होंने भगवान बदरी विशाल के सामने दंडवत प्रणाम किया और फिर उनकी अनुमति से उन्हें ओढ़ाए गए ऊनी कंबल उतार दिया. यह कंबल कपाट बंद होने से पहले भगवान को ओढ़ाए गए थे. भगवान के विग्रह से उतारे गए इस घृत कंबल का एक-एक रेशा भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है. मंदिर के पूर्व धर्माधिकारी पंडित भुवन उनियाल के मुताबिक यह परंपरा हजारों साल पुरानी है.

25 कुंटल फूलों से सजावट

मंदिर के कपाट खुलने से पहले पूरे परिसर को 25 कुंटल फूलों से सजाया गया. इसके अलावा तमाम तरह की आकर्षक लाइटें लगाई गईं. मंदिर में फूलों की सजावट का काम बीते 20 साल से एक ही परिवार के लोग करते आ रहे हैं. बदरीनाथ मंदिर के धर्माधिकारी पंडित राधाकृष्ण थपलियाल के मुताबिक जब तक मंदिर के कपाट बंद रहते हैं, उस समय में देवर्षि नारद भगवान के मुख्य पुजारी होते हैं. वहीं कपाट खुलने के बाद यह जिम्मेदारी केरल प्रांत के नम्बूदरी ब्राह्मण रावल मुख्य पुजारी हो जाते हैं.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.