
Yogi Government News: ओपी राजभर और अफसरों के बीच बढ़ा विवाद, जानिए क्या है पूरा मामला और क्यों हो रही है किरकिरी
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सरकार और संगठन के भीतर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. अब योगी सरकार में पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर अपने ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ खुलकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. राजभर ने विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार और निदेशक अमित सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अधिकारियों की लचर कार्यशैली की वजह से पूरे विभाग की किरकिरी हो रही है और मजबूरन पंचायत सहायकों को धरने पर बैठना पड़ रहा है.
⚖️ 2. 15 दिन पहले भी सीएम योगी से की गई थी शिकायत, विकास कार्यों में देरी और टेंडर को लेकर बढ़ा विवाद
खास बात यह है कि करीब 15 दिन पहले भी मंत्री ओमप्रकाश राजभर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर इन्हीं अधिकारियों की शिकायत कर चुके हैं. उस समय उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों, बारातघरों और ई-पुस्तकालयों के निर्माण में देरी का मुद्दा उठाया था. राजनीतिक हलकों में इस बात की भी चर्चा रही है कि निविदा (निविदा प्रक्रिया) और फाइलों को लटकाए जाने को लेकर मंत्री और प्रमुख सचिव के बीच मतभेद पैदा हुए थे, जिसके बाद से दोनों पक्षों के बीच तनातनी बनी हुई है.
✊ 3. 30 हजार पंचायत सहायकों का धरना और विपक्ष की एंट्री, अधिकारियों की कार्यशैली पर खड़े हो रहे बड़े सवाल
प्रदेश के करीब 30 हजार पंचायत सहायक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लंबे समय से धरने पर बैठे हैं, और इस आंदोलन में विपक्ष के कई बड़े नेता भी समर्थन देने पहुंच चुके हैं. विधायक पल्लवी पटेल, सांसद संजय सिंह, चंद्रशेखर और स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे नेताओं के समर्थन से यह मुद्दा अब बड़ा राजनीतिक रूप ले चुका है. मंत्री राजभर का खुद यह कहना कि वे अधिकारियों से बात करेंगे, यह साबित करता है कि विभाग के भीतर मंत्री और शीर्ष अफसरों के बीच तालमेल की भारी कमी है.
⚠️ 4. सुभासपा और बीजेपी गठबंधन के लिए असहज स्थिति, 2027 के चुनाव से पहले विपक्ष को मिल रहा मुद्दा
ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा (SBSP), भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी दल है और साल 2027 का विधानसभा चुनाव बेहद करीब है. ऐसे संवेदनशील समय में एक कैबिनेट मंत्री का अपने ही विभाग के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से मोर्चा खोलना सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है. जहां एक तरफ राजभर के समर्थक इसे प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे सरकार के भीतर प्रशासनिक समन्वय की नाकामी के तौर पर भुनाने में लगा है.

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