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24 घंटे, दो हमले: राजनयिकों पर अमेरिका और वेस्ट बैंक में गोलीबारी, क्या है कोई कनेक्शन?

पिछले 24 घंटों में दो अलग-अलग महाद्वीपों पर हुईं दो चौंकाने वाली घटनाओं ने वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर दिया है. पहली घटना अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डी.सी. में हुई, जहां इजराइली दूतावास से जुड़े दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई. दूसरी घटना वेस्ट बैंक के जेनिन शरणार्थी शिविर में घटी, जहां इजराइली सैनिकों ने यूरोपीय और अरबी राजनयिकों के एक प्रतिनिधिमंडल पर ‘चेतावनी स्वरूप’ गोलियां चलाईं.

इन दो घटनाओं के बीच संबंध है या नहीं, इस पर फिलहाल जांच जारी है, लेकिन राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में इसके संकेतों और संदेशों को लेकर गंभीर मंथन शुरू हो चुका है.

वाशिंगटन डी.सी. में इजराइली दूतावास कर्मियों की हत्या

21 मई की शाम वाशिंगटन डी.सी. के कैपिटल यहूदी संग्रहालय के पास गोलीबारी हुई जिसमें दो इजराइली दूतावास से जुड़े लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए. अमेरिकी जांच एजेंसियां इसे संभावित ‘यहूदी-विरोधी’ या ‘राजनयिक निशानेबाज़ी’ के रूप में देख रही हैं. अभी तक हमलावर का कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिला है, लेकिन इस घटना ने अमेरिका में यहूदी और इजराइली संस्थानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

वेस्ट बैंक में राजनयिकों पर इजराइली सैनिकों की गोलीबारी

उसी दिन वेस्ट बैंक के जेनिन में यूरोपीय, अरब और एशियाई राजनयिकों का एक समूह मानवीय संकट का जायजा लेने पहुंचा था. इजराइली सेना का कहना है कि यह दल तय रूट से हटकर ‘खतरनाक सैन्य ज़ोन’ में प्रवेश कर गया था, जिसके बाद सैनिकों ने चेतावनी स्वरूप फायरिंग की. कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन इस पर फ्रांस, इटली, आयरलैंड और अन्य देशों ने इजराइल से तीखी प्रतिक्रिया जताई और जवाब तलब किया.

क्या दोनों घटनाओं का आपस में संबंध है?

संबंध हो सकता है-

दोनों घटनाएं एक ही दिन में हुईं. यह संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित प्रतिक्रिया भी हो सकती है. ⁠दोनों मामलों में निशाना कूटनीतिक समुदाय था. एक में इजराइली, दूसरे में गैर-इजराइली. ⁠यह संभावित रूप से वेस्ट बैंक की घटना के जवाब में तेज और घातक प्रतिक्रिया हो सकती है, खासकर यदि किसी कट्टरपंथी गुट ने इसे प्रतिशोध के रूप में अंजाम दिया हो.

संबंध नहीं है-

प्रतिक्रिया का समय बहुत कम है, वॉशिंगटन में हमला इतनी जल्दी योजना बनाकर करना मुश्किल है, जब तक वह पहले से प्लान न हो. ⁠वेस्ट बैंक की घटना गैर-जानलेवा चेतावनी फायरिंग थी, जबकि वाशिंगटन की घटना सीधे जान से मारने के इरादे से की गई. ⁠अमेरिकी एजेंसियों ने अभी तक इन दोनों घटनाओं को जोड़ने वाला कोई सीधा सबूत नहीं दिया है.

अमेरिका में इजराइली क्या अब सुरक्षित नहीं?

यह सवाल अब इजराइल और उसके मित्र देशों के सुरक्षा सलाहकारों के सामने गंभीर रूप से खड़ा हो चुका है. वॉशिंगटन डी.सी. जैसे उच्च-सुरक्षा क्षेत्र में दूतावास कर्मियों पर हमला दर्शाता है कि अब इजराइल से जुड़े व्यक्ति और संस्थाएं अमेरिका में भी सुरक्षित नहीं मानी जा सकतीं, खासकर जब वैश्विक स्तर पर यहूदी-विरोधी भावनाएं उभार पर हैं.

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