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मायावती ने भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को बसपा से निकाला, जानें क्या है इनसाइड स्टोरी

बसपा का सियासी ग्राफ चुनाव दर चुनाव गिरता जा रहा है, लेकिन बसपा प्रमुख मायावती पार्टी के खिलाफ गुटबाजी करने वाले नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाने से गुरेज नहीं करती. दिल्ली विधानसभा चुनाव में बसपा की करारी शिकस्त के बाद मायावती ने बुधवार को बसपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ और नितिन सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया. अशोक सिद्धार्थ मायावती के भतीजे आकाश आनंद के ससुर हैं. इसके बाद भी मायावती ने उन्हें पार्टी से निकालने में देरी नहीं की.

मायावती ने कहा कि बीएसपी की ओर से खासकर दक्षिणी राज्यों आदि के प्रभारी रहे डा. अशोक सिद्धार्थ और पूर्व सांसद नितिन सिंह को पार्टी से निष्कासित किया जाता है. अशोक सिद्धार्थ और नितिन सिंह चेतावनी के बावजूद गुटबाजी आदि की पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण पार्टी के हित में तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित किया जाता है. मायावती के इस कदम से बसपा के सभी नेता आश्चर्यचकित है, जिसे लेकर अलग-अलग सियासी कयास लगाए जा रहे हैं. ऐसे में अशोक सिद्धार्थ और नितिन सिंह को बसपा से बाहर निकालने की इनसाइड स्टोरी बताते हैं?

अशोक सिद्धार्थ से मायावती से पहले से ही नाराज थीं

अशोक सिद्धार्थ से बसपा प्रमुख मायावती काफी पहले से ही नाराज चल रही थीं. अशोक सिद्धार्थ का जन्म 5 फरवरी 1965 को हुआ. वो फर्रुखाबाद के कायमगंज के रहने वाले हैं. अशोक सिद्धार्थ बसपा सुप्रीमो के बेहद करीबी और खास माने जाते हैं. बसपा के पुराने नेता हैं और उनके पिता बसपा संस्थापक कांशीराम के सहयोगी रहे हैं. पार्टी में रहते उनका कद लगातार बढ़ा है. अशोक सिद्धार्थ एमएलसी से लेकर राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं.

कर्नाटक से लेकर तेलंगाना,आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा तक बसपा के कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. यूपी के अलग-अलग मंडल का जिम्मा भी संभाल चुके हैं, लेकिन मायावती उनकी क्रिया-कलाप को लेकर नाराज थीं. तीन महीने पहले भी उन्हें नसीहत दी थी, लेकिन वो नहीं माने. ऐसे में गुटबाजी के आरोप में उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया है.

बसपा के चुनिंदा नेताओं को शादी में बुलाना महंगा पड़ा

अशोक सिद्धार्थ के बेटे की चार दिन पहले आगरा में शादी हुई थी. शादी के कार्यक्रम में अशोक सिद्धार्थ ने बसपा के चुनिंदा नेताओं को बुलाया था. अशोक सिद्धार्थ देश के जिन-जिन राज्यों में पार्टी के प्रभारी रहे हैं, उन राज्यों से अपने करीबी दो-दो, चार-चार लोगों को ही सिर्फ बुलाया था. यूपी से भी अशोक सिद्धार्थ ने अपने कुछ खास लोगों को भी बुलाया था. शादी समारोह मे अशोक सिद्धार्थ के दामाद आकाश आनंद भी शामिल हुए थे. शादी में अशोक सिद्धार्थ के द्वारा बुलाए गए कुछ मेहमानों की आकाश आनंद से भी मुलाकात की थी. इस शादी में मायावती ने शिरकत नहीं किया था, जिसके चलते यह साफ हो गया था कि वो अशोक सिद्धार्थ से खुश नहीं है.

अशोक सिद्धार्थ ने अपने बेटे की शादी में जिस तरह से पार्टी के कुछ चुनिंदा नेताओं को अलग-अलग राज्य से बुलाया था, वो बात मायावती को काफी नागवार गुजरी है. मायावती को यह मैसेज दिया गया कि अशोक सिद्धार्थ ने अपने बेटे की शादी में उन्हीं नेताओं को बुलाया है, जो उनके करीबी हैं. इस तरह अशोक सिद्धार्थ उनके सामने अपने सियासी रुतबा दिखाने का मकसद था. मायावती ने शादी के दूसरे दिन दक्षिण भारत से बसपा के आए हुए नेताओं से मुलाकात की थी. इस दौरान उनके साथ बसपा के राष्ट्रीय संयोजक रामजी गौतम भी थे. इस मुलाकात के दूसरे दिन ही मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को बसपा से बाहर का रास्ता दिखा दिया.

मायावती के रिश्तेदार होने का रुतबा दिखाना महंगा पड़ा

अशोक सिद्धार्थ की बेटी के साथ मायावती के भतीजे आकाश आनंद की शादी हुई है. इस लिहाज से अशोक सिद्धार्थ बसपा प्रमुख मायावती के रिश्ते में समधी लगते हैं. मायावती ने आकाश आनंद को अपना सियासी उत्तराधिकारी घोषित कर रखा है. इस तरह अशोक सिद्धार्थ आकाश आनंद के ससुर और मायावती के समधी होने का रुतबा बसपा के तमाम नेताओं को दिखा रहे थे. इसे लेकर लगातार सियासी माहौल बनाए हुए थे, जिसकी शिकायत मायावती से पहले भी कई बार की जा चुकी थी. अशोक सिद्धार्थ यह बताने में जुटे थे कि बसपा का सियासी भविष्य आकाश आनंद हैं. इस बात को लेकर मायावती उनसे बहुत नाराज थीं.

मायावती ने इसे लेकर अशोक सिद्धार्थ को कई बार चेतावनी भी देने का काम किया था, लेकिन अशोक सिद्धार्थ नहीं मान रहे थे. ऐसे में अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकाल दिया गया है. साथ ही पूर्व सांसद नितिन सिंह के खिलाफ भी निष्कासन की कार्रवाई की गई है. नितिन सिंह को अशोक सिद्धार्थ का काफी करीबी माना जाता है. बसपा की ओर से बताया गया कि दोनों नेताओं को चेतावनी मिलने के बाद भी गुटबाजी समेत कई दूसरी गतिविधियों में शामिल रहे हैं. इसी वजह से बसपा के दोनों ही नेताओं के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई का फैसला लिया गया है. सूत्रों की मानें तो अशोक सिद्धार्थ बसपा ने अपना एक सामांतर गुट बना लिया था, जिसके चलते उन पर सियासी गाज गिरी है.

मायावती के बिना इजाजत कांग्रेस से गठबंधन की बात

सूत्रों की मानें तो अशोक सिद्धार्थ बसपा प्रमुख मायावती के बिना इजाजत कांग्रेस के साथ गठबंधन की बात 2024 के लोकसभा चुनाव में कर रहे थे. अशोक सिद्धार्थ ने कांग्रेस के कुछ नेताओं के साथ मुलाकात भी की थी. प्रियंका गांधी के करीबी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से भी अशोक सिद्धार्थ मिले थे. कांग्रेस के साथ गठबंधन की बात को लेकर मायावती अशोक सिद्धार्थ से काफी नाराज हो गई थीं, क्योंकि बसपा ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया था.

कांग्रेस की एक लॉबी जो बसपा से गठबंधन की बात कर रही थी, उसके सूत्रधार अशोक सिद्धार्थ ही थे. इसके अलावा अशोक सिद्धार्थ को मायावती ने पूर्व मंत्री अंटू मिश्रा से भी दूर रहने की नसीहत दी थी. लोकसभा चुनाव के बीच मायावती ने आकाश आनंद को हटाया था तो उससे पीछे अशोक सिद्धार्थ ही अहम वजह थे. इस तरह मायावती कभी ये बर्दाश्त नहीं कर सकती हैं कि उनके बिना इजाजत बसपा में कोई पत्ता भी हिल सके. ऐसे में अशोक सिद्धार्थ की अपनी सियासी राह बनाना भी महंगा पड़ा है.

सरकारी नौकरी छोड़कर सियासत में आए सिद्धार्थ

कहा जाता है कि अशोक सिद्धार्थ ने मायावती के कहने पर ही सरकारी नौकरी छोड़ बसपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी. अशोक सिद्धार्थ सरकारी नौकरी में रहने के साथ ही वामसेफ से भी जुड़े रहे थे. इस दौरान उन्होंने जिला से लेकर विधानसभा और मंडल अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली थी. बसपा में शामिल होने के बाद अशोक सिद्धार्थ एमएलसी से लेकर राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं. बसपा ने 2009 में विधान परिषद भेजा था, जबकि 2016 से 2022 तक राज्यसभा सांसद रहे हैं. अशोक सिद्धार्थ कानपुर-आगरा जोनल कॉर्डिनेटर जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.

बसपा में उनकी सियासी अहमियत का अंदाजा तब हुआ जब उनकी बेटी की शादी मायावती के भतीजे आकाश आनंद से हुई. मार्च 2023 में अशोक सिद्धार्थ की बेटी प्रज्ञा सिद्धार्थ से आकाश आनंद शादी हुई है. मायावती के परिवार में बेटी की शादी होने के बाद अशोक सिद्धार्थ का रुतबा पार्टी में बढ़ गया था. अशोक सिद्धार्थ भी इस रुतबे का सियासी इस्तेमाल करने लगे थे, जो अब महंगा पड़ गया.

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