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सुप्रीम कोर्ट को मिले नए चीफ जस्टिस, वक्फ केस की सुनवाई में अब कौन-कौन जज होंगे और क्या होगा फोकस?

सुप्रीम कोर्ट में आज एक अहम बदलाव हुआ है. देश के मुख्य न्यायधीश का पद अब जस्टिस बीआर गवई ने संभाल लिया है. कल जस्टिस संजीव खन्ना बतौर सीजेआई और सुप्रीम कोर्ट के जज रिटायर हो गए. जस्टिस खन्ना की रवानगी और जस्टिस गवई की आमद के साथ ही ये बदलाव भी हुआ है कि वक्फ संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अब तक सुप्रीम कोर्ट की जो बेंच सुनवाई कर रही थी, वो भी अब बदल जाएगी. बता दें कि कल – गुरूवार, 15 मई को संभव है कि अदालत वक्फ संशोधन कानून पर सुनवाई फिर एक बार शुरू करे.

इस मामले की अब तक तो संजीव खन्ना की अगुवाई वाली बेंच सुनवाई कर रही थी. पर अब अब इस बेंच की अगुवाई जस्टिस बीआर गवई के पास होगी. जस्टिस गवई के अलावा जस्टिस पीवी संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन इस पीठ का हिस्सा होंगे. जस्टिस संजय और जस्टिस विश्वनाथन खन्ना साहब की अगुवाई वाली पीठ के भी सदस्य थे. अब सुप्रीम कोर्ट की नई बेंच जब इस मामले को सुनने के लिए बैठेगी तो उसके पास याचिकाकर्ताओं और सरकार, दोनों ही के पक्ष सामने होंगे. अब तक वक्फ संशोधन कानून के विवादित प्रावधानों को सरकार ही ने रोके रखा है.

किन दो चीजों पर होगा फोकस

ऐसे में, सवाल है कि अब जब अदालत गुरूवार को सुनवाई के लिए बैठेगी तो उसका फोकस किन सवालों पर होगा. तो बात ये है कि बतौर सीजेआई जस्टिस गवई के सामने ये पहला बड़ा मामला होगा. उनके सामने मुख्यतः ये सवाल होंगे कि वक्फ बाय यूजर (यानी इस्तेमाल में होने की वजह से किसी संपत्ति को वक्फ माना जाए या नहीं) के प्रावधान को खत्म करना जायज माना जाए या नहीं, साथ ही वक्फ काउंसिल और वक्फ बोर्ड में गैर-मुसलमानों की एंट्री का मुद्दा भी जस्टिस बीआर गवई की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ के सामने होगा.

सुप्रीम कोर्ट के सामने 4 सवाल

सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्यतः कुल चार सवाल हैं. पहला – क्या वक्फ संशोधन कानून 2025 पुराने कानून यानी की वक्फ कानून, 1995 का किसी भी तरह अवहेलना करता है? दूसरा – ये प्रावधान कि पांच बरस तक इस्लाम को प्रैक्टिस करने वाला ही वक्फ घोषित कर सकता है, क्या ये धार्मिक आजादी के लिहाज से हासिल मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन है या नहीं. तीसरा – वक्फ बाय यूजर के प्रावधान को समाप्त करना क्या भेदभाव वाला फैसला है. चौथा – गैर मुसलमानों की वक्फ काउंसिल और बोर्ड में एंट्री अनुच्छेद 26(बी) और अनुच्छेद 26(डी) का अवहेलना करता है या नहीं?

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