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बॉर्डर पर जवान क्यों बजाते हैं सीटी? BSF जवान के लौटने से पहले भारत ने 84 बार बजाई

बीएसएफ के जवान पूर्णम कुमार शॉ की आखिरकार 504 घंटे की गहमागहमी के बाद रिहाई हो गई है और वह अपनी पोस्ट पर वापस लौट आए हैं. गश्त के दौरान वह गलती से पाकिस्तान सीमा में चले गए थे, जहां पाकिस्तानी रेंजर्स ने उन्हें कैद कर लिया था. उनकी रिहाई के लिए बीएसएफ ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी. छह बार फ्लैग मीटिंग की और 84 बार सिटी भी बजाई. अब आप इस सवाल पर हैरान हो सकते हैं कि बीएसएफ ने सिटी क्यों बजाई? इस खबर में इसी सवाल पर चर्चा करेंगे.

दरअसल पाकिस्तानी रेंजर्स को बातचीत के लिए बुलाने के उद्देश्य से बॉर्डर पर सिटी बजाई जाती है. बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी रेंजर्स लगातार सिटी को सुनकर भी अनसुना कर दे रहे थे. ऐसे में बीएसएफ को एक ही दिन में कई कई बार सिटी बजानी पड़ी. इस प्रकार कुल 84 बार सिटी बजाई गई.इसमें पाकिस्तानी रेंजर्स ने छह बार जवाब दिया और जवान की रिहाई के लिए बीएसएफ के साथ छह बार फ्लैग मीटिंग की.

पाकिस्तानी रेंजर्स को बुलाने के लिए बजाते हैं सिटी

हालांकि इन हर मीटिंग में पाकिस्तानी रेंजर्स ने एक ही जवाब दिया कि हाईलेबल से अनुमति मिलने के बाद ही जवान को रिहा किया जाएगा. ऐसे में बीएसएफ ने सीओ लेबल की भी मीटिंग की. इस प्रकार दबाव काफी बढ़ने के बाद पाकिस्तान ने भारती जवान को रिहा किया है. बीएसएफ के अधिकारियों के मुताबिक जवान के सीमा पार करने के बाद से ही पाकिस्तानी रेंजर्स से बातचीत की कोशिश हो रही थी. इसके लिए रोजाना तीन से चार बार सीटी बजाकर या झंडा दिखाकर उन्हें बलाया जाता था, लेकिन पाकिस्तानी रेंजर्स बातचीत से बचने की कोशिश कर रहे थे.

सिटी बजाने से पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव

जब एक बार सिटी बजाने के बाद भी पाकिस्तानी रेंजर्स बातचीत के लिए नहीं आते तो दोबारा या फिर थोड़े-थोड़े अंतराल पर बार सिटी बजाई गई. इससे दबाव इतना बन गया था कि उनके लिए भारतीय जवान को देर तक कैद में रखना संभव नहीं है. रही सही कसर डिप्लोमैटिक चैनल पर शुरू हुई बातचीत ने पूरी कर दी. डीजीएमओ की बैठक में यह मुद्दा उठने के बाद पाकिस्तान को जवान को रिहा करना पड़ा है. बीएसएफ के पूर्व आईजी बीएन शर्मा के मुताबिक आमतौर पर इस तरह के मामले कमांडेंट स्तर की बातचीत में ही निपट जाते हैं. लेकिन यहां पाकिस्तान की बदमाशी की वजह से मामला थोड़ा लंबा खींच गया.

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