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Delhi Crime News: कड़कड़डूमा कोर्ट के पुराने आदेश में संशोधन, रेप पीड़िता की याचिका पर हाई कोर्ट की सख्त कार्रवाई

नाबालिग लड़की के साथ लगभग 10 साल पुराने रेप के एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का एक बड़ा और अहम फैसला सामने आया है. कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी पर एससी/एसटी एक्ट (SC/ST Act) की धारा जोड़ने और उसके तहत नए सिरे से आरोप तय करने का निर्देश दिया है. अदालत ने यह भी माना है कि शुरुआती साक्ष्यों और बयानों से इस बात के संकेत मिलते हैं कि आरोपी को पीड़िता की जाति के बारे में पूरी जानकारी थी.

📋 2. ट्रायल कोर्ट के 2017 के फैसले में किया गया बदलाव, पीड़िता की रिवीजन याचिका पर जस्टिस सौरभ बनर्जी ने सुनाई व्यवस्था

यह फैसला जस्टिस सौरभ बनर्जी की बेंच द्वारा पीड़िता की तरफ से दायर की गई एक रिवीजन याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया गया. याचिका में कड़कड़डूमा स्थित पॉक्सो (POCSO) कोर्ट के साल 2017 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें कुछ धाराओं को नहीं जोड़ा गया था. हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के अन्य फैसलों को बरकरार रखते हुए अब एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1) के तहत आरोप तय करने का स्पष्ट आदेश दिया है.

🏫 3. साल 2016 में रिजल्ट के दिन स्कूल के बाहर से किया गया था अपहरण, नोएडा ले जाकर की गई थी घिनौनी वारदात

यह पूरा मामला 31 मार्च 2016 का है, जब 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा अपना रिजल्ट लेने स्कूल गई थी. आरोप है कि तरुण नामक आरोपी उसे बहला-फुसलाकर स्कूल के बाहर ले गया, जहाँ से उसके दोस्तों के साथ कार में बैठाकर उसे नोएडा ले जाया गया और वहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया. मामले में सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज बयानों और साक्ष्यों का संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि एससी/एसटी अधिनियम का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को जाति आधारित अत्याचारों से सुरक्षा प्रदान करना है.

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