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दिल्ली में कल से SARAS मेला, लखपति दीदीयों का होगा जुटान… ‘वोकल फॉर लोकल’ का दिखेगा उत्थान

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को सबल बनाने के लिए कई सारी योजनाओं को धरातल पर उतारा है या उतारने की योजना है. हाल फिलहाल के दिनों में महिलाओं की आर्थिक स्थिती को बेहतर करने के लिए लखपती दीदी योजना की शुरुआत की थी. इसे लेकर बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा भी लिया था. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव स्वाती शर्मा ने टीवी9 भारतवर्ष से खास बातचीत में बताया कि इस बार दिल्ली में SARAS (Sale of Articles of Rural Artisans Society) आजीविका मेला 2025 का आयोजन किया जा रहा है.

इसके तहत हुनरमंद महिलाओं को अपने हुनर दिखाने का मौका मिलेगा. यह मेला 5 से 22 सितंबर तक दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में होगा. देशभर से 400 से ज्यादा महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) यहां अपने हुनर और उत्पाद लेकर आएंगी.

सामान के साथ सफल उद्यमी

स्वाती शर्मा ने कहा कि इस बार की थीम लखपति दीदी रखा गया है. उन्होंने कहा कि इसकी खास बात यह है कि जो भी महिलाएं अपना सामान लेकर यहां आएंगी उन्हें सफल उद्यमी कौसे बनाना है. इसकी खास तौर पर उन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी. इसके साथ ही कन्वर्जेंस पवेलियन में कृषि, पशुपालन, MSME और दूसरे मंत्रालय भी साथ आएंगे ताकि लखपति दीदी बनाने का सपना पूरा हो.

वोकल फॉर लोकल को तरजीह

गांव की महिलाएं सिर्फ सामान बेचेंगी ही नहीं, बल्कि उन्हें सफल उद्यमी बनने का मौका भी मिलेगा. साथ ही वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके साथ ही महिलाओं को ट्रेनिंग मिलेगी जैसे: डिजिटल मार्केटिंग, पैकेजिंग,बिज़नेस प्लानिंग और पैसे की समझ. साथ ही लाइव डेमो-महिलाएं लाइव दिखाएंगी कैसे पारंपरिक व्यंजन बनते हैं,हस्तशिल्प तैयार होता है और अपनी सफलता की कहानियां भी सुनाएंगी.

दीनदयाल अंत्योदय योजना: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के अंतर्गत, सरस मेले ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री हेतु एक महत्वपूर्ण विपणन मंच के रूप में कार्य करते हैं. ये मेले SWG सदस्यों को ग्रामीण निवासियों से सीधे बातचीत करने, बाज़ार की प्राथमिकताओं को समझने, पैकेजिंग में सुधार करने और उत्पादों की छपाई के बारे में निर्णय लेने में सक्षम बनाते हैं. ये मेले डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ रहे हैं, जिसका उद्देश्य आने वाले वर्षों में कैशलेस बनना है.

क्यों है ये मेला खास?

इस मेले में गांव की महिलाएं सीधे शहर के लोगों से मिल पाती हैं.उन्हें समझ आता है कि ग्राहकों को क्या पसंद है, सामान कैसे पैक करना है और कीमत कैसे तय करनी है. यही वजह है कि कई महिलाएं अब आत्मनिर्भर बन रही हैं और बिज़नेस वूमन की तरह आगे बढ़ रही हैं.

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