
भगवान गणेश, जिन्हें विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है, हर शुभ कार्य के आरंभ में पूजे जाते हैं. उनकी प्रतिमाओं में उनकी सूंड की दिशा हमेशा एक चर्चा का विषय रही है. क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ मूर्तियों में उनकी सूंड बाईं ओर और कुछ में दाईं ओर क्यों होती है? यह सिर्फ़ एक डिज़ाइन का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व छिपा है.
गणेश जी को वक्रतुण्ड कहा गया है, यानी कहीं उनकी सूंड बाईं ओर मुड़ी मिलती है, तो कहीं दाईं ओर.दोनों ही स्वरूपों का अलग-अलग धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है. आइए जानते हैं कि घर और मंदिर में रखी जाने वाली गणेश प्रतिमाओं में सूंड की दिशा अलग-अलग क्यों होती है.
