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कुंभ से गंदी चीज और क्या हो सकती है, वो पाखंड है और… ये क्या बोल गए लव गुरु मटुकनाथ?

प्रयागराज में महाकुंभ का भव्य और दिव्य आयोजन हो रहा है. देश-विदेश के 40 करोड़ से अधिक लोग इस महाकुंभ में श्रद्धा और आस्था की डुबकी लगा चुके है. दूसरी ओर लव गुरु के नाम से प्रसिद्ध मटुक नाथ ने इस महाकुंभ को लेकर विवादित बयान दिया है. कहा कि इससे गंदी चीज और क्या हो सकती. कहा कि कुंभ में कहीं साधना और अध्यात्म नजर आता है क्या. वहां बैठे साधु संत सिर्फ और सिर्फ ढोंग-पाखंड कर रहे हैं.

मटुक नाथ ने महाकुंभ में आए साधु संतो को जड़ बुद्धि बताया. उन्होंने सवाल उठाया कि वहां कोई साधु कांटों पर लेट रहा है तो कोई उल्टी सीधी हरकते कर रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसा करने को कहीं भी कबीर, विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस आदि संतों ने नहीं कहा. उन्होंने कहा कि लोग महाकुंभ में धर्म का लेस भी नहीं है. वहां कौन जा रहा है, वहीं अघोरपंथ के साधु जा रहे हैं. सही में ये साधु हैं ही नहीं, बल्कि ये सभी अभागे और मूढ मति हैं.

महाकुंभ को भ्रष्टाचार और राजनीति बताया

मटुकनाथ ने महाकुंभ को शुद्ध रूप से पाखंड और भ्रष्टाचार बताया. यहां कोई कांटों पर लेट रहा है तो कोई आग पर बैठ रहा है. इस तरह की साधना करने के लिए भगवान ने कब कहा है. उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन है, व्यवसाय है और राजनीति है. इसका साधना और अध्यात्म से कोई वास्ता नहीं है. लोग इस महाकुंभ के के नाम पर अपनी राजनीतिक और व्यवसायिक रोटियां सेंकने का काम कर रहे हैं. मटुकनाथ का मानना है कि प्रेम से बड़ी साधना और अभ्यास कुछ और हो ही नहीं सकता.

इन मुद्दों पर भी बोले मटुकनाथ

लवगुरु मटुक नाथ वेलेंटाइन सप्ताह में टीवी9 भारतवर्ष से विशेष बातचीत कर रहे थे. इस बातचीत में प्रोफेसर मटुक नाथ ने जूली के साथ अपने संबंधों पर चर्चा की. यही नहीं, उन्होंने शादी और लिव इन के अलावा समलैंगिंक संबंधों पर भी खुलकर चर्चा की. उन्होंने शादी को जहां आदमी की स्वतंत्रता में बाधक बताया, वहीं लिव इन रिलेशन को उचित बताया. इसी प्रकार उन्होंने समलैंगिक संबंधों को लाचारी में बना संबंध करार दिया है.

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