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ग्वालियर में AI की सूझबूझ से बची हेड कांस्टेबल की जान: करैत सांप के काटने पर TI ने अपनाए सही प्रोटोकॉल, SP भी पहुंचे अस्पताल

ग्वालियर (मध्य प्रदेश): वर्तमान दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) दैनिक कार्यों को आसान बनाने के साथ-साथ आपातकालीन स्थितियों में जीवन रक्षक की भूमिका भी निभा रहा है।

हाल ही में महाकाल मंदिर में एआई के जरिए चप्पल ढूंढने का मामला चर्चा में आया था, वहीं अब ग्वालियर से तकनीक के सकारात्मक उपयोग की अनूठी मिसाल सामने आई है। बिजौली थाना परिसर में पदस्थ एक प्रधान आरक्षक को जहरीले सांप ने डस लिया। इस नाज़ुक स्थिति में थाना प्रभारी ने घबराने या अंधविश्वास में पड़ने के बजाय तत्परता से एआई टूल की मदद ली, जिससे समय रहते सही प्राथमिक कदम उठाए जा सके और अस्पताल पहुंचने तक आरक्षक की जान सुरक्षित रही।

🐍 बिस्तर में घुसे जहरीले करैत सांप ने प्रधान आरक्षक को दो बार डंसा

यह घटना ग्वालियर के बिजौली थाना परिसर स्थित सरकारी पुलिस क्वार्टर की है।

क्वार्टर में सो रहे प्रधान आरक्षक पूरन सिकरवार के बिस्तर में अचानक एक जहरीला सांप घुस गया और उसने सोते समय आरक्षक को दो बार डस लिया। सर्पदंश का आभास होते ही आरक्षक ने तत्काल साथी पुलिस स्टाफ को सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही बिजौली थाना प्रभारी (TI) सौरभ श्रीवास्तव बिना विलंब किए तुरंत मौके पर पहुंच गए।

📱 अंधविश्वास से दूर, टीआई ने AI से पूछा- ‘सर्पदंश की स्थिति में क्या करें और क्या न करें’

सर्पदंश के मामलों में अक्सर लोग घबराहट में गलत तरीके अपना लेते हैं, किंतु टीआई सौरभ श्रीवास्तव ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया।

उन्होंने सबसे पहले सांप की स्पष्ट तस्वीर खींची ताकि उसकी प्रजाति की पहचान हो सके। इसके बाद उन्होंने अपने मोबाइल में एआई टूल से पूछा कि स्नेक बाइट (Snake Bite) की स्थिति में तात्कालिक तौर पर क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। एआई ने घाव पर चीरा लगाने (कट करने) या रस्सी-कपड़े से बहुत कसकर बांधने (Tourniquet) से सख्त मना किया। एआई द्वारा सुझाए गए प्रोटोकॉल का पालन करते हुए टीआई ने मरीज को स्थिर रखा और तुरंत सरकारी वाहन से जयारोग्य अस्पताल (JAH) के लिए रवाना हो गए।

🏥 डॉक्टरों को दिखाई सांप की तस्वीर, सही एंटी-वेनम से शुरू हुआ सटीक इलाज

थाना प्रभारी ने रास्ते में ही बेहट एसडीओपी (SDOP) मनीष यादव को स्थिति से अवगत करा दिया था, जिसके चलते अस्पताल में आपातकालीन मेडिकल टीम पहले से तैयार थी।

अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया। टीआई द्वारा दिखाई गई तस्वीर के आधार पर डॉक्टरों ने पुष्टि की कि काटा गया सांप अत्यंत विषैला ‘कॉमन करैत’ (Krait) था। सटीक पहचान होने से डॉक्टरों को सही एंटी-वेनम देने में आसानी हुई। घटना की जानकारी मिलते ही ग्वालियर पुलिस अधीक्षक (SP) भी घायल आरक्षक का हालचाल जानने अस्पताल पहुंचे।

🌿 प्रधान आरक्षक खतरे से बाहर, करैत सांप को रेस्क्यू कर सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया

थाना प्रभारी की त्वरित सूझबूझ, सही प्राथमिक उपायों और समय पर मिले चिकित्सीय उपचार की बदौलत प्रधान आरक्षक पूरन सिकरवार की जान बच गई है।

वर्तमान में वे खतरे से पूरी तरह बाहर हैं और एक निजी अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। वहीं, वन विभाग और सर्प विशेषज्ञों की मदद से पुलिस क्वार्टर में छिपे करैत सांप को सुरक्षित रेस्क्यू कर प्राकृतिक जंगल में छोड़ दिया गया है।

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