Logo
ब्रेकिंग
Raipur Election Commissioners Meet: नवा रायपुर अटल नगर में 11 साल बाद राष्ट्रीय सम्मेलन, डिजिटल तकनी... Kawardha Sugarcane Farmers Update: शक्कर कारखाना में सरदार पटेल की प्रतिमा का भूमिपूजन, किसानों को र... Sudivya Kumar Sonu Shraddha: गुरुवार को होगा दिवंगत नेता का द्वादश श्राद्ध, प्रशासन ने सुरक्षा और ट्... Jharkhand School Sports News: खेलो झारखंड का कमाल, जूडो में नेशनल ट्रायल के लिए रायपुर रवाना हुए दो ... Caspian Cobra Snake Bite India: हिमाचल प्रदेश में कैस्पियन कोबरा के डसने से दो लोगों की मौत, देश का ... Kainchi Dham Connectivity Update: श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी, काठगोदाम और ज्योलीकोट से जुड़ेगा ... Pithoragarh Lineman Death: शटडाउन लेने के बाद भी पोल पर चढ़े लाइनमैन की करंट लगने से मौत, ग्रामीणों ... IAS Tukaram Munde Exposes Hospital Bills: 11.50 रुपये का IV सेट 325 में क्यों? मेडिकल कंज्यूमेबल्स क... Yogi Government News: ओपी राजभर और अफसरों के बीच बढ़ा विवाद, जानिए क्या है पूरा मामला और क्यों हो रह... Box Murder Mystery Lucknow: बेरहमी से हत्या कर बक्से में ठूंसकर फेंका गया शव, मोहनलालगंज और निगोहां ...
Header Ad

पहलगाम हमला: वो धारा जो बनी आतंकियों को खाद देने वालों के लिए सहारा, खारिज हो गई NIA की मांग

0

जम्मू के एक स्पेशल जज ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से दायर उस आवेदन को खारिज कर दिया है जिसमें पहलगाम हमले में शामिल आतंकवादियों को शरण देने के आरोप में दो आरोपियों का पॉलीग्राफ यानी नार्को टेस्ट कराने की इजाजत मांगी गई थी. इसे झूठ पकड़ने वाला टेस्ट भी कहा जाता है. एडिशनल सेशन जज संदीप गंडोत्रा ​​ने कहा कि नार्को एनालिसिस और पॉलीग्राफ टेस्ट जैसी वैज्ञानिक तकनीकों का अनैच्छिक प्रयोग संविधान के अनुच्छेद 20 (3) के तहत प्रदत्त ‘स्वयं के खिलाफ गवाही न देने के अधिकार’ का उल्लंघन होगा.

कोर्ट ने 29 अगस्त के फैसले में कहा, ‘इस अधिकार का मूल आधार यह है कि अदालत में सबूत के तौर पर जो बयान पेश किए जाएं, वे भरोसेमंद और स्वेच्छा से दिए गए हों. किसी भी बड़े सार्वजनिक हित का हवाला देकर ऐसे संवैधानिक अधिकारों जैसे कि स्वयं के खिलाफ गवाही न देने का अधिकार को कमजोर नहीं किया जा सकता.’

ऐजेंसी ने क्या लगाए हैं आरोप?

22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन में धार्मिक पहचान के आधार पर पर्यटकों पर आतंकवादियों ने हमला कर 26 लोगों की हत्या कर दी थी. इस हमले की जांच बाद में एनआईए ने अपने हाथ में ले ली थी. वहीं, एनआईए ने अपनी जांच के दौरान दो स्थानीय लोगों बशीर अहमद जोथाद और परवेज अहमद को गिरफ्तार किया था, जिनके ऊपर आरोप है कि उन्होंने हमले से पहले आतंकवादियों को खाना और अन्य रसद मदद पहुंचाई थी.

एनआईए कोर्ट में दायर आवेदन में एजेंसी ने कहा था कि आरोपियों के बयानों में कोई तालमेल नहीं है और इसलिए जांच से संबंधित सटीक और ठोस सुराग हासिल करने के लिए नार्को टेस्ट जरूरी है. आरोपियों को हिरासत में कोर्ट में पेश किया गया, लेकिन उन्होंने नार्को टेस्ट के लिए सहमति देने से इनकार कर दिया. उन्होंने आतंकवादियों को किसी भी तरह की मदद करने के आरोपों से भी इनकार किया और कहा कि वे टट्टू सवार हैं और गुज्जर-बकरवाल समुदाय से हैं.

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 20(3) क्या है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 20(3) एक मौलिक अधिकार है जो आत्म-दोषसिद्धि का निषेध करता है, अर्थात किसी भी अपराध के आरोपी व्यक्ति को स्वयं के विरुद्ध गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता. यह अधिकार सुनिश्चित करता है कि किसी भी व्यक्ति को ऐसे सवालों के जवाब देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा, जिनसे उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चल सकता हो. आसान भाषा में समझा जाए तो अनुच्छेद 20(3) यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी आरोपी को अपनी ही जुबान से खुद को अपराधी साबित करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता.

Leave A Reply

Your email address will not be published.