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स्कूलों ने भेजे ही नहीं 10वीं-12वीं प्रोजेक्ट और प्रेक्टिकल परीक्षा के नंबर, कई स्टूडेंट हुए फेल

भोपाल। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिम) की 10वीं व 12वीं परीक्षा में सिस्टम की आपराधिक गलती सामने आई है। दरअसल, कई स्कूलों ने अपने विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट और प्रायोगिक परीक्षा के आंतरिक मूल्यांकन के अंक माशिम को भेजे ही नहीं। परिणाम जारी हुए तो ऐसे सैकड़ों विद्यार्थी फेल हो गए, वह भी तब जब लिखित परीक्षा में उनके बहुत अच्छे अंक आए थे।

दरअसल 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षा में 20 अंक के प्रोजेक्ट और 30 अंक की प्रायोगिक परीक्षा स्कूल स्तर पर ही होती है। परीक्षा के बाद इसके अंक माशिम के आनलाइन माड्यूल पर चढ़ाने होते हैं। यह पोर्टल पूरे समय खुला रहता है। स्कूलों में आनलाइन अंक चढ़ाने के काम में बड़ी गलती की गई और आधे-अधूरे अंक भेज दिए गए। अब इसका खामियाजा परीक्षार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।

28 विद्यार्थी कर चुके हैं शिकायत

अपनी गलती छिपाने के लिए स्कूल ऐसे विद्यार्थियों से जबरदस्ती दूसरी परीक्षा का आवेदन करा रहे हैं। माशिम के पास ऐसे 28 विद्यार्थियों की शिकायत आ चुकी है, जिनका कहना है कि प्रायोगिक परीक्षा देने के बावजूद स्कूल ने उनके अंक नहीं भेजे या आधे-अधूरे नंबर भेजे, जिसकी वजह से वे फेल हुए हैं।

कई विद्यार्थियों की शिकायत को खुद संबंधित स्कूल के प्राचार्य ने अग्रसारित किया है। यानी स्कूल खुद स्वीकार कर रहे हैं कि अंक भेजने में उनसे गलती हुई है। कई विद्यार्थियों की शिकायतें जिला शिक्षा अधिकारियों की ओर से भी अग्रसारित होकर आई हैं।

मंडल का दावा, उनकी गलती नहीं

मंडल के अधिकारियों का कहना है इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। अब ऐसे विद्यार्थियों को दूसरी परीक्षा के लिए आवेदन करना ही होगा। वे चाहें तो अंक सुधार के लिए परीक्षा दे सकते हैं। अगर परीक्षा नहीं देना चाहते हैं तो उनके आंतरिक मूल्यांकन के अंक स्कूल से लेकर सैद्धांतिक परीक्षा के अंकों को जोड़कर रिजल्ट तैयार कर लिया जाएगा। ऐसे विद्यार्थियों को दूसरी परीक्षा का सिर्फ ऑनलाइन आवेदन भरना होगा।

जिन विद्यार्थियों को सभी विषयों के आंतरिक मूल्यांकन के अंक के लिए दूसरी परीक्षा में आवेदन करना होगा, उन्हें ढाई हजार का शुल्क देना होगा। एक विषय की परीक्षा के लिए 500 रुपये शुल्क लगता है। ऐसे में पांच या छह विषय के लिए विद्यार्थी को ढाई से तीन हजार रुपये शुल्क देना होगा। इसके लिए आवेदन 31 मई तक करना होगा। परीक्षा 17 जून से होनी है।

अंकसूची में मार्च व जून माह का आएगा अंतर

माध्यमिक शिक्षा मंडल की पहली व दूसरी परीक्षा की अंकसूची एक ही रहेगी। इसमें अंतर सिर्फ मार्च व जून माह लिखा होगा। जिन विद्यार्थियों ने मार्च में परीक्षा दी है, उनकी अंकसूची पर मार्च 2025 व जिन विद्यार्थियों की दूसरी परीक्षा जून में होगी, उनमें जून 2025 लिखा होगा। इसके अलावा अंकसूची में प्रथम य द्वितीय परीक्षा जैसा कुछ भी नहीं लिखा होगा।

परीक्षार्थियों के साथ ऐसे हुआ है धोखा

केस-1 : सागर जिले के शासकीय उमावि खिमलासा का 12वीं का विद्यार्थी प्रेमसिंग कुशवाहा ने सैद्धांतिक परीक्षा में अच्छे अंक हासिल किए हैं। उसे संस्कृत विषय के प्रोजेक्ट में 19 के बदले एक अंक दिया गया है। इस कारण वह फेल हो गया। अब उस पर द्वितीय परीक्षा का फार्म भरने के लिए दबाव डाला जा रहा है। प्रेमसिंग का कहना है कि वह दोबारा परीक्षा देने को इच्छुक नहीं है। अगर दूसरी परीक्षा में अंक कम आए या वह फेल हो गया तो स्कूल वाले जिम्मेदार होंगे।

केस-2 : सागर जिले के शासकीय उमावि निवारी की छात्रा वैष्णवी कुशवाहा को सामाजिक विज्ञान में आंतरिक मूल्यांकन के अंक अपलोड नहीं होने के कारण फेल कर दिया गया है। वैष्णवी ने भी स्कूल प्राचार्य को आवेदन दिया, लेकिन अब उसे भी द्वितीय परीक्षा के लिए आवेदन करने को कहा जा रहा है।

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