Logo
ब्रेकिंग
BRICS Summit 2026: 'कमजोर कड़ी' से ग्लोबल ग्रोथ इंजन तक; 2012 से 2026 के बीच कैसे बदली भारत की तस्वी... 9/11 आतंकी हमले के 25 साल पूरे: पीएम नरेंद्र मोदी ने पीड़ितों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि Vellore Church Collapse: वेल्लोर में निर्माणाधीन चर्च की छत गिरने से 3 मजदूरों की मौत, 14 घायल; NDRF... हिमाचल के पहाड़ी रास्तों पर पर्यटकों को बड़ी राहत: देवड़ और हनोगी सुरंगें यातायात के लिए शुरू Neem Karoli Baba Film: नीम करोली बाबा पर बनी ‘हनुमान अंश’ की बंपर सफलता, स्वामी कैलाशनंद गिरी से मिल... MP Politics News: 'विकास के लिए आस्था से समझौता न हो', उमा भारती ने उज्जैन के 170 साल पुराने हनुमान ... महिला किसानों को बड़ी सौगात: झारखंड में जल्द शुरू होगी 'महिला किसान खुशहाली योजना' Bank Strike News: झारखंड में 30 हजार बैंक कर्मियों की हड़ताल से कामकाज ठप, 11 से 30 सितंबर तक 4 दिन ... साहिबगंज में गंगा ने तोड़ा 4 साल का रिकॉर्ड: 28.72 मीटर पहुंचा जलस्तर, तटीय इलाकों में दहशत Sahibganj News: साहिबगंज में अनोखी शादी; पति ने 8 साल पुराना रिश्ता तोड़ खुद कराई पत्नी की उसके प्रे...
Header Ad

सितंबर का महीना, पहाड़ों पर बिछी सफेद चादर, चोराबाड़ी ग्लेशियर पर एवलांच… उत्तराखंड के मौसम के अनेक रंग!

0

उत्तराखंड के केदारनाथ क्षेत्र के चोराबाड़ी ग्लेशियर में गुरुवार को एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया के तहत हल्का एवलांच (हिमस्खलन) दर्ज किया गया, जिसे लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है. रेस्क्यू टीमों को एहतियातन के तौर पर अलर्ट मोड पर रखा गया है. हालांकि, राहत की बात यह है कि इस घटना में कोई नुकसान नहीं हुआ है और स्थिति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है.

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने जानकारी देते हुए बताया कि गुरुवार दोपहर लगभग 2 बजे चोराबाड़ी ग्लेशियर क्षेत्र में एक एवलांच की घटना दर्ज की गई, जो कि मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार एक सामान्य प्रक्रिया है. उन्होंने बताया कि घटना के तुरंत बाद विशेषज्ञ टीमों को अलर्ट कर दिया गया. टीमें मौके की स्थिति का आकलन कर रही हैं. जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ने आमजन से अपील की है कि घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है.

केदारनाथ में हुआ एवलांच

इस प्रकार की प्राकृतिक गतिविधियां हिमालयी क्षेत्रों में सामान्य होती हैं. साथ ही उन्होंने लोगों से अफवाहों से बचने और किसी भी प्रकार की गलत या भ्रामक सूचना का प्रसार न करने का आग्रह किया है. आपको बता दें कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के बीच पश्चिमी विक्षोभ के व्यापक प्रभाव के कारण पहाड़ों में पारा लुढ़कने लगा है. इस कारण सितंबर की शुरुआत में भी बर्फबारी शुरू हो गई है.

मौसम ने बदला मिजाज

आमतौर पर अक्टूबर मध्य के बाद इस तरह की परिस्थितियां बनती थी, लेकिन इस बार मौसम के बदले मिजाज ने आम लोगों के साथ-साथ वैज्ञानिकों को भी हैरानी में डाल दिया है. पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही बारिश के बाद तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है. इस मानसूनी सीजन में बारिश के पैटर्न में काफी बदलाव देखा गया. कुछ जिलों में सामान्य से कई गुना ज्यादा, तो कुछ में बहुत कम बारिश रिकॉर्ड की गई. इस कारण, नदी-नाले उफान पर बना हुए हैं. साथ ही कई जगह रूक-रूक कर लैंडस्लाइड भी हो रही है.

Leave A Reply

Your email address will not be published.