
भागलपुर में गंगा का कहर: ऊर्जा मंत्री के पैतृक गांव राघोपुर में 60 फीट टूटा तटबंध, कई इलाकों में फैला पानी
भागलपुर (बिहार): बिहार के भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत खरीक प्रखंड स्थित राघोपुर गांव में सोमवार की देर रात राघोपुर-नरकटिया तटबंध में अचानक भीषण कटाव होने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री एवं गोपालपुर से विधायक शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल के पैतृक गांव में जल संसाधन विभाग के कैंप कार्यालय के ठीक समीप रात करीब 3:00 बजे तटबंध का एक बड़ा हिस्सा भरभरा कर ढह गया। प्राथमिक अनुमान के अनुसार, लगभग 60 फीट से अधिक लंबाई में तटबंध कट गया है। बांध टूटने के तुरंत बाद गंगा नदी का तेज बहाव आसपास के रिहायशी और कृषि इलाकों में तेजी से फैलने लगा, जिससे ग्रामीणों में बाढ़ को लेकर भारी दहशत का माहौल बन गया है।
🌊 गंगा के पानी का फैलाव रोकने के लिए ग्रामीणों और जल संसाधन विभाग का साझा प्रयास
मरम्मत कार्य और स्थानीय स्थिति:
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तत्काल एक्शन: तटबंध टूटने की सूचना मिलते ही जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और तकनीकी कर्मियों की टीम राहत सामग्रियों के साथ मौके पर पहुंची।
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युद्धस्तर पर काम: कटाव को आगे बढ़ने से रोकने के लिए जियो बैग, बालू की बोरियां और बोल्डर डालकर टूटे हुए हिस्से को सुरक्षित करने का काम फौरन शुरू किया गया।
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ग्रामीणों का सहयोग: बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए स्थानीय ग्रामीण भी खुद आगे आकर विभागीय कर्मचारियों के साथ बचाव और बांध की घेराबंदी में हाथ बंटा रहे हैं।
👮 डीएम अलंकृता पांडे और एसपी वैभव कुमार ने घटनास्थल का लिया जायजा
प्रशासनिक मुस्तैदी और मौके पर निरीक्षण:
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उच्चाधिकारियों का दौरा: हालात की गंभीरता को देखते हुए भागलपुर की जिलाधिकारी (DM) अलंकृता पांडे और नवगछिया के पुलिस अधीक्षक (SP) वैभव कुमार ने रात में ही प्रशासनिक अमले के साथ प्रभावित स्थल का सघन मुआयना किया।
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योजना की समीक्षा: दोनों अधिकारियों ने मौके पर मौजूद जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर और अनुमंडल स्तर के पदाधिकारियों से कटाव की रफ्तार और जलस्तर की स्थिति की समीक्षा की।
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युद्धस्तर पर कार्य का निर्देश: जिलाधिकारी ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि तटबंध के टूटे हिस्से को बांधने और पानी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए 24 घंटे लगातार युद्धस्तर पर काम किया जाए।
🛑 ‘लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी’: निचले इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के आदेश
सुरक्षा उपाय और ग्रामीणों की चिंताएं:
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सख्त चेतावनी: डीएम ने स्पष्ट किया कि तटबंध मरम्मत और बचाव अभियान में किसी भी स्तर पर कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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निचले इलाकों पर निगरानी: पानी के फैलाव से संभावित रूप से प्रभावित होने वाले निचले गांवों में राहत व्यवस्था, नावों की उपलब्धता और सुरक्षित निकासी के लिए प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
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स्थायी समाधान की जरूरत: ग्रामीणों का कहना है कि यदि अगले कुछ घंटों में टूटे तटबंध को पूरी तरह सील नहीं किया गया, तो गंगा का जलस्तर बढ़ते ही खरीक प्रखंड के कई अन्य गांवों में बाढ़ का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

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