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जोधपुर का स्वामीनारायण मंदिर बन रहा आध्यात्मिक उत्थान का केंद्र

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ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी जोधपुर के बीच बोचासनवासी श्री अक्षर पुरूषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) मंदिर एक अद्वितीय स्थल के रूप में उभरा. ये मंदिर भक्ति का एक पवित्र स्थान और आध्यात्मिक उत्थान का एक प्रकाश स्तंभ है. यह एक दिव्य जगह है जहां मन और आत्मा को शाश्वत शांति का अनुभव होता है. भक्ति, विश्वास और कृतज्ञता से निर्मित यह मंदिर ईश्वर की असीम महानता और अनंत दिव्यता के प्रति एक विनम्र भेंट है. यह हर आत्मा को आनंद, सत्य, चेतना और परम आनंद की ओर अनंत यात्रा पर निकलने के लिए आमंत्रित करता है.

यह मंदिर परिसर स्वामीनारायण संप्रदाय के संस्थापक भगवान स्वामीनारायण को समर्पित है. अपने जीवन और शिक्षा के जरिए उन्होंने हिंदू धर्म के शाश्वत सिद्धांतों के अनुसार नैतिक जीवन तथा सामाजिक उत्थान पर बल दिया. उनका जीवन आज भी दुनिया भर के लाखों लोगों को भक्ति, धार्मिकता और सत्य को दैनिक जीवन के मार्गदर्शक सिद्धांतों के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करता है.

इस मंदिर के पीछे प्रमुख स्वामी महाराज की प्रेरणा है. वह एक आध्यात्मिक गुरु रहे, जिनके निस्वार्थ, विनम्र और करुणामय जीवन ने अनगिनत जीवन बदल दिए. उन्होंने दुनिया भर में 1,200 से ज्यादा मंदिरों और सांस्कृतिक केंद्रों, साथ ही अस्पतालों, स्कूलों और मानवीय संस्थाओं के निर्माण को प्रेरित किया. साथ ही शांति, सद्भाव और नैतिक जीवन के अपने दृष्टिकोण से समाज का उत्थान किया. प्रमुख स्वामी महाराज हिंदू आस्था और संस्कृति के एक प्रखर प्रकाश स्तंभ थे.

इस मंदिर की परिकल्पना और साकार रूप महंत स्वामी महाराज, प्रमुख स्वामी महाराज के वर्तमान आध्यात्मिक उत्तराधिकारी और BAPS के वर्तमान गुरु, के दिव्य मार्गदर्शन में हुआ. अपने गुरु की दिव्य दृष्टि को साकार करते हुए महंत स्वामी महाराज ने दुनिया भर के हजारों स्वयंसेवकों को इस मंदिर के निर्माण के लिए समर्पण और निस्वार्थ सेवा को प्रेरित किया. उन्होंने संदेश देते हुए कहा कि हमारी प्राचीन हिंदू कला, वास्तुकला और संस्कृति के बारे में जानें. शांति, सद्भाव, नैतिकता और निस्वार्थ सेवा के शाश्वत मूल्यों को अपनाएं. अपने जीवन, परिवार और समाज में विश्वास और प्रेम का प्रवाह निरंतर बना रहे.

मंदिर की विशेषताएं

पवित्र पूजा मंडपः यहां हर विजिटर पवित्रता, शांति और ईश्वर की दिव्य उपस्थिति का अनुभव करता है. देवताओं के दर्शन भक्तों को आंतरिक शक्ति, शांति और आध्यात्मिक आनंद से भर देते हैं.

नीलकंठ अभिषेक मंडपमः भूतल पर भगवान स्वामीनारायण की नीलकंठ वर्णी के रूप में एक दीप्तिमान पंचधातु मूर्ति चमकती है. अपनी किशोरावस्था में, नीलकंठ वर्णी ने सात वर्षों तक पूरे भारत में 12,000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा की. इस दौरान त्याग, अनुशासन और भक्ति की प्रेरणा दी. यह मंडपम अभिषेक, प्रार्थना और चिंतन के लिए एक स्थान प्रदान करता है, जो आंतरिक शांति और आत्म-अनुशासन का संचार करता है.

सभा मंडपः एक विशाल सभागार में प्रवचन, भक्ति संगीत और सत्संग सभाएं आयोजित की जाती हैं, जो दैनिक जीवन के लिए व्यावहारिक आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करती हैं.

उद्यान और चिल्ड्रेन पार्कः मंदिर परिसर भूदृश्य उद्यानों से सुसज्जित है और जल्द ही इसमें एक चिल्ड्रेन पार्क भी होगा, जो सभी उम्र के विजिटर्स को शांति और आनंद प्रदान करेगा.

क्या है BAPS संगठन?

बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) एक वैश्विक सामाजिक-आध्यात्मिक हिंदू संघ है, जिसकी औपचारिक स्थापना 1907 में भगवान स्वामीनारायण की परंपरा के तीसरे आध्यात्मिक उत्तराधिकारी शास्त्रीजी महाराज ने की थी. वैदिक मूल्यों पर आधारित BAPS मंदिरों, शैक्षिक सेवाओं, स्वास्थ्य सेवा, आपदा राहत, नशामुक्ति अभियानों, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण आदि के माध्यम से मानवता की सेवा करता है. दुनिया भर में 5,025 से अधिक केंद्रों और संयुक्त राष्ट्र में एक सलाहकार गैर सरकारी संगठन के रूप में मान्यता प्राप्त, BAPS समग्र उत्थान, नैतिक जीवन और आध्यात्मिक जागृति के लिए कार्य करता है.

संस्थापक: भगवान स्वामीनारायण (1781-1830 ई.)

स्थापना: 1907 में शास्त्रीजी महाराज द्वारा

मुख्य उद्देश्य: नैतिक और सामाजिक उत्थान के साथ आध्यात्मिक प्रगति

विजन: सद्भाव, सह-अस्तित्व और विश्व बंधुत्व को बढ़ावा देना

आउटरीच: दुनिया भर में 1,700 से अधिक मंदिर, मान्यता प्राप्त मानवीय सेवाएं

मुख्य सिद्धांत: अक्षरब्रह्म गुरु के मार्गदर्शन में परब्रह्म पुरुषोत्तम के प्रति अटूट भक्ति

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