
जेपीएससी भर्ती रद्द करने पर हाईकोर्ट की रोक: छात्रों ने सरकार पर लगाया धोखाधड़ी का आरोप, सभी 24 जिलों में पुतला दहन का ऐलान
रांची (झारखंड): झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 11वीं से 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सेवा परीक्षाओं और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्तियां रद्द करने से जुड़ी अधिसूचना के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है।
सरकार की इस अधिसूचना को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह मामले की अगली सुनवाई की तिथि, यानी 15 सितंबर तक अपना विस्तृत शपथ पत्र व जवाब दाखिल करे।
🔥 छात्रों ने सरकार पर लगाया मिलीभगत और धोखाधड़ी का आरोप, 24 जिलों में पुतला दहन का ऐलान
अदालती आदेश के बाद अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश:
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सरकार पर ढिलाई का आरोप: जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के नेता कुणाल प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट में सरकार के फैसले का बचाव करने के लिए न तो महाधिवक्ता और न ही कोई वरिष्ठ अधिवक्ता उपस्थित हुए, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल उठते हैं।
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विरोध की रणनीति: छात्र संगठनों ने राज्य सरकार पर धोखा देने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को राज्य के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन करने का ऐलान किया है।
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मंच का दावा: मंच का कहना है कि यह केवल अभ्यर्थियों के आंदोलन को शांत कराने के लिए रची गई एक प्रशासनिक चाल थी।
🛑 26 दिनों के आंदोलन के बाद सरकार ने लिया था 22 परीक्षाएं रद्द करने का निर्णय
अभ्यर्थियों के पूर्व आंदोलन की पृष्ठभूमि:
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जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना: कथित अनियमितताओं और धांधली के खिलाफ हजारों अभ्यर्थियों ने रांची के ऐतिहासिक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार 26 दिनों तक व्यापक विरोध प्रदर्शन किया था।
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आंदोलन का स्थगन: सरकार द्वारा 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का आश्वासन और फैसला लिए जाने के बाद छात्रों ने अपने आंदोलन को 2 महीने के लिए स्थगित किया था।
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छात्रों में मायूसी: मंच के नेता रवींद्र पासवान ने कहा कि छात्रों को उम्मीद थी कि सरकार भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार को लेकर गंभीर है, लेकिन अदालती पैरवी में लापरवाही से हजारों युवाओं का भविष्य फिर अधर में लटक गया है।
📢 भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से कोई समझौता नहीं: देवेंद्र नाथ महतो
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता देवेंद्र नाथ महतो का बयान:
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अदालत के आदेश का सम्मान: भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर 16 दिनों तक आमरण अनशन करने वाले छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि वे अदालत की प्रक्रिया का सम्मान करते हैं।
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व्यवस्थागत सुधार की मांग: उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी विशेष अभ्यर्थी के विरोध में नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार, पेपर लीक और व्यवस्थागत खामियों को खत्म करने के लिए शुरू किया गया है।
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निर्दोषों को न्याय: महतो ने जोर दिया कि वास्तविक और योग्य उम्मीदवारों के हितों की रक्षा होनी चाहिए, लेकिन चयन प्रक्रिया में हुई धांधली से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

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