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खैरागढ़ में कोटवारों का हल्लाबोल: बेमियादी हड़ताल शुरू, वंशानुगत नियुक्ति और ड्यूटी व्यवस्था पर प्रशासन से आर-पार

खैरागढ़ (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ में विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच अब खैरागढ़ जिले के कोटवारों ने अपनी मांगों के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है। कोटवार नियुक्ति में नियमों की कथित अनदेखी, गैर-वंशजों की नियुक्ति और मनमानी ड्यूटी व्यवस्था के विरोध में कोटवारों ने बेमियादी (अनिश्चितकालीन) हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के चलते ग्रामीण और राजस्व प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है, जबकि कोटवार संघ ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं होता, यह आंदोलन जारी रहेगा।

📜 वंशानुगत परंपरा की अनदेखी का आरोप: गैर-वंशजों को दी जा रही नियुक्ति

कोटवार संघ के मुख्य आरोप और आपत्तियां:

  • वंशानुगत नियमों का उल्लंघन: संघ का सबसे गंभीर आरोप है कि वर्षों से चली आ रही वंशानुगत नियुक्ति व्यवस्था को दरकिनार कर कोटवार परिवारों के वास्तविक व पात्र वंशजों की जगह गैर-वंशजों को पद पर नियुक्त किया जा रहा है।

  • अस्थायी बनाम स्थायी व्यवस्था: कहीं पर अस्थायी तो कहीं स्थायी नियुक्ति किए जाने से प्रशासनिक प्रक्रिया में भारी विसंगतियां और पारदर्शिता का अभाव देखा जा रहा है।

  • मनमानी ड्यूटी व्यवस्था: तहसील कार्यालयों द्वारा कोटवारों की ड्यूटी अलग-अलग और दूर-दराज के स्थानों पर लगाए जाने पर भी कड़ा विरोध जताया गया है; संघ का आरोप है कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद स्थानीय स्तर पर मनमानी की जा रही है।

⚖️ 1959 की धारा 230 का हवाला: दल्लीखोली गांव के मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग

कानूनी प्रावधान और संघ का रुख:

  • धारा 230 के तहत नियुक्ति: कोटवार संघ के जिलाध्यक्ष बिरेश कुमार मेश्राम ने ‘भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 230’ का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि नियमानुसार कोटवार पद पर संबंधित परिवार के मूल वंशज को ही प्राथमिकता व नियुक्ति मिलनी चाहिए।

  • दल्लीखोली मामले की जांच: उन्होंने छुईखदान तहसील अंतर्गत ग्राम दल्लीखोली का विशेष उदाहरण देते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

📢 25 अगस्त को तहसील धरना स्थल से कलेक्ट्रेट तक महारैली, सौंपेंगे ज्ञापन

आगामी रणनीति और प्रशासनिक स्थिति:

  • कलेक्ट्रेट घेराव और ज्ञापन: संघ के निर्णय अनुसार 25 अगस्त को सभी आंदोलनकारी कोटवार तहसील धरना स्थल से जिला कलेक्टर कार्यालय तक विरोध रैली निकालेंगे और कलेक्टर को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपेंगे।

  • अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी: जिलाध्यक्ष बिरेश कुमार मेश्राम ने स्पष्ट किया कि जब तक शासन और प्रशासन उनकी मांगों पर ठोस व लिखित कार्रवाई नहीं करता, तब तक यह अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।

  • प्रशासनिक रुख पर नजरें: खैरागढ़ में कोटवारों के इस तीव्र विरोध प्रदर्शन और हड़ताल को लेकर जिला प्रशासन क्या निर्णय लेता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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