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जाली दस्तावेजों से बांग्लादेशियों के पासपोर्ट बनाने का भंडाफोड़: गुजरात से लेकर मध्य प्रदेश तक फैला नेटवर्क

ग्वालियर/भोपाल: मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों और कूटचरित कागजातों के आधार पर बांग्लादेशी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट तैयार कराने वाले एक अत्यंत गंभीर सिंडिकेट की गतिविधियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं।

मामले की गहराई से विवेचना कर रही मध्य प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अब तक चार प्रमुख संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि नागपुर से पकड़े गए एक बांग्लादेशी आरोपी जाय चौधरी बरूआ का पासपोर्ट गुजरात के सीमावर्ती जनपद कच्छ के मथल गांव के पते पर तैयार किया गया था। चूंकि कच्छ जिला अंतरराष्ट्रीय पाकिस्तान सीमा से सटा हुआ है, इसलिए सुरक्षा और जासूसी के दृष्टिकोण से एसटीएफ की विशेष टीम इस आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है।

📍 बौद्ध विहारों और अंबेडकर पार्कों के पते का दुरुपयोग: डबरा और भोपाल बने फर्जीवाड़े के केंद्र

विभिन्न जिलों में फर्जी पासपोर्ट बनने का ब्योरा:

  • उल्लासनगर से गिरफ्तारी: महाराष्ट्र के उल्लासनगर से दबोचे गए मुख्य आरोपी प्रियान राय का पासपोर्ट ग्वालियर जिले के डबरा स्थित एक बौद्ध विहार के पते पर बनाया गया था।

  • पतों का दुरुपयोग: अब तक सामने आई जांच के अनुसार, डबरा स्थित बौद्ध मठ के पते पर 17 और भोपाल के अन्ना नगर स्थित बौद्ध मठ के पते पर 40 फर्जी पासपोर्ट तैयार कराए जा चुके हैं।

  • अन्य जिलों में नेटवर्क: इसके अतिरिक्त बैतूल जिले से 11, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा से एक-एक संदिग्ध पासपोर्ट बनने का मामला प्रमाणित हो चुका है।

  • असम कनेक्शन: प्रारंभिक जांच में उजागर हुआ है कि इन सभी संदिग्धों के फर्जी पहचान पत्र असम के कामरूप जिले के निवासी रियाल चौधरी द्वारा तैयार कराए गए थे।

👮‍♂️ सत्यापन प्रक्रिया में शामिल 15 सरकारी कर्मचारी राडार पर: तत्कालीन थाना प्रभारी भी सूची में शामिल

लापरवाही और मिलीभगत पर एसटीएफ का शिकंजा:

  • सिस्टम पर सवाल: एसटीएफ अब उन सरकारी विभागों, नगर पालिका/निगम कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों की भूमिका की जांच कर रही है, जिन्होंने निवास और चरित्र सत्यापन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की थी।

  • 15 कर्मचारियों के नाम चिन्हित: पुलिस और अन्य प्रशासनिक महकमों के कुल 15 अधिकारी व कर्मचारी सीधे जांच के दायरे में आ चुके हैं।

  • पुलिस और पासपोर्ट केंद्र: संदिग्धों की सूची में डबरा थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी (TI) विनायक शुक्ला, प्रधान आरक्षक भूपेंद्र गुर्जर समेत पासपोर्ट सेवा केंद्र के संविदा व नियमित कर्मचारी भी शामिल हैं।

📈 200 के पार पहुंच सकती है फर्जी पासपोर्ट की संख्या: 70 की पुष्टि, 100 से अधिक की जांच जारी

जांच का विस्तृत दायरा और आगामी कार्रवाई:

  • आशंका और आंकड़े: जांच अधिकारियों का अनुमान है कि इस संगठित गिरोह द्वारा बनवाए गए कुल फर्जी पासपोर्टों की संख्या 200 के पार पहुंच सकती है।

  • 70 की हो चुकी पुष्टि: एसटीएफ द्वारा अब तक 70 जाली पासपोर्टों की पुष्टि विधिवत रूप से की जा चुकी है, जबकि 100 से अधिक अन्य संदेहास्पद पासपोर्टों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

  • एसपी एसटीएफ का बयान: स्पेशल टास्क फोर्स के पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि नागपुर से पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिक के कच्छ कनेक्शन की पड़ताल के लिए एक विशेष जांच दल गुजरात भेजा जा रहा है। सत्यापन में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।

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