Logo
ब्रेकिंग
Dhamtari Maratha Community: मराठा पारा में जीवंत हुई सदियों पुरानी संस्कृति; महालक्ष्मी पूजा में उमड... Chhattisgarh CM Visit: रायगढ़ के बनोरा आश्रम में सीएम साय ने खाया पंगत में प्रसाद; 8 एकड़ में बने आध... Ranchi TB Free Mission: टीबी मुक्त झारखंड के लिए NHM की बड़ी पहल; 350 NCC कैडेट्स बने 'माई भारत वॉलि... Katras Coalfield Threat: धनबाद में भू-धंसान प्रभावित परिवारों को अटल क्लिनिक में मिली शरण; बेलगड़िया... Surender Koli Death Mystery: हरिद्वार में मृत मिले सुरेंद्र कोली को लेकर पीड़ित परिवार का आरोप, 'जान... FDA Alert Maharashtra: इंदौर की कंपनी द्वारा निर्मित पैरासिटामोल व टेल्मिसर्टन टैबलेट्स की जांच रिपो... Beneshwar Dham News: डूंगरपुर में भारी बारिश से टापू बना प्रसिद्ध बेणेश्वर धाम; त्रिवेणी संगम उफान प... Maharashtra Railway Infrastructure: मुकुटबन-गडचांदूर के बीच बनेगी 38 किमी नई रेल लाइन; ₹493 करोड़ की... Surender Koli Suicide News: निठारी कांड के चर्चित आरोपी सुरेंद्र कोली की संदिग्ध मौत, हरिद्वार में ल... Punjab Politics: पंजाब में नशे के खिलाफ BJP का आर-पार का संग्राम; 4 कोनों से शुरू होंगी यात्राएं, जा...
Header Ad

GST काउंसिल के ऐतिहासिक फैसले से रियल एस्टेट क्षेत्र को मिली नई गति

0

नई दिल्ली : आज आयोजित जीएसटी काउंसिल की बैठक में भारतीय कर ढांचे से जुड़े एक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए, जिसने रियल एस्टेट उद्योग को नई दिशा और मजबूती प्रदान की है। काउंसिल ने लंबे समय से चली आ रही कर संरचना की जटिलताओं को सरल बनाते हुए 5%, 12%, 18% और 28% की चार अलग-अलग स्लैब्स को एकीकृत संरचना में बदल दिया है। साथ ही, सीमेंट और अन्य प्रमुख निर्माण सामग्रियों पर जीएसटी को 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है। यह सुधार न केवल रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए बल्कि पूरे हाउसिंग इकोसिस्टम के लिए दूरगामी और क्रांतिकारी साबित होगा।

निर्माण सामग्रियों पर ऊंची कर दरें अब तक डेवलपर्स के लिए बड़ी चुनौती रही हैं, जिसके कारण निर्माण लागत बढ़ जाती थी और प्रोजेक्ट्स के वित्तीय प्रबंधन पर दबाव पड़ता था। काउंसिल के इस निर्णय से सीधे तौर पर इनपुट कॉस्ट में कमी आएगी, जिससे प्रोजेक्ट्स की कुल लागत घटेगी और डेवलपर्स को समयबद्ध तरीके से प्रोजेक्ट्स पूरे करने में मदद मिलेगी। यह राहत केवल उद्योग तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि घर खरीदारों तक भी पहुंचेगी, क्योंकि कम हुई लागत का लाभ सीधे तौर पर ग्राहकों तक पहुंचेगा और उन्हें किफायती दामों पर मकान उपलब्ध होंगे। इस फैसले से खासकर किफायती और मिड-सेगमेंट हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को सबसे अधिक प्रोत्साहन मिलेगा, जो भारतीय हाउसिंग बाजार की रीढ़ माने जाते हैं।

सारांश त्रेहान, मैनेजिंग डायरेक्टर, त्रेहान ग्रुप ने कहा कि यह निर्णय रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए दूरदर्शी और ऐतिहासिक है। उनके अनुसार, इनपुट कॉस्ट घटने से न केवल डेवलपर्स पर वित्तीय दबाव कम होगा बल्कि नए प्रोजेक्ट्स को लॉन्च करना आसान होगा और ग्राहकों के लिए मकान खरीदना भी पहले से अधिक सुलभ हो जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कदम हाउसिंग सेक्टर में नई मांग को बढ़ावा देगा, बाजार में भरोसा मजबूत करेगा और रियल एस्टेट को लंबे समय तक स्थायी विकास की राह पर आगे ले जाएगा।

नीरज के. मिश्रा, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, गंगा रियल्टी ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि लंबे समय से डेवलपर्स इनपुट्स पर ऊंची टैक्स दरों से जूझ रहे थे, खासकर किफायती और मिड-सेगमेंट हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में। इस सुधार से निर्माण लागत घटेगी और प्रोजेक्ट्स अधिक किफायती बनेंगे। उनके अनुसार, यह कदम न केवल ग्राहकों का भरोसा बढ़ाएगा बल्कि प्रोजेक्ट्स की समयबद्ध पूर्ति को भी सुनिश्चित करेगा। गंगा रियल्टी का मानना है कि यह सुधार रियल एस्टेट क्षेत्र को नई विकास लहर प्रदान करेगा और ‘सबके लिए घर’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी काउंसिल का यह सुधार रियल एस्टेट सेक्टर में लंबे समय से प्रतीक्षित स्थिरता लाएगा। इससे न केवल नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च होंगे बल्कि निवेशकों और घर खरीदारों दोनों का भरोसा मजबूत होगा। इस निर्णय ने उद्योग जगत को यह भरोसा दिया है कि सरकार रियल एस्टेट जैसे प्रमुख क्षेत्र को दीर्घकालिक विकास और मजबूती की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले वर्षों में यह सुधार न केवल निर्माण लागत को नियंत्रित करेगा बल्कि हाउसिंग की मांग को गति देकर भारत को “सबके लिए घर” के लक्ष्य के और करीब ले जाएगा।

Leave A Reply

Your email address will not be published.